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Siddharthnagar News: मरीज माफिया हैं सक्रिय, सतर्क होकर कराएं इलाज
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मेडिकल कालेज के पुराने भवन में स्थित ओपीडी में बिना ड्रेस के स्वास्थ्य कर्मी। संवाद
-इमरजेंसी से लेकर ओपीडी तक रहते हैं हावी, मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने माना घूम रहे दलाल, लगाम लगाने का शुरू किया प्रयास
-इमरजेंसी में भर्ती मरीजों के तीमारदार का बनेगा पास, तब मिलेगा प्रवेश, दलाली रोकने के लिए जारी किया गया नया नियम
-मेडिकल कॉलेज में दिन प्रतिदिन दलालों का शिकार हो रहे हैं मरीज, एप्रेन के बिना ड्यूटी करने वाले स्वास्थ्य कर्मियों पर होगी कार्रवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। अगर माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में इलाज के लिए आ रहे हैं, तो सतर्क रहें। क्योंकि यहां मरीज माफिया सक्रिय हैं, जो ओपीडी से लेकर जांच केंंद्र और लैब तक हावी हैं। कहींं जांच रिपोर्ट में गड़बड़ी तो कहीं दवा का सही न होने का बहाना। 20-25 प्रतिशत कम दर पर दवा और जांच में रियायत का झांसा देकर मरीजों का आर्थिक शोषण कर रहे हैं।
कौन स्वास्थ्यकर्मी और कौन बाहरी है, इससे लोग अनजान हैं। इसी का फायदा उठाकर मरीजों का शोषण किया जा रहा है। यहां मरीज माफिया की जड़ें इतनी गहरी हैं कि जब अधिकारी जांच करने आते हैं तो वे बच निकलते हैं। कारण यह है कि अफसरों की जांच से पहले मरीज माफिया को उनके आने की सूचना मिल जाती है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने भी इस बात को मान लिया है कि यहां दलाल हावी हैं, और जगह- जगह घूम रहे हैं। ऐसे में मरीजों को आगाह करने के साथ- साथ स्वास्थ्यकर्मी और डॉक्टरों को पत्र जारी करके चेताया गया है कि ड्रेस में ही ड्यूटी करें।
अगर एप्रेन के बिना ड्यूटी करने वाले स्वास्थ्य कर्मी मिले तो कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में यह पुख्ता हो गया है कि दलालों की जड़ें गहरी हैं, अगर खुद सचेत नहीं हुए तो निजी अस्पतालों को बेच देंगे। जैसा पूर्व में सौदा करने का मामला सामने आ चुका है।
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माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में रोजाना 1500-1800 मरीज ओपीडी में आते हैं। इसमें अधिकांश ऐसे होते हैं जिन्हें आगे पीछे कुछ पता नहीं होता है। वह बिना पूछे एक कदम आगे नहीं बढ़ पाते हैं। ऐसे में शुरू होता है मरीज माफियाओं का खेल। क्योंकि मरीज माफियाओं की तगड़ी घुसपैठ है। सिस्टम के लोगों से गठजोड़ करके यह जगह- जगह डेरा बनाए हुए हैं। पर्ची काउंटर से यह पीछे लगते हैं, और डॉक्टर को दिखाने तक मरीज को फंसा लेते हैं। अगर जांच लिखी होती है तो उन्हें यह बता देते हैं कि यहां तो समय लगेगा और रिपोर्ट भी नहीं मिलेगी। ऐसे में दिखाना मुश्किल हो जाएगा। ऐसे में मरीज फंस जाता है, और उनके साथ जाने पर जो जांच निशुल्क हो जाती, उसका 500-1000 हजार रुपये दे देता है।
कई बार सस्ती दवा दिलाने के नाम पर ठग लिया जाता है। मरीज जब डॉक्टर को दिखाने पहुंचता है, तो पता चलता है कि एक के अलावा अन्य दवाएं दूसरी हैं। ऐसे में मरीज परेशान हो जाता है। कई बार दलालों से मरीजों की कहासुनी भी हो जाती है। देखा जाए तो पूरे सिस्टम पर यह हावी हैं। सीसी कैमरा इनके लिए कोई मायने नहीं रखता है। अब तो मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने भी मान लिया है कि यह लोग मरीजों को चंगुल में फंसाकर लूटने का कार्य कर रहे हैं। ऐसे में वह भी अलर्ट मोड में हैं।
