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मरीज बढ़े, डायलिसिस के बेड पड़े कम
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मरीज बढ़े, डायलिसिस के बेड पड़े कम
जिला अस्पताल के डायलिसिस यूनिट में हैं 10 बेड
गुर्दा के मरीजों में वृद्धि, डायलिसिस के लिए इंतजार
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। जिले में गुर्दा के मरीजों की संख्या बढ़ने से संयुक्त अस्पताल में डायलिसिस यूनिट में बेड कम पड़ने लगा है। यहां आने वाले मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ता है। दरअसल, यहां डायलिसिस करने वाली मशीनों की संख्या कम है और मरीज अधिक आते हैं। इस वजह से उन्हें एक से डेढ़ महीने बाद का नंबर लगाना पड़ता है।
जिला अस्पताल में मंगलवार को आए एक मरीज ने नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर बताया कि पिछले दिनों उन्हें एक महीने की तारीख दी गई थी। बीच में उनकी हालत बिगड़ने पर उन्हें एक निजी अस्पताल में ले जाया गया। इस बारे में जब सेंटर संचालक शुभम गिरि से बात की गई तो उन्होंने बताया कि सेंटर में 10 मशीनों से मरीजों की डायलिसिस की जा रही है। ऐसे में पहले आने वाले मरीज के हटने पर ही दूसरे का नंबर आता है। संयुक्त जिला अस्पताल में ही डायलिसिस कराने की सुविधा उपलब्ध है। इस वजह से यहां भीड़ अधिक होती है। आसपास के शहर के मरीज भी यहां आते हैं।
गंभीर मरीजों को निजी अस्पताल का सहारा
डायलिसिस के लिए लंबा समय मिलने की वजह से गंभीर मरीजों को हार मानकर निजी अस्पताल में जाना पड़ता है, जो उन्हें काफी महंगा पड़ता है। इसके लिए उन्हें बस्ती, गोरखपुर, लखनऊ जैसे महानगरों में जाना पड़ता है। इसमें सबसे ज्यादा परेशानी गुर्दा के मरीजों को होती है। हालांकि ऐसे मरीजों के लिए एक मशीन रिजर्व की गई है। इसके बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हो रहा है।
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जिला अस्पताल के डायलिसिस यूनिट में हैं 10 बेड
गुर्दा के मरीजों में वृद्धि, डायलिसिस के लिए इंतजार
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। जिले में गुर्दा के मरीजों की संख्या बढ़ने से संयुक्त अस्पताल में डायलिसिस यूनिट में बेड कम पड़ने लगा है। यहां आने वाले मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ता है। दरअसल, यहां डायलिसिस करने वाली मशीनों की संख्या कम है और मरीज अधिक आते हैं। इस वजह से उन्हें एक से डेढ़ महीने बाद का नंबर लगाना पड़ता है।
जिला अस्पताल में मंगलवार को आए एक मरीज ने नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर बताया कि पिछले दिनों उन्हें एक महीने की तारीख दी गई थी। बीच में उनकी हालत बिगड़ने पर उन्हें एक निजी अस्पताल में ले जाया गया। इस बारे में जब सेंटर संचालक शुभम गिरि से बात की गई तो उन्होंने बताया कि सेंटर में 10 मशीनों से मरीजों की डायलिसिस की जा रही है। ऐसे में पहले आने वाले मरीज के हटने पर ही दूसरे का नंबर आता है। संयुक्त जिला अस्पताल में ही डायलिसिस कराने की सुविधा उपलब्ध है। इस वजह से यहां भीड़ अधिक होती है। आसपास के शहर के मरीज भी यहां आते हैं।
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गंभीर मरीजों को निजी अस्पताल का सहारा
डायलिसिस के लिए लंबा समय मिलने की वजह से गंभीर मरीजों को हार मानकर निजी अस्पताल में जाना पड़ता है, जो उन्हें काफी महंगा पड़ता है। इसके लिए उन्हें बस्ती, गोरखपुर, लखनऊ जैसे महानगरों में जाना पड़ता है। इसमें सबसे ज्यादा परेशानी गुर्दा के मरीजों को होती है। हालांकि ऐसे मरीजों के लिए एक मशीन रिजर्व की गई है। इसके बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हो रहा है।
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