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Siddharthnagar News: शिव-पार्वती विवाह का प्रसंग सुन हर्षित हुए श्रोता

Wed, 19 Mar 2025 11:32 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 19 Mar 2025 11:32 PM IST
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The audience was delighted to hear the story of Shiva-Parvati's marriage
-भनवापुर के चौखड़ा में चल रहे विष्णु महायज्ञ व श्रीराम कथा के दूसरे दिन
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संवाद न्यूज एजेंसी
भनवापुर। चौखड़ा में चल रही विष्णु महायज्ञ व संगीतमयी श्रीराम कथा में मंगलवार की रात कथावाचक बलराम दास ने शिव-पार्वती विवाह प्रसंग का वर्णन किया। इस दौरान शिव-पार्वती की झांकी भी निकाली गई, जिसे देखकर दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए।
कथावाचक ने बताया कि पर्वतराज हिमालय की घोर तपस्या के बाद माता जगदंबा प्रकट हुईं और उन्हें बेटी के रूप में उनके घर में अवतरित होने का वरदान दिया। इसके बाद माता पार्वती हिमालय के घर अवतरित हुईं। बेटी के बड़ी होने पर पर्वतराज को उनकी शादी की चिंता सताने लगी। माता पार्वती बचपन से ही बाबा भोलेनाथ की अनन्य भक्त थीं। एक दिन पर्वतराज के घर महर्षि नारद पधारे और उन्होंने भगवान भोलेनाथ के साथ पार्वती के विवाह का संयोग बताया।
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नंदी पर सवार भोलेनाथ जब भूत-पिशाचों के साथ बरात लेकर पहुंचे तो उसे देखकर पर्वतराज और उनके परिजन चौंक गए, लेकिन माता पार्वती ने खुशी से भोलेनाथ को पति के रूप में स्वीकार कर लिया। विवाह प्रसंग के दौरान शिव-पार्वती की झांकी पर श्रद्धालुओं ने पुष्प बरसाए, और हर हर महादेव के नारों से पूरा पंडाल गूंज उठा। इस दौरान अमृतलाल कौशल, सुमिरन सोनी, घनश्याम अग्रहरि, रवि कसौधन, आचार्य सुनील शास्त्री उपस्थित रहे।
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श्रेष्ठ आचरण ही भागवत का मंगल चर णः राकेश शास्त्री
फोटो-
शाहपुर। मनुष्य इस मृत्युलोक में आकर श्रेष्ठ कर्मों से अपने जीवन को मंगलमय बना लेता है। जो उसका मंगलाचरण बन जाता है। इससे लोगों का कल्याण होता है। कथा के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही।
कथा में पंडित राकेश शास्त्री ने कहा कि महर्षि वेदव्यास ने श्रीमद्भागवत के मंगलाचरण में सत्य की वंदना की है। महर्षि वेदव्यास ने जगत को उपदेश करते हुए कहा कि सारा जगत स्वप्न के समान है। जिस प्रकार नेत्र खुलते ही स्वप्न टूट जाता है उसी प्रकार इस जगत का स्वप्न नेत्र बंद होते ही टूट जाता है। उन्होंने कहा कि इस कलिकाल में श्रीमद्भागवत जीवों के उद्धार का श्रेष्ठ साधन है। जिसकी रचना स्वयं भगवान नारायण के अवतार महर्षि वेदव्यास ने की। श्रीमद् भागवत भक्ति,ज्ञान और वैराग्य का संगम है । जिस प्रकार प्रयागराज में संगम में डुबकी लगाने से जीव का कल्याण हो जाता है उसी प्रकार भागवत रूपी संगम में डुबकी लगाकर जीव मोक्ष का अधिकारी हो जाता है।
इस दौरान मुख्य यजमान मुनीश चंद्र पांडेय, आशीष, अंश, शुभम, विकास, प्रेम, अनिल, गोलु, छोटू उपस्थित रहे।
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