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दबाव पर बचाव में आए विधायक
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Mon, 11 Jul 2016 11:01 PM IST
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उसका में व्यापारियों से वार्ता करते विधायक विजय पासवान।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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उसका बाजार। कस्बे में जिला परिषद द्वारा आवंटित की गई जमीन को खाली कराने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। आरोप है कि मुख्यमंत्री से शिकायत के बाद, जांच में जुटी पुलिस जमीन को छोडने का दबाव बना रही है। जमीन पर अस्थाई निर्माण कर जीविका चलाने वाले लोगों की शिकायत पर सदर विधायक विजय पासवान ने उन्हें न्याय का भरोसा दिलाया है।
जानकारी के अुनसार कस्बे के बाबा हरिदास इंटर कालेज तिराहा पर सड़क के किनारे करीब एक दर्जन लोग अरसे से काबिज हैं।
उनका कहना है कि वर्ष 1970 में जब यह जिला नहीं बना था उसी समय, जिला परिषद बस्ती से उन्हें जमीन का आवंटन हुआ था। तभी से वे यहां अस्थाई निर्माण कर अपनी रोजी रोटी चलाते हैं। इस बीच एक व्याक्ति ने मुख्यमंत्री से शिकायत कर इन दुकानों को हटाने की मांग की। जिस पर मुख्यमंत्री के यहां से मामले की जांच कर कार्रवाई के लिए कहा कहा गया है। दुकान चला रहे किशोरी, नवाब अली, फसादी, वफाती, गोपाल, दुक्खी मांझी, शमशाद, निसार, शिवपूजन, वायस मोहम्मद, मुक्खी हलवाई, रामचंदर, झमई, सीताराम व तुलसीदास ने बताया कि पुलिस उनका पक्ष सुने बगैर दुकान हटाने का दबाव बनी रही है।
जबकि उनके पास जिला परिषद बस्ती द्वारा जमीनों के एलाटमेंट के कागजात मौजूद हैं। उनकी दुकानों के पीछे कुछ बंजर की जमीन है और उसके पीछे उस शख्स की जमीन है, जिसने मुख्यमंत्री से शिकायत की है। उन्होंने आरोप लगाया शिकायतकर्ता उनकी दुकानों को हटाकर बंजर की जमीन पर कब्जा करने की कोशिश में है। ताकि पीछे मौजूद उसकी जमीन सड़क से जुड़ जाए और वह अपनी जमीन का व्यवसायिक लाभ उठा सके।
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वहीं इस संबंध में प्रभारी एसओ ओम प्रकाश यादव ने बताया कि ऊपर से आए जांच के आदेश के क्रम में मामले की तहकीकात की जा रही है। किसी पर जबरिया दुकान हटाने का दबाव नहीं बनाया जा रहा है। काबिज दुकानदारों से उनके पास मौजूद कागजात मांगे गए हैं। पूरी जांच के बाद ही कोई कार्रवाई की जाएगी।
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जानकारी के अुनसार कस्बे के बाबा हरिदास इंटर कालेज तिराहा पर सड़क के किनारे करीब एक दर्जन लोग अरसे से काबिज हैं।
उनका कहना है कि वर्ष 1970 में जब यह जिला नहीं बना था उसी समय, जिला परिषद बस्ती से उन्हें जमीन का आवंटन हुआ था। तभी से वे यहां अस्थाई निर्माण कर अपनी रोजी रोटी चलाते हैं। इस बीच एक व्याक्ति ने मुख्यमंत्री से शिकायत कर इन दुकानों को हटाने की मांग की। जिस पर मुख्यमंत्री के यहां से मामले की जांच कर कार्रवाई के लिए कहा कहा गया है। दुकान चला रहे किशोरी, नवाब अली, फसादी, वफाती, गोपाल, दुक्खी मांझी, शमशाद, निसार, शिवपूजन, वायस मोहम्मद, मुक्खी हलवाई, रामचंदर, झमई, सीताराम व तुलसीदास ने बताया कि पुलिस उनका पक्ष सुने बगैर दुकान हटाने का दबाव बनी रही है।
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जबकि उनके पास जिला परिषद बस्ती द्वारा जमीनों के एलाटमेंट के कागजात मौजूद हैं। उनकी दुकानों के पीछे कुछ बंजर की जमीन है और उसके पीछे उस शख्स की जमीन है, जिसने मुख्यमंत्री से शिकायत की है। उन्होंने आरोप लगाया शिकायतकर्ता उनकी दुकानों को हटाकर बंजर की जमीन पर कब्जा करने की कोशिश में है। ताकि पीछे मौजूद उसकी जमीन सड़क से जुड़ जाए और वह अपनी जमीन का व्यवसायिक लाभ उठा सके।
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वहीं इस संबंध में प्रभारी एसओ ओम प्रकाश यादव ने बताया कि ऊपर से आए जांच के आदेश के क्रम में मामले की तहकीकात की जा रही है। किसी पर जबरिया दुकान हटाने का दबाव नहीं बनाया जा रहा है। काबिज दुकानदारों से उनके पास मौजूद कागजात मांगे गए हैं। पूरी जांच के बाद ही कोई कार्रवाई की जाएगी।