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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Siddharthnagar News ›   The museum will open with the Kingdom of Kapilavastu

संग्रहालय के साथ खुलेगा कपिलवस्तु का राज

Thu, 17 Mar 2016 10:52 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, सिद्धार्थनगर
ब्यूरो/ अमर उजाला, सिद्धार्थनगर Updated Thu, 17 Mar 2016 10:52 PM IST
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पिपरहवा में स्थापित भारतीय बौद्ध संग्रहालय के लोकार्पण के साथ ही यह भी स्पष्ट होगा कि महात्मा बुद्ध के क्रीड़ांगन वाला कपिलवस्तु वास्तव में भारत में ही है। संग्रहालय में ऐसे अनेक साक्ष्य अवलोकनार्थ रखे जाएंगे जिससे भारतीय सीमा में कपिलवस्तु के दावे को मजबूती मिलेगी। अब तक यह साक्ष्य जनता की पहुंच से दूर रहा है।
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छठीं शताब्दी ईसा पूर्व में कपिलवस्तु शाक्य गणराज्य की राजधानी थी। यहां के राजा शुद्धोधन थे जिनके पुत्र सिद्धार्थ हुए जो ज्ञान प्राप्ति के बाद बुद्ध बने। महात्मा बुद्ध के प्रारंभ के 29 वर्ष कपिलवस्तु में ही बीते हैं। लिहाजा दुनिया भर में फैले करोड़ों बौद्ध अनुयायियों के लिए यह स्थल किसी तीर्थ से कम नहीं है। भारतीय सीमा से सटे नेपाल में कपिलवस्तु नाम से जिला है। नेपाल इसे ही वास्तविक कपिलवस्तु ठहराता रहा है। प्रचारित-प्रसारित करता रहा है।
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वर्ष- 1898 में तत्कालीन बर्डपुर स्टेट के ब्रिटिश अधिकारी डब्लू सी.पेपे ने पिपरहवा में खुदाई के दौरान कई वास्तु अवशेषों के साथ भगवान बुद्ध का अस्थि कलश प्राप्त किया था। इस पर ब्राह्मी लिपि में अंकित लेखों में यह स्पष्ट था कि भगवान बुद्ध के अस्थि अवशेषों को स्तूप में उनके शाक्य भाइयों, बहनों, पुत्र-पुत्रियों ने रखे थे। बाद में 1971 से 74 तक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधिकारी केएम श्रीवास्तव के निर्देश में चले उत्खनन में मिले कई अन्य अवशेषों पर यह भी लिखा था कि इस क्षेत्र मेें देवपुत्र ने निवास किया था।
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 खुदाई के बाद इन अवशेषों को कोलकाता, दिल्ली के संग्रहालयों में ले जाया गया जिन्हें रख दिया गया था। लिहाजा यहां आने वाले पर्यटक कपिलवस्तु की इस सच्चाई से महरूम हो रहे थे। अब बौद्ध संग्रहालय के साथ यह असमंजस काफी हद तक दूर हो जाएगा।
पुरातत्व विभाग उत्खनन में मिले सभी वास्तु अवशेषों को नवनिर्मित संग्रहालय में रखेगा। इन अवशेषों पर स्पष्ट रूप से अंकित लेखों के माध्यम से देशी-विदेशी पर्यटक कपिलवस्तु की सच्चाई से रुबरु होंगे। जिले के पर्यटकीय विकास के क्षेत्र में यह कदम को बेहद अहम माना जा रहा है।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण लखनऊ के सहायक पुरातत्वविद डॉ.शगुन अहमद के मुताबिक बौद्ध संग्रहालय में उत्खनन से मिली सामग्रियों को यहां अवलोकनार्थ रखा जाएगा। तस्वीरों और अवशेषों के माध्यम से कपिलवस्तु के संपूर्ण इतिहास को स्पष्ट किया जाएगा।

वर्ष- 1898, वर्ष -1971 से 74 तक उत्खनन में मिली सामग्रियों को प्रदर्शित किया जाएगा। जो चीजें किन्हीं कारणों से मूल रूप में उपलब्ध नहीं है। उसे चित्र के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा। इनके अवलोकन से यहां आनेवाले लोग कपिलवस्तु की वास्तविकता से वाकिफ हो सकेंगे।
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