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Siddharthnagar News: गेहूं की पत्तियों पर दाने तो बोरान की है कमी
Fri, 30 Jan 2026 11:43 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Fri, 30 Jan 2026 11:43 PM IST
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- भनवापुर के कृषि वैज्ञानिकों ने दिया किसानों को सुझाव
भनवापुर। गेहूं की अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए आवश्यक है कि फसल में किसी तत्व की कमी न हो। विशेष रूप से बालियां निकलने की अवस्था में यदि बोरान और पोटाश की कमी होती है तो दानों का विकास अच्छा नहीं होता है। यदि गेहूं की फसल में पत्तियां बहुत पतली होकर आपस में उलझी हुई दिखाई दे रही हैं और पत्तियों के ऊपर दाने दिखाई दे रहे हैं तो यह बोरान की कमी के लक्षण होते हैं।
यह जानकारी देते हुए कृषि विज्ञान केंद्र सोहना के कृषि वैज्ञानिक डॉ. सर्वजीत ने बताया कि बोरान की कमी से गेहूं की बालियों में दाने कम बनते हैं, तथा बालियां छोटी हो जाती हैं। साथ ही टेढ़ी होने लगती हैं। बोरान की कमी होने पर बुवाई के 55-65 दिन बाद 10 दिन के अंतराल पर सोलु बोर (20 प्रतिशत बोरान) 1 ग्रा/ली (200 ग्रा/एकड़) या बोरेक्स (10.5 प्रतिशत बोरान) 2 ग्रा/ली का बार छिड़काव करना चाहिए। बोरान का छिड़काव शाम के समय करना चाहिए। बोरान के साथ दूसरे पोषक तत्व और फफूंद नाशक या कीट नाशक का मिश्रण न करें। बोरान उपज बढ़ाने एवं दानों की गुणवत्ता में सुधार लाने में सहायक है। यदि बोरान का छिड़काव बालियां निकलने से पहले करते हैं तो अधिक लाभ होता है। डॉ. सर्वजीत ने बताया कि बोरान छिड़काव के तीन दिन बाद आवश्यकतानुसार अन्य उर्वरकों का छिड़काव करना चाहिए। यदि पौधों की बढ़वार कम हो और बालियां निकल रही हैं तो दानों के अच्छे विकास के लिए पोटैशियम का छिड़काव बहुत ही आवश्यक है। पोटैशियम की पूर्ति के लिए म्यूरेट ऑफ पोटाश या सल्फेट ऑफ पोटाश का 10 ग्रा प्रति लीटर पानी में घोल बना कर छिड़काव कर सकते हैं। एक एकड़ में 200 ली पानी का प्रयोग करना चाहिए।
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भनवापुर। गेहूं की अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए आवश्यक है कि फसल में किसी तत्व की कमी न हो। विशेष रूप से बालियां निकलने की अवस्था में यदि बोरान और पोटाश की कमी होती है तो दानों का विकास अच्छा नहीं होता है। यदि गेहूं की फसल में पत्तियां बहुत पतली होकर आपस में उलझी हुई दिखाई दे रही हैं और पत्तियों के ऊपर दाने दिखाई दे रहे हैं तो यह बोरान की कमी के लक्षण होते हैं।
यह जानकारी देते हुए कृषि विज्ञान केंद्र सोहना के कृषि वैज्ञानिक डॉ. सर्वजीत ने बताया कि बोरान की कमी से गेहूं की बालियों में दाने कम बनते हैं, तथा बालियां छोटी हो जाती हैं। साथ ही टेढ़ी होने लगती हैं। बोरान की कमी होने पर बुवाई के 55-65 दिन बाद 10 दिन के अंतराल पर सोलु बोर (20 प्रतिशत बोरान) 1 ग्रा/ली (200 ग्रा/एकड़) या बोरेक्स (10.5 प्रतिशत बोरान) 2 ग्रा/ली का बार छिड़काव करना चाहिए। बोरान का छिड़काव शाम के समय करना चाहिए। बोरान के साथ दूसरे पोषक तत्व और फफूंद नाशक या कीट नाशक का मिश्रण न करें। बोरान उपज बढ़ाने एवं दानों की गुणवत्ता में सुधार लाने में सहायक है। यदि बोरान का छिड़काव बालियां निकलने से पहले करते हैं तो अधिक लाभ होता है। डॉ. सर्वजीत ने बताया कि बोरान छिड़काव के तीन दिन बाद आवश्यकतानुसार अन्य उर्वरकों का छिड़काव करना चाहिए। यदि पौधों की बढ़वार कम हो और बालियां निकल रही हैं तो दानों के अच्छे विकास के लिए पोटैशियम का छिड़काव बहुत ही आवश्यक है। पोटैशियम की पूर्ति के लिए म्यूरेट ऑफ पोटाश या सल्फेट ऑफ पोटाश का 10 ग्रा प्रति लीटर पानी में घोल बना कर छिड़काव कर सकते हैं। एक एकड़ में 200 ली पानी का प्रयोग करना चाहिए।
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