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शब-ए-बरात : गुनाहों से निजात पाने की रात
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संवाद न्यूज एजेंसी
डुमरियागंज। गुनाहों से तौबा करने और निजात पाने की रात का पर्व शब-ए-बरात बृहस्पतिवार को पूरी अकीदत व एहतराम के साथ मनाया जाएगा। इसकी तैयारियां बुधवार की शाम तक पूरी हो चुकी हैं।
डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के हल्लौर स्थित शिया जामा मस्जिद के पेश इमाम मौलाना शहकार हुसैन जैदी ने बताया कि इस्लामी कैलेंडर के शाबान माह की 14वीं तारीख की रात को शब-ए- बरात के नाम से जाना जाता है।
इसका अर्थ है छुटकारे की रात यानी अपने गुनाहों से तौबा किया जाए और उन्हें माफ कराने के लिए पूरी रात अल्लाह की इबादत में मशगूल रहना है। मौलाना ने कहा कि दीन-ए-इस्लाम में इस रात की बड़ी अहमियत और फजीलत बताई गई है। अल्लाह अपने बंदों के गुनाहों से तौबा करने पर उन्हें माफ कर देता है। बशर्ते वह दोबारा गुनाह और गलती न करे। शब-ए-बरात की रात ही अल्लाह की खास रहमत उतरती है।
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डुमरियागंज स्थित सुन्नी जामा मस्जिद के इमाम मौलाना मुफ्ती एहसानुल्लाह कासिमी ने बताया कि हदीस शरीफ में आया है कि शाबान की 15वीं शब (रात) को कयाम (इबादत) करो और इसके दिन का रोज़ा रखो। यह रात बड़ी रहमत व बरकत वाली है।
इस दिन मुसलमान अल्लाह का ज़िक्र कसरत से करें, क़ज़ा व नफिल नमाज़, रोज़ा, तस्बीह व क़ुरआन पाक की तिलावत करें। इस रात बंदों पर अल्लाह की खास रहमत उतरती है। वहीं, शब-ए-बरात पर विशेष व्यंजन के रूप में घरों में हलवा पूरी बनाया जाता है।
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डुमरियागंज। गुनाहों से तौबा करने और निजात पाने की रात का पर्व शब-ए-बरात बृहस्पतिवार को पूरी अकीदत व एहतराम के साथ मनाया जाएगा। इसकी तैयारियां बुधवार की शाम तक पूरी हो चुकी हैं।
डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के हल्लौर स्थित शिया जामा मस्जिद के पेश इमाम मौलाना शहकार हुसैन जैदी ने बताया कि इस्लामी कैलेंडर के शाबान माह की 14वीं तारीख की रात को शब-ए- बरात के नाम से जाना जाता है।
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इसका अर्थ है छुटकारे की रात यानी अपने गुनाहों से तौबा किया जाए और उन्हें माफ कराने के लिए पूरी रात अल्लाह की इबादत में मशगूल रहना है। मौलाना ने कहा कि दीन-ए-इस्लाम में इस रात की बड़ी अहमियत और फजीलत बताई गई है। अल्लाह अपने बंदों के गुनाहों से तौबा करने पर उन्हें माफ कर देता है। बशर्ते वह दोबारा गुनाह और गलती न करे। शब-ए-बरात की रात ही अल्लाह की खास रहमत उतरती है।
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डुमरियागंज स्थित सुन्नी जामा मस्जिद के इमाम मौलाना मुफ्ती एहसानुल्लाह कासिमी ने बताया कि हदीस शरीफ में आया है कि शाबान की 15वीं शब (रात) को कयाम (इबादत) करो और इसके दिन का रोज़ा रखो। यह रात बड़ी रहमत व बरकत वाली है।
इस दिन मुसलमान अल्लाह का ज़िक्र कसरत से करें, क़ज़ा व नफिल नमाज़, रोज़ा, तस्बीह व क़ुरआन पाक की तिलावत करें। इस रात बंदों पर अल्लाह की खास रहमत उतरती है। वहीं, शब-ए-बरात पर विशेष व्यंजन के रूप में घरों में हलवा पूरी बनाया जाता है।