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पुरुष ही नहीं महिला दलाल भी हावी
अगर आप जान रहे हैं कि केवल पुरुष ही दलाल हैं, तो आप गलत हैं। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में सात से आठ ऐसी महिलाएं हैं जो आपको प्रतिदिन दिखेंगी। यह किसी की मदद के लिए नहीं, बल्कि फंसाकर उनसे मोटी कमाई करने के लिए आती हैं। शनिवार को हर दिन दिखने वाली दो महिलाएं ओपीडी काउंटर के पास मौजूद रहीं। हैरान और परेशान दिखने वाली महिलाओं से बात शुरू करके मदद करने के बहाने उन्हें साथ ले लिया। एक स्वास्थ्यकर्मी ने बताया कि इनका मेडिकल स्टोर और अल्ट्रासाउंड सेंटर तक पैठ है। प्रतिदिन चार से छह मरीज मिल जाते हैं और इनका 1000-15000 रुपये बन जाता है। इन पर कोई शक भी नहीं करता है। वहीं, नए भवन में प्लास्टर रूम के पास और सीटी स्कैन के पास नियमित दिखने वाले चेहरे मंडराते दिखे। इसके अलावा जांच केंद्र और ओपीडी के बाहर भी बाहरी लोग हमेशा की तरह से नजर आए, जिन पर कोई अंकुश नजर नहीं आया।
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नए भवन में आने के बाद और चमका दलालों का धंधा
मेडिकल कॉलेज में 300 बेड के वार्ड और ओपीडी शुरू कर दी गई है। अभी यहां मुकम्मल व्यवस्था नहीं है। ऐसे में दो भवन के चक्कर में जांच और दवा लेने में मरीज उलझ जा रहे हैं। भाग दौड़ के बीच मदद की पेशकश करते हुए दलाल झांसे में ले ले रहे हैं। कई दलाल तो ऐसे हैं कि दवा दिलाने की बात तक ठीक था। वह आसपास में मरीज को बैठाकर ब्लड और यूरिन का सैंपल ले ले रहे हैं। इसके बाद कुछ ही घंटे में लाकर रिपोर्ट दे दे रहे हैं। मरीज जांच लैब तक पहुंच ही नहीं पाता है। इतने में 200-1000 रुपये तक ले लेते हैं। नए भवन और पुराने में अधूरी सुविधा दलालों के लिए मुफीद साबित हो रही है।
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दलाली रोकने के लिए जारी किए निर्देश
माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज प्राचार्य ने पत्र जारी करके अवगत करवाया कि देखा जा रहा है कि इस चिकित्सालय में अनाधिकृत रूप से दलाल घूमते रहते हैं, जो आने वाले मरीजों से अनावश्यक रूप से बाहर की दवा खरीदने / बाहर इलाज कराने के संबंध में गुमराह करते हैं, जिससे चिकित्सालय की छवि धूमिल हो रही है। उक्त के दृष्टिगत इस चिकित्सालय में आने वाले मरीज के तीमारदारों हेतु पास निर्गत किए जाने की व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू की जाती है। इस हेतु इमरजेंसी विभाग में रजिस्ट्रेशन कक्ष पर तैनात कर्मचारी को पास निर्गत करने के लिए नामित किया जाता है। पहचान के लिए पास निर्गत करने के लिए कहा गया है। साथ ही विभागाध्यक्ष / प्रभारी अधिकारी को निर्देशित किया जाता है कि आप समस्त अपने अधीन विभाग के संकाय सदस्यों, सीनियर रेजीडेंट, जूनियर रेजीडेंट को माधव प्रसाद त्रिपाठी चिकित्सा महाविद्यालय संबद्ध चिकित्सालय के ओपीडी में एप्रन एवं स्टेथोस्कोप के साथ चिकित्सकीय परिधान (वेश-भूसा) एवं समयावधि पूर्वाह्न 08:00 बजे से अपराह्न 02:00 बजे तक बैठना सुनिश्चित करें। अन्यथा कि स्थिति में संबंधित के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति कर दी जाएगी, जिसके लिए आप स्वयं उत्तरदायी होंगे।
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इस प्रकार करते हैं काम
