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Siddharthnagar News: सती के चरित्र से महिलाओं को लेनी चाहिए प्रेरणा
Sun, 14 Dec 2025 11:44 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 14 Dec 2025 11:44 PM IST
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-भारतभारी नगर पंचायत के मल्हवार में श्रीराम कथा का आयोजन
भारतभारी। वार्ड नंबर 14 मल्हवार स्थित गुरु गोरखनाथ मंदिर पर आयोजित सात दिवसीय रुद्र महायज्ञ एवं मानस विराट संत सम्मेलन में आयोजित राम कथा के दूसरे दिन शनिवार की रात कथा वाचक पं. सियाराम पांडेय ने सती चरित्र की कथा सुनाकर दर्शकों का मन मोह लिया। कथावाचक ने बताया कि सती के चरित्र से महिलाओं को प्रेरणा लेना चाहिए।
कथा सुनाते हुए बताया कि माता सती के पिता दक्ष ने एक विशाल यज्ञ किया था और उसमें अपने सभी संबंधियों को बुलाया, लेकिन बेटी सती के पति भगवान शंकर को नहीं बुलाया। जब सती को यह पता चला तो उन्हें बड़ा दुख हुआ और उन्होंने भगवान शिव से उस यज्ञ में जाने की अनुमति मांगी, लेकिन भगवान शिव ने उन्हें यह कहकर मना कर दिया कि बिना बुलाए कहीं जाने से इंसान के सम्मान में कमी आती है। मगर माता सती नहीं मानी और राजा दक्ष द्वारा आयोजित यज्ञ में पहुंच गई। वहां पहुंचने पर सती ने अपने पिता सहित सभी को बुरा भला कहा और स्वयं को यज्ञ अग्नि में स्वाहा कर दिया। जब भगवान शिव को ये पता चला तो उन्होंने अपना तीसरा नेत्र खोलकर राजा दक्ष की समस्त नगरी तहस-नहस कर दी और सती का शव लेकर घूमते रहे। भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर के टुकड़े-टुकड़े किए, जहां शरीर का टुकड़ा गिरा वहां-वहां शक्तिपीठ बनी। इस दौरान सत्य नारायण पांडेय, रविंद्र शर्मा, प्रमोद श्रीवास्तव, शिव कुमार, रानू शर्मा, पिंटू आदि मौजूद रहे।
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भारतभारी। वार्ड नंबर 14 मल्हवार स्थित गुरु गोरखनाथ मंदिर पर आयोजित सात दिवसीय रुद्र महायज्ञ एवं मानस विराट संत सम्मेलन में आयोजित राम कथा के दूसरे दिन शनिवार की रात कथा वाचक पं. सियाराम पांडेय ने सती चरित्र की कथा सुनाकर दर्शकों का मन मोह लिया। कथावाचक ने बताया कि सती के चरित्र से महिलाओं को प्रेरणा लेना चाहिए।
कथा सुनाते हुए बताया कि माता सती के पिता दक्ष ने एक विशाल यज्ञ किया था और उसमें अपने सभी संबंधियों को बुलाया, लेकिन बेटी सती के पति भगवान शंकर को नहीं बुलाया। जब सती को यह पता चला तो उन्हें बड़ा दुख हुआ और उन्होंने भगवान शिव से उस यज्ञ में जाने की अनुमति मांगी, लेकिन भगवान शिव ने उन्हें यह कहकर मना कर दिया कि बिना बुलाए कहीं जाने से इंसान के सम्मान में कमी आती है। मगर माता सती नहीं मानी और राजा दक्ष द्वारा आयोजित यज्ञ में पहुंच गई। वहां पहुंचने पर सती ने अपने पिता सहित सभी को बुरा भला कहा और स्वयं को यज्ञ अग्नि में स्वाहा कर दिया। जब भगवान शिव को ये पता चला तो उन्होंने अपना तीसरा नेत्र खोलकर राजा दक्ष की समस्त नगरी तहस-नहस कर दी और सती का शव लेकर घूमते रहे। भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर के टुकड़े-टुकड़े किए, जहां शरीर का टुकड़ा गिरा वहां-वहां शक्तिपीठ बनी। इस दौरान सत्य नारायण पांडेय, रविंद्र शर्मा, प्रमोद श्रीवास्तव, शिव कुमार, रानू शर्मा, पिंटू आदि मौजूद रहे।
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