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SiddharthNagar: वैज्ञानिक आरसी चौधरी को पद्मश्री अवार्ड, काला नमक चावल को दिलाई विश्व पटल पर पहचान
Sat, 27 Jan 2024 02:29 PM IST
रोहित शर्मा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Published by: रोहित शर्मा
Updated Sat, 27 Jan 2024 02:29 PM IST
सार
रिसर्च पर रिसर्च के बाद काला नमक को विश्व पटल पर एक नई पहचान दिला सके। सिद्धार्थ नगर जनपद के एक जिला एक उत्पाद के रूप में चेंज काला नमक विश्व पटल पर अब दिखने लगा है। उनके रिसर्च में यह सामने आ चुका है कि काला नमक शुगर फ्री भी है और उन्होंने इस धन की कई और प्रजातियां तैयार की है।
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वैज्ञानिक आरसी चौधरी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सिद्धार्थनगर के काला नमक चावल को लेकर वैज्ञानिक आरसी चौधरी के रिसर्च पर रिसर्च का परिणाम है कि अब विश्व पटल पर इसे एक नई पहचान मिली है। सिद्धार्थ नगर जनपद के एक जिला एक उत्पाद के रूप में चेंज काला नमक विश्व पटल पर अब दिखने लगा है। उनके रिसर्च में यह सामने आ चुका है कि काला नमक शुगर फ्री भी है और उन्होंने इस धन की कई और प्रजातियां तैयार की है।
संतकबीर नगर के निवासी वैज्ञानिक आरसी चौधरी ने सिद्धार्थनगर के काला नमक को विश्व पटल पर पहचान दिलाने के लिए लंबे समय तक किया। गौतम बुद्ध के धरती का प्रसाद कहे जाने वाली सिद्धार्थनगर की माटी काला नमक धान के लिए एक अलग पहचान बन चुकी है।
सीमा से सेट तराई इलाका इस खुशबू वाले धान के लिए एक विशेष क्षेत्र माना जाता रहा है ,अब काला नमक लगभग पूरे पूर्वांचल में अलग पहचान बन चुका है, सिद्धार्थ नगर जनपद के एक जिला एक उत्पाद के रूप में चेंज काला नमक विश्व पटेल पर दिखने लगा है। बौद्ध देशों में इसकी अधिक डिमांड है। लंबी कद वाले काला नमक धन को सही दिशा और छोटे कड़क बनाने के लिए वैज्ञानिक आरसी चौधरी लंबे समय से प्रयासरत रिसर्च पर रिसर्च कर रहे थे।
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उनके रिसर्च में यह सामने आ चुका है कि काला नमक शुगर फ्री भी है और उन्होंने इस धन की कई और प्रजातियां तैयार की है। जिस किसान लग रहे हैं। महात्मा बुद्ध के प्रसाद के रूप में पुरी दुनिया में विख्यात काला नमक चावल को पुनर्जीवित करने वाले वैज्ञानिक डॉक्टर रामचरित चौधरी को पद्मश्री अवार्ड मिला है। फोन पर हुई बातचीत में उन्होंने बताया कि रात 11:00 बजे जब यह घोषित हुआ तो उनके खुशी का ठिकाना ही नहीं रहा। उन्होंने बताया कि उनकी इस उपलब्धि में पूर्वांचल की माटी का बड़ा योगदान है।
मुख्यमंत्री ने एक जिला एक उत्पाद में काला नमक को दिलाई पहचान
आरसी चौधरी ने बताया कि सिद्धार्थनगर की धरती पर काला नमक चावल महात्मा बुद्ध के समय में बड़े पैमाने पर होता था मौजूदा समय में भी उसको उन्होंने फिर से क्षेत्र में जीवित करने और किसानों को इसकी खेती के प्रति जागरूक किया। इसके बाद बड़े पैमाने पर उत्पादन होने लगा। योगी सरकार ने एक जिला एक उत्पाद के तहत सिद्धार्थनगर में काला नमक को चयनित किया है। इसे आगे बढ़ाने में प्रदेश की योगी सरकार ने भी मदद की काला नमक चावल के निर्यात पर भारत सरकार ने रोक लगा रखी है।
