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Siddharthnagar News: अल्लाह की रहमत हासिल करने में जुटे रोजेदार
Sun, 01 Mar 2026 02:52 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 01 Mar 2026 02:52 AM IST
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बांसी। इबादत, संयम और रहमत के पवित्र माह रमजान का पहला अशरा शनिवार को पूरा होने पर रोजेदार काफी खुश हैं। अल्लाह की रजा के लिए इबादत में व्यस्त हैं। क्षेत्र की सभी इबादतगाहों में लोग सुबह से देर रात तक इबादत करते नजर आ रहे हैं।
रमजान में रोजा रखना फर्ज है। रोजे के साथ नमाज अदा करके लोग अल्लाह की इबादत कर उनकी रहमत हासिल करने की कोशिश करते हैं। रोजा रखने का मुख्य उद्देश्य अल्लाह को खुश करना और उनकी रहमत प्राप्त करना माना जाता है।
अकबरनगर वार्ड के जामा मस्जिद के इमाम कारी सैयद ताहिर का कहना है कि रोजा सिर्फ भूखे-प्यासे रहना ही नहीं बल्कि रूह को शुद्ध करने और नेकी के रास्ते पर चलने की एक इबादत है। रोजा सुबह फज्र की नमाज से पहले सहरी के बाद तक रखा जाता है। इसके बाद पूरे दिन भूखे-प्यासे रहकर अल्लाह की इबादत और अपने कर्म को करते हुए शाम को मगरिब की नमाज के बाद इफ्तार किया जाता है। इस समय सुबह सूर्योदय के बाद और शाम को सूर्यास्त के पहले तक लगभग तेरह घंटे रोजा रखा जारहा है।
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कुरान के सूरह अल-बकरा के अनुसार रमजान का महीना वह है, जिसमें कुरआन नाजिल किया गया, जो लोगों के लिए हिदायत है और सही-गलत में फर्क बताने वाला है। इस कारण रमजान सिर्फ भूख और प्यास सहने का नाम नहीं बल्कि हिदायत और आत्म-सुधार का महीना है।
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रमजान में रोजा रखना फर्ज है। रोजे के साथ नमाज अदा करके लोग अल्लाह की इबादत कर उनकी रहमत हासिल करने की कोशिश करते हैं। रोजा रखने का मुख्य उद्देश्य अल्लाह को खुश करना और उनकी रहमत प्राप्त करना माना जाता है।
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अकबरनगर वार्ड के जामा मस्जिद के इमाम कारी सैयद ताहिर का कहना है कि रोजा सिर्फ भूखे-प्यासे रहना ही नहीं बल्कि रूह को शुद्ध करने और नेकी के रास्ते पर चलने की एक इबादत है। रोजा सुबह फज्र की नमाज से पहले सहरी के बाद तक रखा जाता है। इसके बाद पूरे दिन भूखे-प्यासे रहकर अल्लाह की इबादत और अपने कर्म को करते हुए शाम को मगरिब की नमाज के बाद इफ्तार किया जाता है। इस समय सुबह सूर्योदय के बाद और शाम को सूर्यास्त के पहले तक लगभग तेरह घंटे रोजा रखा जारहा है।
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कुरान के सूरह अल-बकरा के अनुसार रमजान का महीना वह है, जिसमें कुरआन नाजिल किया गया, जो लोगों के लिए हिदायत है और सही-गलत में फर्क बताने वाला है। इस कारण रमजान सिर्फ भूख और प्यास सहने का नाम नहीं बल्कि हिदायत और आत्म-सुधार का महीना है।