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Siddharthnagar News: नई-पुरानी बिल्डिंग के चक्कर में हांफ रहे मरीज

Tue, 15 Jul 2025 11:19 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 15 Jul 2025 11:19 PM IST
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Patients gasping for breath between new and old buildings
मेडिकल कॉलेज के पुराने भवन में सीढ़ियों से होकर ब्लड जांच करने के लिए जाती वृद्ध। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
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सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में सुविधाएं तो हैं, लेकिन उसके लाभ के लिए मरीजों को चक्कर लगाने में पसीना छूट जा रहा है।
ओपीडी नए भवन और जांच पुराने भवन में होने के कारण मरीजों को इलाज कराने में परेशानी होती है। एक मरीज को अगर दवा के साथ जांच लिख ली गई तो वह एक दिन में दिखा ले, यह मुमकिन नहीं है।
कारण भागदौड़ में उसका समय बीत जाता है। अगर रिपोर्ट मिलती है तो डॉक्टर उठ चुके होते हैं। यह एक-दो नहीं, बल्कि अधिकतर मरीजों के साथ हो रहा है। मंगलवार को इसकी पड़ताल की गई तो मरीजों की परेशानी सामने आई। उनका कहना था कि अगर जांच की सुविधाएं एक जगह होतीं तो राहत मिलती। इतनी दौड़ नहीं लगानी पड़ती।
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वहीं, मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने सभी सुविधाएं एक स्थान पर जल्द व्यवस्थित करने का दावा किया, लेकिन अभी तक शिफ्ट यह नहीं हो पाया है है। अगर यह हो जाए तो मरीजों के लिए बड़ी राहत होगी।
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जिला अस्पताल से माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध होने के बाद मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। यहांं रोजाना 500 से 700 के बीच होने वाली ओपीडी 1200 से 1500 तक पहुंच गई है। क्योंकि, मेडिकल कॉलेज होने के कारण मरीज अधिक आने लगे हैं। यहां जांच की सुविधाओं में वृद्धि हुई है। वार्ड भी अपडेट हुए और अन्य संसाधन भी बढ़े।
इसी बीच 300 बेड के भवन को शुरू कर दिया गया। इसमें ओपीडी शुरू होने के साथ- साथ हड्डी, मेडिसिन, जनरल सर्जरी का वार्ड संचालित होता है। लेकिन, जांच की सारी सुविधाएं पुराने भवन में हैं। नए और पुराने भवन के बीच की दूरी तकरीबन 500 मीटर से अधिक है। ऐसे में मरीज ने अगर किसी तरह से ओपीडी में डॉक्टर को दिखा भी लिया तो जांच के लिए उन्हें पुराने भवन में आना पड़ता है। दो बार की दौड़ भाग में पूरा समय गुजर जाता है।
उधर तब तक पता चलता कि डॉक्टर उठ चुके हैं। ऐसे में मरीज को दूसरे और तीसरे दिन तक चक्कर लगाना पड़ता है। जबकि मेडिकल कॉलेज प्रशासन की तरफ से जल्द ही जांच लैब और अन्य सुविधाएं मुकम्मल करने की बात कही जा रही थी। अभी तक पर्ची काउंटर और दवा वितरण कक्षा ही संचालित हो रहा है।
मंगलवार को मरीजों की समस्या को देखा गया, तो हर कोई परेशान नजर आया। हाथ की तकलीफ से पीड़ित उसका क्षेत्र के रमेश ने बताया कि ओपीडी में दिखाने के बाद एक्स-रे के लिए कहा गया है। एक्स-रे करवाया तो पता चला कि टूट गया है। इस दिन आगे का काम नहीं हुआ तो दूसरे दिन आना पड़ा।
ऐसे एक नहीं, बल्कि कई मरीजाें को मेडिकल कॉलेज में परेशान होना पड़ता है। वहीं, ब्लड सहित अन्य प्रकार की जांच कराने के लिए लोगों को परेशान होना पड़ रहा है। कई मरीजों ने इस प्रकार की पीड़ा व्यक्त की।

इस प्रकार से भटकते हैं मरीज: पुराने भवन भवन में सीटी स्कैन, एक्स-रे और ब्लड की जांच होती है। दवा भी यहां मिलती है। इसके अलावा इमरजेंसी वार्ड भी इसी में है। इसमें मरीजोंं को नए भवन में लेकर जाने में बहुत परेशानी हो रही है। कारण भर्ती करने के लिए मरीजों को नए भवन में ही जाना पड़ रहा है। अगर किसी के साथ केवल एक व्यक्ति होता है तो वह परेशान हो उठता है।
नया भवन केवल ओपीडी और दवा वितरण तक सीमित रह गया है। वहीं, नए भवन में भी तीसरे तल पर वार्ड बना है, जहां पहुंचने और आने में सांस फूल जा रही है।
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