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Siddharthnagar News: जांच हुई न मिली मिलावट... दाल खरीदे तो खुद रहे सचेत
Fri, 14 Nov 2025 12:26 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Fri, 14 Nov 2025 12:26 AM IST
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शहर के दुकान में रखा हुआ दाल। संवाद
- गोरखपुर में अरहर की दाल में हुई है मिलावट की पुष्टि, मिलावटी दाल खाने से सेहत पर पड़ेगा असर
सिद्धार्थनगर। मिठाई, मसाला पनीर के बाद अब मिलावटखोरों ने दाल को भी नहीं छोड़ा है। सबसे ज्यादा परोसी जाने वाली अरहर की दाल में भी बड़े पैमाने पर मिलावट की जा रही है। गोरखपुर में मिलावट की दाल की खेप पकड़ी गई है। वहीं जिले में खाद्य सुरक्षा विभाग को अब तक जांच में मिलावट ही नहीं मिली है। टीम ने महज दो नमूने लिए हैं जो मानके के अनुसार पाए गए हैं। ऐसे में दाल खरीदने से पहले खुद ही सतर्क रहने की जरूरत है। अगर ऐसा नहीं किया तो अरहर की जगह खेसारी (अक्सा) की दाल खाने को मिलेगी, जिससे सेहत बिगड़ने का भी खतरा है।
जानकारों की मानें तो अक्सा, सेहत के लिए काफी नुकसानदायक है। इसे लगातार खाने से लकवा मारने तक का खतरा रहता है। आंखों समेत सेहत से जुड़ी कई और बीमारियां भी हो सकती हैं। सिस्टम चुस्त नहीं है। मिलों से निकली दालों का आकार एक बराबर होता है जबकि अक्सा मिलाने पर फर्क पता चल सकता है। हालांकि, इसकी मात्रा कम होगी तो पहचान पाना मुश्किल हो जाएगा। विशेषज्ञ भी सलाह देते हैं कि दाल को खरीदते समय बारीकी से देखना चाहिए। हालांकि मिलावटी दाल की बिक्री रोकने के लिए अब व्यापारी खुद सतर्क हो रहे हैं। उनका कहना है कि कुछ धंधेबाजों की वजह से पूरे व्यापार को लोग शक की निगाह से देखने लगेंगे। शहर स्थित नवीन मंडी में रोजाना पीलीभीत, गोरखपुर व बहराइच से दाल मंगाई जाती है। मिलावट वाली दाल का मुनाफा धंधेबाज कमाते हैं। मिलावटी दाल को बेच देते हैं। गोरखपुर में मिलावटी दाल धड़ल्ले से बेची जा रही है। इससे बचने के लिए खुद ही सावधानी बरतने की जरूरत है।
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जिले में घट गया है अरहर का रकबा
समय अधिक लगने से व कम पैदा हाेने से तराई क्षेत्र में लोग अरहर की खेती करना कम कर दी है। इससे जिले के लोग भी पर्याप्त मात्रा में दाल की खरीदारी दुकान से ही करते हैं। इससे वह भी मिलावटी दाल की खरीदारी करते हैं। जिले में जहां पहले सभी लोग अरहर की खेती करते थे, वहीं अब पशुओं को पालने वाले व कुछ लोग ही अरहर की खेती कर रहे हैं।
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जिले में बिकती हैं तीन प्रकार की अरहर की दाल
शहर सहित ग्रामीण कस्बों में अक्सर सभी दुकानों पर तीन प्रकार की दाल रखी रहती हैं। इसमें तीनों दाल के कलर साइज व दाम में भी अंतर होता है। ऐसे में जिस पैकेट की दाल में अरहर की छिलका लगी होती हैं, वहीं सबसे अधिक मूल्य पर बेची जा रही है, लेकिन लोग सबसे सस्ती दाल खरीदते हैं। दाल की तीनों वैरायटी के बारे में पूछने पर एक दुकानदार ने बताया कि अलग-अलग जगहों की दाल के कारण दर में फर्क रहता है।
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अरहर दाल में अक्सा दाल की मिलावट हो और इसका नियमित सेवन किया जाए तो कई प्रकार की बीमारियां हो सकती हैं। इस कारण पैरालाइसिस अटैक हो सकता है। यह नसों को नुकसान पहुंचाती है, इसलिए आंखों की तकलीफ बढ़ सकती है। इससे पाचन तंत्र भी कमजोर होता है।
डॉ. गौरव दुबे, विभागाध्यक्ष मेडिसिन विभाग
