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Siddharthnagar News: भगवान के नाम स्मरण से मिलता है पुण्य, भवसागर से मुक्ति का मार्ग
Wed, 14 Oct 2026 12:09 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Wed, 14 Oct 2026 12:09 AM IST
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फोटो- बनगवां नानकार गांव में संगीतमयी श्रीराम कथा सुनते श्रद्धालु
डुमरियागंज। तहसील क्षेत्र के बनगवां नानकार गांव में नवयुवक दुर्गा पूजा समिति की ओर से आयोजित संगीतमयी श्रीराम कथा के दूसरे दिन सोमवार रात कथावाचक बाबा विजय राघव दास रामायणी ने भगवान के नाम की महिमा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान के नाम का स्मरण करने मात्र से मनुष्य को पुण्य की प्राप्ति होती है। कथा सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
कथावाचक ने कहा कि चार वेद, छह शास्त्र, 18 पुराण, 18 उपपुराण और 108 उपनिषदों में वर्णित ज्ञान का सार भगवान के नाम स्मरण में समाहित है। भगवान का नाम पापों का नाश करने और मनुष्य को भवसागर से पार उतारने में सहायक है। श्रद्धा और विश्वास के साथ नाम स्मरण करने से जीवन में कल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है।
उन्होंने रावण का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि रावण जीवनभर भगवान श्रीराम को साधारण मनुष्य समझता रहा। मान्यता के अनुसार, जब भगवान श्रीराम का अंतिम बाण रावण को लगा, तब उसके मुख से राम नाम निकला और उसे मुक्ति प्राप्त हुई। इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने बताया कि भगवान के नाम का स्मरण अंतिम समय में भी कल्याणकारी होता है।
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कथावाचक ने कहा कि बड़े-बड़े धार्मिक अनुष्ठानों, दान-पुण्य और तीर्थों में तपस्या का विशेष महत्व है लेकिन भगवान के नाम का स्मरण भी अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। उन्होंने श्रद्धालुओं से नियमित रूप से भगवान का नाम जपने और भक्ति के मार्ग पर चलने की अपील की।
इस मौके पर वीरेंद्र दुबे, सतीश दुबे, जय प्रकाश दुबे, कल्लू यादव, इंदल यादव, महेंद्र पांडेय सहित अन्य श्रद्धालु मौजूद रहे।
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डुमरियागंज। तहसील क्षेत्र के बनगवां नानकार गांव में नवयुवक दुर्गा पूजा समिति की ओर से आयोजित संगीतमयी श्रीराम कथा के दूसरे दिन सोमवार रात कथावाचक बाबा विजय राघव दास रामायणी ने भगवान के नाम की महिमा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान के नाम का स्मरण करने मात्र से मनुष्य को पुण्य की प्राप्ति होती है। कथा सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
कथावाचक ने कहा कि चार वेद, छह शास्त्र, 18 पुराण, 18 उपपुराण और 108 उपनिषदों में वर्णित ज्ञान का सार भगवान के नाम स्मरण में समाहित है। भगवान का नाम पापों का नाश करने और मनुष्य को भवसागर से पार उतारने में सहायक है। श्रद्धा और विश्वास के साथ नाम स्मरण करने से जीवन में कल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है।
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उन्होंने रावण का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि रावण जीवनभर भगवान श्रीराम को साधारण मनुष्य समझता रहा। मान्यता के अनुसार, जब भगवान श्रीराम का अंतिम बाण रावण को लगा, तब उसके मुख से राम नाम निकला और उसे मुक्ति प्राप्त हुई। इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने बताया कि भगवान के नाम का स्मरण अंतिम समय में भी कल्याणकारी होता है।
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कथावाचक ने कहा कि बड़े-बड़े धार्मिक अनुष्ठानों, दान-पुण्य और तीर्थों में तपस्या का विशेष महत्व है लेकिन भगवान के नाम का स्मरण भी अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। उन्होंने श्रद्धालुओं से नियमित रूप से भगवान का नाम जपने और भक्ति के मार्ग पर चलने की अपील की।
इस मौके पर वीरेंद्र दुबे, सतीश दुबे, जय प्रकाश दुबे, कल्लू यादव, इंदल यादव, महेंद्र पांडेय सहित अन्य श्रद्धालु मौजूद रहे।