एक कर्मी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि यह लोग पूरी रात कब्जा जमाए रहते हैं। जैसे कोई गंभीर मरीज आता है। परिजनों को बरगलाकर कि यहां इलाज सही से नहीं होता, जान जा सकती। यह कहते हुए उन्हें से रेफर करवाते हैं, और निजी अस्पताल ले जाकर सौदा कर देते हैं। इमरजेंसी में मरीज लेकर आए रमेश ने बताया कि वह अकसर गांव के लोगों का इलाज कराने के लिए रात और दिन में इमरजेंसी आ जाते हैं। यहां कई प्रकार के दलाल मिलते हैं, रात में तो इनसे तकरार करने पर कुछ भी हो सकता है। इस प्रकार मेडिकल कॉलेज में मरीज माफियाओं का कब्जा है, लेकिन मेडिकल कॉलेज प्रशासन कार्रवाई के लिए ठोस कदम नहीं उठा पा रहा है।
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बुलाने के बाद सरकारी एंबुलेंस वालों काे करते हैं मना
अस्पताल में कार्य करने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि हर दिन दो चार मरीज इनके चंगुल में फंस जाते हैं। सरकारी एंबुलेंस पर कॉल करके बुलाने के बाद जब यह जान जाते हैं तो मरीजों को कई प्रकार से बरगलाते हैं। जिंदगी और मौत की बात करते हैं। ऐसे में घबराया हुआ व्यक्ति इनकी बातों में आकर इनके साथ चलने के लिए राजी हो जाता है। कॉल करने वाला खुद सरकारी एंबुलेंस को दोबारा सेवा नहीं लेने के लिए कहकर मना कर देता है। ऐसा हर दिन हो रहा है, लेकिन स्वास्थ्यकर्मी कुछ कर नहीं सकते हैं। क्योंकि रेफर होने के बाद मरीज के परिजन पर निर्भर होता है कि वह कहां लेकर जाएगा।
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ओटी में रुपये मांगने की शिकायत
मेडिकल कॉलेज में शनिवार को ही एक युवक ने ऑपरेशन के नाम पर रुपये मांगने और विरोध करने पर मोबाइल छीन लेने और धमकी देने का आरोप लगाया। इस मामले की उसने प्राचार्य से मौखिक शिकायत की, लेकिन खुद अस्पताल से जुड़ा कर्मचारी होने के कारण उसने कागजी शिकायत और कार्रवाई नहीं करने की बात करते हुए मामले को रफादफा कर लिया। इस मामले में प्रभारी प्राचार्य डॉ. एके झा ने बताया कि लिखित शिकायत नहीं मिलने के कारण जांच नहीं की जा रही है।
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आगे नहीं आते हैं जिम्मेदार
अस्पताल में दवा की दलाली करते हुए लोग कई बार पकड़े गए हैं। मामले में शिकायत थाने तक पहुंची है। पुलिस पकड़कर संदिग्धों को लेकर गई भी है, लेकिन शिकायत दर्ज कराने की बात जब आती है तो जिम्मेदार तहरीर देने से इन्कार कर देते हैं। ऐसे में चाहे दवा, जांच और निजी एंबुलेंस वालों पर कार्रवाई नहीं हो पाती है। इसलिए मरीजों का शोषण का सिलसिला रुक नहीं रहा है।
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बोले जिम्मेदार
मेडिकल कॉलेज में अब कोई बाहरी दिखेगा तो कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए ड्रेस में स्टाफ नर्स और डॉक्टरों को एप्रेन में रहने के लिए दिशा- निर्देश दिए गए हैं। बाहरी और दलाल किसी भी हाल में पनपने नहीं पाएंगे। पकड़े जाने पर कार्रवाई की जाएगी।
-प्रो. राजेश मोहन, प्राचार्य
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-मेडिकल कॉलेज में दिन प्रतिदिन दलालों का शिकार हो रहे हैं मरीज, एप्रेन के बिना ड्यूटी करने वाले स्वास्थ्य कर्मियों पर होगी कार्रवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। अगर माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में इलाज के लिए आ रहे हैं, तो सतर्क रहें। क्योंकि यहां मरीज माफिया सक्रिय हैं, जो ओपीडी से लेकर जांच केंंद्र और लैब तक हावी हैं। कहींं जांच रिपोर्ट में गड़बड़ी तो कहीं दवा का सही न होने का बहाना। 20-25 प्रतिशत कम दर पर दवा और जांच में रियायत का झांसा देकर मरीजों का आर्थिक शोषण कर रहे हैं।