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दाल के दो नमूने लिए गए हैं। जांच की जाती है। जब दाल में गड़बड़ी दिखती है तभी नमूने लिए जाते हैं। अरहर दाल के साथ ही चना, मसूर, मूंग सहित अन्य दालों का भी नमूना भी गया है जो मानक के अनुसार मिला है।
- आरएल यादव, सहायक खाद्य उपायुक्त
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सिद्धार्थनगर। मिठाई, मसाला पनीर के बाद अब मिलावटखोरों ने दाल को भी नहीं छोड़ा है। सबसे ज्यादा परोसी जाने वाली अरहर की दाल में भी बड़े पैमाने पर मिलावट की जा रही है। गोरखपुर में मिलावट की दाल की खेप पकड़ी गई है। वहीं जिले में खाद्य सुरक्षा विभाग को अब तक जांच में मिलावट ही नहीं मिली है। टीम ने महज दो नमूने लिए हैं जो मानके के अनुसार पाए गए हैं। ऐसे में दाल खरीदने से पहले खुद ही सतर्क रहने की जरूरत है। अगर ऐसा नहीं किया तो अरहर की जगह खेसारी (अक्सा) की दाल खाने को मिलेगी, जिससे सेहत बिगड़ने का भी खतरा है।
जानकारों की मानें तो अक्सा, सेहत के लिए काफी नुकसानदायक है। इसे लगातार खाने से लकवा मारने तक का खतरा रहता है। आंखों समेत सेहत से जुड़ी कई और बीमारियां भी हो सकती हैं। सिस्टम चुस्त नहीं है। मिलों से निकली दालों का आकार एक बराबर होता है जबकि अक्सा मिलाने पर फर्क पता चल सकता है। हालांकि, इसकी मात्रा कम होगी तो पहचान पाना मुश्किल हो जाएगा। विशेषज्ञ भी सलाह देते हैं कि दाल को खरीदते समय बारीकी से देखना चाहिए। हालांकि मिलावटी दाल की बिक्री रोकने के लिए अब व्यापारी खुद सतर्क हो रहे हैं। उनका कहना है कि कुछ धंधेबाजों की वजह से पूरे व्यापार को लोग शक की निगाह से देखने लगेंगे। शहर स्थित नवीन मंडी में रोजाना पीलीभीत, गोरखपुर व बहराइच से दाल मंगाई जाती है। मिलावट वाली दाल का मुनाफा धंधेबाज कमाते हैं। मिलावटी दाल को बेच देते हैं। गोरखपुर में मिलावटी दाल धड़ल्ले से बेची जा रही है। इससे बचने के लिए खुद ही सावधानी बरतने की जरूरत है।
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जिले में घट गया है अरहर का रकबा
समय अधिक लगने से व कम पैदा हाेने से तराई क्षेत्र में लोग अरहर की खेती करना कम कर दी है। इससे जिले के लोग भी पर्याप्त मात्रा में दाल की खरीदारी दुकान से ही करते हैं। इससे वह भी मिलावटी दाल की खरीदारी करते हैं। जिले में जहां पहले सभी लोग अरहर की खेती करते थे, वहीं अब पशुओं को पालने वाले व कुछ लोग ही अरहर की खेती कर रहे हैं।
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जिले में बिकती हैं तीन प्रकार की अरहर की दाल
शहर सहित ग्रामीण कस्बों में अक्सर सभी दुकानों पर तीन प्रकार की दाल रखी रहती हैं। इसमें तीनों दाल के कलर साइज व दाम में भी अंतर होता है। ऐसे में जिस पैकेट की दाल में अरहर की छिलका लगी होती हैं, वहीं सबसे अधिक मूल्य पर बेची जा रही है, लेकिन लोग सबसे सस्ती दाल खरीदते हैं। दाल की तीनों वैरायटी के बारे में पूछने पर एक दुकानदार ने बताया कि अलग-अलग जगहों की दाल के कारण दर में फर्क रहता है।
अरहर दाल में अक्सा दाल की मिलावट हो और इसका नियमित सेवन किया जाए तो कई प्रकार की बीमारियां हो सकती हैं। इस कारण पैरालाइसिस अटैक हो सकता है। यह नसों को नुकसान पहुंचाती है, इसलिए आंखों की तकलीफ बढ़ सकती है। इससे पाचन तंत्र भी कमजोर होता है।
डॉ. गौरव दुबे, विभागाध्यक्ष मेडिसिन विभाग
दाल के दो नमूने लिए गए हैं। जांच की जाती है। जब दाल में गड़बड़ी दिखती है तभी नमूने लिए जाते हैं। अरहर दाल के साथ ही चना, मसूर, मूंग सहित अन्य दालों का भी नमूना भी गया है जो मानक के अनुसार मिला है।
- आरएल यादव, सहायक खाद्य उपायुक्त