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भजन पर मिलते हैं भगवान
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Tue, 29 Mar 2016 10:53 PM IST
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शोहरतगढ़ में चल रही रामकथा में माैजूद श्रद्धालु।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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धरती पर जब-जब अधर्म, अत्याचार, मानवाचार बढने से साधु-संत, गाय माता, ब्राह्मण की करूणा से भगवान निराकार से आकार में होते हैं। जिस समय जिस रूप में आवश्यकता होती है, तब-तब भगवान प्रकट होते है।
त्रेता युग, द्वापर युग व सतयुग में भगवान ने पृथ्वी पर मानव रूप में जन्म लिया। कलयुग में भगवान प्रतिदिन हर क्षण विभिन्न रूपों में धरती पर जन्म ले रहे हैं। इन्हें पहचान पाना आम मनुष्य के लिए साधारण नहीं है। भक्तों के भजन पर भगवान मिलने आते हैं। यह उदगार कथा वाचक संत विजय कौशलजी महाराज ने कही।
वीरेंद्र ग्रामीण स्टेडियम में छतहरी में चल रहे संगीतमय भव्य रामकथा के तीसरे दिन ने धर्म और संस्कृति पर प्रवचन में कही। उन्होंने कहा कि आज के दौर में धर्म और संस्कृति की बात करने पर देश के अंदर तूफान खड़ा हो जाता है, लेकिन जब-जब संस्कृति पर प्रहार हुए हैं तब-तब भगवान राम त्रेतायुग के बाद कलयुग में भी जन्म लिए हैं।
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भगवान हर क्षण-हर पल भक्तों के साथ रहते हैं बस उन्हें पुकारने की जरूरत होती है। भगवान उसी भक्त को मिलते हैं जो तप करता है। भक्त जब पहाड़ों पर बैठकर समाधि लगाता है तो भगवान नंगे पांव दौड़े चले जाते हैं और भक्त की इच्छाओं की पूर्ति कर देते हैं।
जरूरत है तो सिर्फ भगवान सच्चे मन से पुकारने की। उन्होंने परिवार की स्थितियों के बारे में बताया कि बाप सबकुछ सहन कर लेता है लेकिन बेटी की विदाई सहन नहीं कर पाता। विदाई के दौरान बाप की आंखों से आश्रु की धारा बहने लगती है।
ठीक उसी प्रकार बेटी बाप के जीते मायका बड़े ही हक के साथ आती है लेकिन बाप के मर जाने के बाद भईया और भाभी के आशीर्वाद से ही मायका नसीब होता है। इस अवसर पर नपं अध्यक्ष उसका हेमंत जायसवाल, पूर्व मंत्री शिव प्रताप शुक्ला, विधायक जय प्रताप सिंह, महानगर अध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष रामकुमार कुंवर, डॉ. नलिनीकांत मणि त्रिपाठी, नन्दू प्रसाद गौड़, अभिषेक अग्रवाल, रामसेवक गुप्ता, सतीश मित्तल, जय प्रकाश वर्मा, टिंकू वर्मा, राधारमण त्रिपाठी, सुधा त्रिपाठी, शशि त्रिपाठी, गोविंद माधव, लालजी त्रिपाठी, कृष्ण कुमार अग्रवाल, रोहित वर्मा, जिम्मी वर्मा, रंभा दूबे, डॉ उमा सराफ, श्यामलता परसरामका, विद्यावती उपाध्याय, अनीता परसरामका, पावज्ती पोददार, संतोष बोरा, किरन मित्तल, कुसुम अग्रवाल, डॉ सुशीला सिंह, सुमन शर्मा, श्रुति, कीर्ति, सुरभि, शिवांगी, डॉ हरेश प्रताप सिंह, एबीवीपी प्रांत संगठन मंत्री कमल नयन, रामाशीष आदि मौजूद रहे।
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त्रेता युग, द्वापर युग व सतयुग में भगवान ने पृथ्वी पर मानव रूप में जन्म लिया। कलयुग में भगवान प्रतिदिन हर क्षण विभिन्न रूपों में धरती पर जन्म ले रहे हैं। इन्हें पहचान पाना आम मनुष्य के लिए साधारण नहीं है। भक्तों के भजन पर भगवान मिलने आते हैं। यह उदगार कथा वाचक संत विजय कौशलजी महाराज ने कही।
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वीरेंद्र ग्रामीण स्टेडियम में छतहरी में चल रहे संगीतमय भव्य रामकथा के तीसरे दिन ने धर्म और संस्कृति पर प्रवचन में कही। उन्होंने कहा कि आज के दौर में धर्म और संस्कृति की बात करने पर देश के अंदर तूफान खड़ा हो जाता है, लेकिन जब-जब संस्कृति पर प्रहार हुए हैं तब-तब भगवान राम त्रेतायुग के बाद कलयुग में भी जन्म लिए हैं।
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भगवान हर क्षण-हर पल भक्तों के साथ रहते हैं बस उन्हें पुकारने की जरूरत होती है। भगवान उसी भक्त को मिलते हैं जो तप करता है। भक्त जब पहाड़ों पर बैठकर समाधि लगाता है तो भगवान नंगे पांव दौड़े चले जाते हैं और भक्त की इच्छाओं की पूर्ति कर देते हैं।
जरूरत है तो सिर्फ भगवान सच्चे मन से पुकारने की। उन्होंने परिवार की स्थितियों के बारे में बताया कि बाप सबकुछ सहन कर लेता है लेकिन बेटी की विदाई सहन नहीं कर पाता। विदाई के दौरान बाप की आंखों से आश्रु की धारा बहने लगती है।
ठीक उसी प्रकार बेटी बाप के जीते मायका बड़े ही हक के साथ आती है लेकिन बाप के मर जाने के बाद भईया और भाभी के आशीर्वाद से ही मायका नसीब होता है। इस अवसर पर नपं अध्यक्ष उसका हेमंत जायसवाल, पूर्व मंत्री शिव प्रताप शुक्ला, विधायक जय प्रताप सिंह, महानगर अध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष रामकुमार कुंवर, डॉ. नलिनीकांत मणि त्रिपाठी, नन्दू प्रसाद गौड़, अभिषेक अग्रवाल, रामसेवक गुप्ता, सतीश मित्तल, जय प्रकाश वर्मा, टिंकू वर्मा, राधारमण त्रिपाठी, सुधा त्रिपाठी, शशि त्रिपाठी, गोविंद माधव, लालजी त्रिपाठी, कृष्ण कुमार अग्रवाल, रोहित वर्मा, जिम्मी वर्मा, रंभा दूबे, डॉ उमा सराफ, श्यामलता परसरामका, विद्यावती उपाध्याय, अनीता परसरामका, पावज्ती पोददार, संतोष बोरा, किरन मित्तल, कुसुम अग्रवाल, डॉ सुशीला सिंह, सुमन शर्मा, श्रुति, कीर्ति, सुरभि, शिवांगी, डॉ हरेश प्रताप सिंह, एबीवीपी प्रांत संगठन मंत्री कमल नयन, रामाशीष आदि मौजूद रहे।