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सड़क, दफ्तर और अस्पताल में पानी भरा

Fri, 22 Jul 2016 11:01 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर Updated Fri, 22 Jul 2016 11:01 PM IST
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The road, in the office and hospital water
नौगढ़ पीएचसी में पानी भरने से चार दिनों से बंद है अस्पताल। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। गुरुवार की रात से शुरू हुई बारिश से सरकारी कार्यालयों, आवासों व परिसरों में पानी भर गया है। जलजभराव से शुक्रवार को नौगढ़ पीएचसी का ताला नहीं खुल पाया। पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस और कार्यालय परिसर में मुख्य द्वार पर ही जलजमाव से अधिकारियों-कर्मचारियों को पानी से होकर गुजरना पड़ा। आवासीय परिसर को जाने वाली सड़कों पर भी पर्याप्त पानी लगने से आवागमन बाधित हो गया है। जिला अस्पताल की ओपीडी की छत पूरे दिन टपकती रही, जिससे मरीजों को फजीहत झेलनी पड़ी।
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गुरुवार की आधी रात के बाद से ही बारिश का सिलसिला शुरू हुआ था। रुक-रुक कर जारी तेज व रिमझिम बारिश के चलते निचले इलाकों में काफी पानी लग गया था। सुबह लोगों की नींद खुली तो कई सड़कों पर पानी भरा था। सरकारी कार्यालय और आवासीय परिसरों की हालत सबसे खस्ता थी। दुर्व्यवस्था के लिए लोग विभागीय जिम्मेदारों को कोसते नजर आए। उनका कहना था कि सावन की शुरुआत में ही यह हाल है तो इन स्थानों का आगे क्या होगा।
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सिद्धार्थनगर। नौगढ़-उसका मुख्य मार्ग पर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में लगातार बारिश के चलते जलभराव की स्थिति पहले से बनी हुई थी। गुरुवार की रात बारिश के बाद पीएचसी भवन तक पहुंचने का कोई रास्ता ही नहीं था। अस्पताल के वार्डों तक पानी पहुंच गया। स्थिति यह थी कि तमाम कोशिशों के बाद भी स्वास्थ्य कर्मचारी पीएचसी तक नहीं पहुंच सके। नतीजा अस्पताल पर ताला लटका रहा। इलाज कराने पहुंचे मरीज भी अस्पताल की बीमारी देख बाहर से ही लौट गए।
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बताते हैं कि वर्ष 1958 में निर्मित पीएचसी का भवन जर्जर हो चुका है। सड़क से नीचे होने के कारण अक्सर पानी भर जाता है। छत भी टपकती रहती है। पिछले दिनों स्वास्थ्य कर्मचारियों ने इसके विरोध में प्रदर्शन भी किया था। हर साल होने वाली इस समस्या का कोई समाधान नहीं ढूंढा जा सका है। पिछले वर्ष 4 लाख रुपये खर्च कर मिट्टी डालने की कागजी खानापूर्ति की गई थी, जो हल्की बारिश में ही बह गई। सीएमओ डॉ. राजेंद्र कपूर  नौगढ़ पीएचसी का भवन काफी पुराना है।
सड़क से नीचे होने के कारण पानी लग जाता है। इस समस्या से उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया था। प्रमुख सचिव के निर्देशानुसार एस्टीमेट तैयार करने के लिए विभागीय जेई को निर्देशित कर दिया गया है। जल्द ही समस्या का स्थाई समाधान होगा।
सिद्धार्थनगर। लोक निर्माण विभाग के प्रांतीय खंड परिसर में मुख्य प्रवेश द्वार से लेकर पिछले हिस्से में स्थित आवासीय परिसर तक हर तरफ पानी लगा हुआ है। स्थिति यह है कि आने-जाने वालों को घुटने से नीचे तक पानी से गुजरना पड़ रहा है। इसी परिसर में अतिथियों के विश्राम के लिए निर्मित रेस्ट हाउस भी निर्मित है, जो खुद पानी से घिरा रहा। पीडब्लूडी के भवन का निर्माण 1959 में हुआ था। तब परिसर सड़क से ऊपर था।
बाद में सड़क की ऊंचाई बढ़ती गई और यह परिसर नीचे चला गया। वैसे पानी निकासी के लिए नालियां भी बनाई गई हैं, लेकिन आधी दूरी के बाद अतिक्रमण कर नाली बंद कर दी गई है। इसका खामियाजा सामान्य बारिश में भी भुगतना पड़ रहा है। अधिशासी अभियंता सीपी गुप्ता सड़क ऊंची होने के कारण यह दिक्कत रहती है। पानी निकासी के लिए नाली बनाई गई है, मगर अतिक्रमण के चलते नाली बंद कर दिए जाने से निकासी नहीं हो पा रही। प्रशासन की मदद से इसे दुरुस्त करने का कार्य शीघ्र किया जाएगा। 
सिद्धार्थनगर। जिले के सबसे बड़े अस्पताल के व्यवस्थाओं की कलई बारिश ने खोल दी है। अस्पताल के जर्जर व कमजोर छत पर पानी लगने के बाद पूरे परिसर में जगह-जगह पानी टपकता रहा।

ओपीडी में मुख्य प्रवेश द्वार पर सीएमएस कार्यालय के पास टपकती छत से मरीज जूझते रहे तो कमरा नंबर 10, 11 के आस-पास भी पानी टपकने इंतजार में बैठे मरीज परेशान रहे। अस्पताल के सामान्य वार्ड, आईसीयू वार्ड की गैलरी सहित कई अन्य स्थानों पर छत का पानी नीचे टपकता रहा। बताते हैं कि इस बारे में जिम्मेदारों को पहले भी सूचित किया गया, मगर उनकी बेरुखी से समस्या जस की तस है। कागजी खानापूर्ति कर जिम्मेदार बेखबर बने हुए हैं।
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