कौन स्वास्थ्यकर्मी और कौन बाहरी है, इससे लोग अनजान हैं। इसी का फायदा उठाकर मरीजों का शोषण किया जा रहा है। यहां मरीज माफिया की जड़ें इतनी गहरी हैं कि जब अधिकारी जांच करने आते हैं तो वे बच निकलते हैं। कारण यह है कि अफसरों की जांच से पहले मरीज माफिया को उनके आने की सूचना मिल जाती है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने भी इस बात को मान लिया है कि यहां दलाल हावी हैं, और जगह- जगह घूम रहे हैं। ऐसे में मरीजों को आगाह करने के साथ- साथ स्वास्थ्यकर्मी और डॉक्टरों को पत्र जारी करके चेताया गया है कि ड्रेस में ही ड्यूटी करें।
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कई बार सस्ती दवा दिलाने के नाम पर ठग लिया जाता है। मरीज जब डॉक्टर को दिखाने पहुंचता है, तो पता चलता है कि एक के अलावा अन्य दवाएं दूसरी हैं। ऐसे में मरीज परेशान हो जाता है। कई बार दलालों से मरीजों की कहासुनी भी हो जाती है। देखा जाए तो पूरे सिस्टम पर यह हावी हैं। सीसी कैमरा इनके लिए कोई मायने नहीं रखता है। अब तो मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने भी मान लिया है कि यह लोग मरीजों को चंगुल में फंसाकर लूटने का कार्य कर रहे हैं। ऐसे में वह भी अलर्ट मोड में हैं।
पुरुष ही नहीं महिला दलाल भी हावी
अगर आप जान रहे हैं कि केवल पुरुष ही दलाल हैं, तो आप गलत हैं। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में सात से आठ ऐसी महिलाएं हैं जो आपको प्रतिदिन दिखेंगी। यह किसी की मदद के लिए नहीं, बल्कि फंसाकर उनसे मोटी कमाई करने के लिए आती हैं। शनिवार को हर दिन दिखने वाली दो महिलाएं ओपीडी काउंटर के पास मौजूद रहीं। हैरान और परेशान दिखने वाली महिलाओं से बात शुरू करके मदद करने के बहाने उन्हें साथ ले लिया। एक स्वास्थ्यकर्मी ने बताया कि इनका मेडिकल स्टोर और अल्ट्रासाउंड सेंटर तक पैठ है। प्रतिदिन चार से छह मरीज मिल जाते हैं और इनका 1000-15000 रुपये बन जाता है। इन पर कोई शक भी नहीं करता है। वहीं, नए भवन में प्लास्टर रूम के पास और सीटी स्कैन के पास नियमित दिखने वाले चेहरे मंडराते दिखे। इसके अलावा जांच केंद्र और ओपीडी के बाहर भी बाहरी लोग हमेशा की तरह से नजर आए, जिन पर कोई अंकुश नजर नहीं आया।
नए भवन में आने के बाद और चमका दलालों का धंधा
मेडिकल कॉलेज में 300 बेड के वार्ड और ओपीडी शुरू कर दी गई है। अभी यहां मुकम्मल व्यवस्था नहीं है। ऐसे में दो भवन के चक्कर में जांच और दवा लेने में मरीज उलझ जा रहे हैं। भाग दौड़ के बीच मदद की पेशकश करते हुए दलाल झांसे में ले ले रहे हैं। कई दलाल तो ऐसे हैं कि दवा दिलाने की बात तक ठीक था। वह आसपास में मरीज को बैठाकर ब्लड और यूरिन का सैंपल ले ले रहे हैं। इसके बाद कुछ ही घंटे में लाकर रिपोर्ट दे दे रहे हैं। मरीज जांच लैब तक पहुंच ही नहीं पाता है। इतने में 200-1000 रुपये तक ले लेते हैं। नए भवन और पुराने में अधूरी सुविधा दलालों के लिए मुफीद साबित हो रही है।
दलाली रोकने के लिए जारी किए निर्देश
माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज प्राचार्य ने पत्र जारी करके अवगत करवाया कि देखा जा रहा है कि इस चिकित्सालय में अनाधिकृत रूप से दलाल घूमते रहते हैं, जो आने वाले मरीजों से अनावश्यक रूप से बाहर की दवा खरीदने / बाहर इलाज कराने के संबंध में गुमराह करते हैं, जिससे चिकित्सालय की छवि धूमिल हो रही है। उक्त के दृष्टिगत इस चिकित्सालय में आने वाले मरीज के तीमारदारों हेतु पास निर्गत किए जाने की व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू की जाती है। इस हेतु