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अनुपयोगी साबित हो रहा वाटर टैंक
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Sat, 21 May 2016 11:27 PM IST
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खेसरहा के कोटिया पांडेय मे जर्जर पड़ा मिनी वाटर टैंक।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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विकास खंड खेसरहा अंर्तगत जापानी इंसेफ्लाइटिस (जेई) प्रभावित गांवों में जल-जनित बीमारियों की रोकथाम व लोगों को शुद्ध पेयजल मुहैया करने के उद्देश्य से बनाए गए मिनी वाटर टैंक देखरेख के अभाव में बेकार सबित हो रहे हैं।
कई गांवों में निर्माण कार्य अधूरे पड़े हैं तो कहीं मोटर ही नहीं लगा है। इससे ग्रामीणों को इस योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
ग्राम पंचायत कोटिया पांडेय में वाटर टैंक तालाब में बनाया गया जहां पानी भरा रहता है। आजतक उसमें मोटर नहीं लग पाया। केवल पानी का टैंक बनाकर जिम्मेदारों ने उसे अधूरा छोड़ दिया। गांव में बना वाटर टैंक लोगों के लिए हाथी का दांत साबित हो रहा है।
सिसहनिया में बनी पानी की टंकी जर्जर हो चुकी है। उपकरण टूटकर बिखरे पड़े हैं। पसमोहनी, देवरी, नगवा, मूजडीह, सेखुई, महुई नानकार, पेड़ारी बुजुर्ग, टिकुइया, टिकरिया सहित तीन दर्जन से अधिक गांवों में बने मिनी वाटर टैंक कहीं जर्जर हो चुके हैं तो कहीं विद्युत सप्लाई से नहीं जोड़ा गया है।
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किसान यूनियन के पूर्व जिलाध्यक्ष प्रदीप पांडेय ने बताया कि विभाग व ठेकेदारों की मिलीभगत से निर्माण कार्य में अनियमितता बरती गई। महज 80 से 100 फीट बोरिंग करके कोरम पूरा किया गया। जबकि मानक के अनुसार 250 फीट बोरिंग करना था।
टंकी के निर्माण में भी मानक को दरकिनार करते हुए घटिया किस्म के ईंट व सीमेंट प्रयोग किया गया। यही नतीजा है कि वाटर टैंक बनते ही क्षतिग्रस्त होने लगे। बेलवालगुनही निवासी राम वेलास मिश्रा ने बताया कि निर्माण के एक माह भीतर ही बनी टंकी की दीवारें फटने लगीं।
निर्माण कार्य अधूरा छोड़कर ठेकेदार फरार हो गया। विभाग को कई बार शिकायती पत्र देने के बावजूद आज तक वहां कोई झांकने तक नहीं पहुंचा। क्षेत्र के श्यामधर यादव, लक्ष्मी, जुगुनू, दिग्विजय पांडेय, शिवपूजन यादव, राभजन चौधरी, सुरेंद्र कुमार, रामराज अदि लोगों ने गांवों में बने मिनी वाटर टैंक की मरम्मत कराने की मांग की है।
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कई गांवों में निर्माण कार्य अधूरे पड़े हैं तो कहीं मोटर ही नहीं लगा है। इससे ग्रामीणों को इस योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
ग्राम पंचायत कोटिया पांडेय में वाटर टैंक तालाब में बनाया गया जहां पानी भरा रहता है। आजतक उसमें मोटर नहीं लग पाया। केवल पानी का टैंक बनाकर जिम्मेदारों ने उसे अधूरा छोड़ दिया। गांव में बना वाटर टैंक लोगों के लिए हाथी का दांत साबित हो रहा है।
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सिसहनिया में बनी पानी की टंकी जर्जर हो चुकी है। उपकरण टूटकर बिखरे पड़े हैं। पसमोहनी, देवरी, नगवा, मूजडीह, सेखुई, महुई नानकार, पेड़ारी बुजुर्ग, टिकुइया, टिकरिया सहित तीन दर्जन से अधिक गांवों में बने मिनी वाटर टैंक कहीं जर्जर हो चुके हैं तो कहीं विद्युत सप्लाई से नहीं जोड़ा गया है।
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किसान यूनियन के पूर्व जिलाध्यक्ष प्रदीप पांडेय ने बताया कि विभाग व ठेकेदारों की मिलीभगत से निर्माण कार्य में अनियमितता बरती गई। महज 80 से 100 फीट बोरिंग करके कोरम पूरा किया गया। जबकि मानक के अनुसार 250 फीट बोरिंग करना था।
टंकी के निर्माण में भी मानक को दरकिनार करते हुए घटिया किस्म के ईंट व सीमेंट प्रयोग किया गया। यही नतीजा है कि वाटर टैंक बनते ही क्षतिग्रस्त होने लगे। बेलवालगुनही निवासी राम वेलास मिश्रा ने बताया कि निर्माण के एक माह भीतर ही बनी टंकी की दीवारें फटने लगीं।
निर्माण कार्य अधूरा छोड़कर ठेकेदार फरार हो गया। विभाग को कई बार शिकायती पत्र देने के बावजूद आज तक वहां कोई झांकने तक नहीं पहुंचा। क्षेत्र के श्यामधर यादव, लक्ष्मी, जुगुनू, दिग्विजय पांडेय, शिवपूजन यादव, राभजन चौधरी, सुरेंद्र कुमार, रामराज अदि लोगों ने गांवों में बने मिनी वाटर टैंक की मरम्मत कराने की मांग की है।