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Siddharthnagar News: सुवांव को फिर मिलेगा जीवन, चीनी मिलों की मदद से होगा कायाकल्प
Thu, 28 May 2026 02:12 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 28 May 2026 02:12 AM IST
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सिद्धार्थनगर। जल्द ही बलरामपुर और जिले में गुजरने वाली विलुप्तप्राय हो रहे सुवांव नदी के पुनरुद्धार का कार्य कराया जाएगा। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के आदेश पर चीनी मिलों और औद्योगिक इकाईयों के सीएसआर मद से यह कार्य होना है। एनजीटी के आदेश के अनुपालन में जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद चीनी मिलों के प्रबंधन को पत्र भेजकर सीएसआर मद की धनराशि उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत नाले में बदल चुके सुवांव नदी बेसिन जीर्णोद्धार के तहत चौड़ा और गहरा करने के साथ ही किनारे पर जैव विविधता पार्क का विकास किया जाएगा।
बलरामपुर जिले में चांदेताल से निकलने वाली 82 किमी लंबी सुवांव ड्रेन रसूलाबाद और गजनीजोत के पास जिले में प्रवेश करती है, जो आगे जाकर बिथरिया के पास राप्ती नदी में मिलती है। सिद्धार्थनगर जिले में इसकी लंबाई लगभग छह किमी है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में दाखिल याचिका पटेश्वरी प्रसाद सिंह बनाम उप्र राज्य व अन्य में एनजीटी ने 15 जनवरी 2026 को आदेश पारित किया। एनजीटी ने तीन महीने के भीतर सुवांव नदी बेसिन में स्थित बलरामपुर चीनी मिल (बीसीएम) और बजाज मिल जैसी उद्योगों को पर्यावरण सामाजिक उत्तरदायित्व (ईएसआर) कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के लिए निर्धारित अपने निधियों का एक भाग बलरामपुर और सिद्धार्थनगर स्थित जिला गंगा समितियों को उपलब्ध कराने का आदेश दिया।
इससे जैव विविधता पार्क विकास, वनरोपण, मृदा संरक्षण, चारागाह विकास और प्रबंधन, सुआव नदी बेसिन में भूदृश्य सुधार कार्य कराया जा सके। इसके अनुपालन में उप्र शासन के संयुक्त सचिव चिरौंजी लाल ने कार्रवाई के लिए बलरामपुर और सिद्धार्थनगर के डीएम को पत्र भेजा है। इसके बाद डीएम शिवशरणप्पा जीएन ने सुवांव नदी बेसिन के पुनरोद्धार के लिए बैठक की, जिसके बाद डीएफओ की ओर से बलरामपुर और बस्ती जनपद में स्थित चीनी मिल प्रबंधकों को एनजीटी के आदेश के अनुपालन में सीएसआर एवं ईएसआर फंड का एक निर्धारित हिस्सा जिला गंगा समिति को आवंटित करने के लिए पत्र भेजा गया है।
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बलरामपुर जिले में चांदेताल से निकलने वाली 82 किमी लंबी सुवांव ड्रेन रसूलाबाद और गजनीजोत के पास जिले में प्रवेश करती है, जो आगे जाकर बिथरिया के पास राप्ती नदी में मिलती है। सिद्धार्थनगर जिले में इसकी लंबाई लगभग छह किमी है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में दाखिल याचिका पटेश्वरी प्रसाद सिंह बनाम उप्र राज्य व अन्य में एनजीटी ने 15 जनवरी 2026 को आदेश पारित किया। एनजीटी ने तीन महीने के भीतर सुवांव नदी बेसिन में स्थित बलरामपुर चीनी मिल (बीसीएम) और बजाज मिल जैसी उद्योगों को पर्यावरण सामाजिक उत्तरदायित्व (ईएसआर) कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के लिए निर्धारित अपने निधियों का एक भाग बलरामपुर और सिद्धार्थनगर स्थित जिला गंगा समितियों को उपलब्ध कराने का आदेश दिया।
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इससे जैव विविधता पार्क विकास, वनरोपण, मृदा संरक्षण, चारागाह विकास और प्रबंधन, सुआव नदी बेसिन में भूदृश्य सुधार कार्य कराया जा सके। इसके अनुपालन में उप्र शासन के संयुक्त सचिव चिरौंजी लाल ने कार्रवाई के लिए बलरामपुर और सिद्धार्थनगर के डीएम को पत्र भेजा है। इसके बाद डीएम शिवशरणप्पा जीएन ने सुवांव नदी बेसिन के पुनरोद्धार के लिए बैठक की, जिसके बाद डीएफओ की ओर से बलरामपुर और बस्ती जनपद में स्थित चीनी मिल प्रबंधकों को एनजीटी के आदेश के अनुपालन में सीएसआर एवं ईएसआर फंड का एक निर्धारित हिस्सा जिला गंगा समिति को आवंटित करने के लिए पत्र भेजा गया है।
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