इमरजेंसी विभाग में रजिस्ट्रेशन कक्ष पर तैनात कर्मचारी को पास निर्गत करने के लिए नामित किया जाता है। पहचान के लिए पास निर्गत करने के लिए कहा गया है। साथ ही विभागाध्यक्ष / प्रभारी अधिकारी को निर्देशित किया जाता है कि आप समस्त अपने अधीन विभाग के संकाय सदस्यों, सीनियर रेजीडेंट, जूनियर रेजीडेंट को माधव प्रसाद त्रिपाठी चिकित्सा महाविद्यालय संबद्ध चिकित्सालय के ओपीडी में एप्रन एवं स्टेथोस्कोप के साथ चिकित्सकीय परिधान (वेश-भूसा) एवं समयावधि पूर्वाह्न 08:00 बजे से अपराह्न 02:00 बजे तक बैठना सुनिश्चित करें। अन्यथा कि स्थिति में संबंधित के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति कर दी जाएगी, जिसके लिए आप स्वयं उत्तरदायी होंगे।
इस प्रकार करते हैं काम
एक कर्मी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि यह लोग पूरी रात कब्जा जमाए रहते हैं। जैसे कोई गंभीर मरीज आता है। परिजनों को बरगलाकर कि यहां इलाज सही से नहीं होता, जान जा सकती। यह कहते हुए उन्हें से रेफर करवाते हैं, और निजी अस्पताल ले जाकर सौदा कर देते हैं। इमरजेंसी में मरीज लेकर आए रमेश ने बताया कि वह अकसर गांव के लोगों का इलाज कराने के लिए रात और दिन में इमरजेंसी आ जाते हैं। यहां कई प्रकार के दलाल मिलते हैं, रात में तो इनसे तकरार करने पर कुछ भी हो सकता है। इस प्रकार मेडिकल कॉलेज में मरीज माफियाओं का कब्जा है, लेकिन मेडिकल कॉलेज प्रशासन कार्रवाई के लिए ठोस कदम नहीं उठा पा रहा है।
बुलाने के बाद सरकारी एंबुलेंस वालों काे करते हैं मना
अस्पताल में कार्य करने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि हर दिन दो चार मरीज इनके चंगुल में फंस जाते हैं। सरकारी एंबुलेंस पर कॉल करके बुलाने के बाद जब यह जान जाते हैं तो मरीजों को कई प्रकार से बरगलाते हैं। जिंदगी और मौत की बात करते हैं। ऐसे में घबराया हुआ व्यक्ति इनकी बातों में आकर इनके साथ चलने के लिए राजी हो जाता है। कॉल करने वाला खुद सरकारी एंबुलेंस को दोबारा सेवा नहीं लेने के लिए कहकर मना कर देता है। ऐसा हर दिन हो रहा है, लेकिन स्वास्थ्यकर्मी कुछ कर नहीं सकते हैं। क्योंकि रेफर होने के बाद मरीज के परिजन पर निर्भर होता है कि वह कहां लेकर जाएगा।
ओटी में रुपये मांगने की शिकायत
मेडिकल कॉलेज में शनिवार को ही एक युवक ने ऑपरेशन के नाम पर रुपये मांगने और विरोध करने पर मोबाइल छीन लेने और धमकी देने का आरोप लगाया। इस मामले की उसने प्राचार्य से मौखिक शिकायत की, लेकिन खुद अस्पताल से जुड़ा कर्मचारी होने के कारण उसने कागजी शिकायत और कार्रवाई नहीं करने की बात करते हुए मामले को रफादफा कर लिया। इस मामले में प्रभारी प्राचार्य डॉ. एके झा ने बताया कि लिखित शिकायत नहीं मिलने के कारण जांच नहीं की जा रही है।
आगे नहीं आते हैं जिम्मेदार
अस्पताल में दवा की दलाली करते हुए लोग कई बार पकड़े गए हैं। मामले में शिकायत थाने तक पहुंची है। पुलिस पकड़कर संदिग्धों को लेकर गई भी है, लेकिन शिकायत दर्ज कराने की बात जब आती है तो जिम्मेदार तहरीर देने से इन्कार कर देते हैं। ऐसे में चाहे दवा, जांच और निजी एंबुलेंस वालों पर कार्रवाई नहीं हो पाती है। इसलिए मरीजों का शोषण का सिलसिला रुक नहीं रहा है।
बोले जिम्मेदार
मेडिकल कॉलेज में अब कोई बाहरी दिखेगा तो कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए ड्रेस में स्टाफ नर्स और डॉक्टरों को एप्रेन में रहने के लिए दिशा- निर्देश दिए गए हैं। बाहरी और दलाल किसी भी हाल में पनपने नहीं पाएंगे। पकड़े जाने पर कार्रवाई की जाएगी।
-प्रो. राजेश मोहन, प्राचार्य