संतकबीर नगर के निवासी वैज्ञानिक आरसी चौधरी ने सिद्धार्थनगर के काला नमक को विश्व पटल पर पहचान दिलाने के लिए लंबे समय तक किया। गौतम बुद्ध के धरती का प्रसाद कहे जाने वाली सिद्धार्थनगर की माटी काला नमक धान के लिए एक अलग पहचान बन चुकी है।
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सीमा से सेट तराई इलाका इस खुशबू वाले धान के लिए एक विशेष क्षेत्र माना जाता रहा है ,अब काला नमक लगभग पूरे पूर्वांचल में अलग पहचान बन चुका है, सिद्धार्थ नगर जनपद के एक जिला एक उत्पाद के रूप में चेंज काला नमक विश्व पटेल पर दिखने लगा है। बौद्ध देशों में इसकी अधिक डिमांड है। लंबी कद वाले काला नमक धन को सही दिशा और छोटे कड़क बनाने के लिए वैज्ञानिक आरसी चौधरी लंबे समय से प्रयासरत रिसर्च पर रिसर्च कर रहे थे।
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उनके रिसर्च में यह सामने आ चुका है कि काला नमक शुगर फ्री भी है और उन्होंने इस धन की कई और प्रजातियां तैयार की है। जिस किसान लग रहे हैं। महात्मा बुद्ध के प्रसाद के रूप में पुरी दुनिया में विख्यात काला नमक चावल को पुनर्जीवित करने वाले वैज्ञानिक डॉक्टर रामचरित चौधरी को पद्मश्री अवार्ड मिला है। फोन पर हुई बातचीत में उन्होंने बताया कि रात 11:00 बजे जब यह घोषित हुआ तो उनके खुशी का ठिकाना ही नहीं रहा। उन्होंने बताया कि उनकी इस उपलब्धि में पूर्वांचल की माटी का बड़ा योगदान है।
मुख्यमंत्री ने एक जिला एक उत्पाद में काला नमक को दिलाई पहचान
आरसी चौधरी ने बताया कि सिद्धार्थनगर की धरती पर काला नमक चावल महात्मा बुद्ध के समय में बड़े पैमाने पर होता था मौजूदा समय में भी उसको उन्होंने फिर से क्षेत्र में जीवित करने और किसानों को इसकी खेती के प्रति जागरूक किया। इसके बाद बड़े पैमाने पर उत्पादन होने लगा। योगी सरकार ने एक जिला एक उत्पाद के तहत सिद्धार्थनगर में काला नमक को चयनित किया है। इसे आगे बढ़ाने में प्रदेश की योगी सरकार ने भी मदद की काला नमक चावल के निर्यात पर भारत सरकार ने रोक लगा रखी है।
यहां के रहने वाले हैं आरसी चौधरी
मूल रूप से संत कबीरनगर जनपद के महुली थाना क्षेत्र के झींगुरा पार गांव के रहने वाले डॉक्टर आरसी चौधरी का बचपन, इसी गांव में पढ़ते-लिखते आगे बढ़ा। उन्होंने एमएससी की डिग्री कानपुर विश्वविद्यालय से ली। डॉक्टरेट की उपाधि भी एग्रीकल्चर में यही से प्राप्त की। उन्होंने पोस्ट डॉक्टरेट की डिग्री जर्मनी से ली। 8 नवंबर 1944 को जन्मे डॉक्टर चौधरी तुलसी के वैज्ञानिक और बायो मेडिकल महत्व को दर्शाते हुए खेती पर करीब दो दशक पहले तक बड़ा अभियान चलाया।
बौद्ध देशों में है अधिक डिमांड
नेपाल, चीन, वर्मा, ताइवान, इंडोनेशिया और श्रीलंका में बौद्ध धर्म को मानने वाले काला नमक चावल को भगवान गौतम बुद्ध का प्रसाद मानते हैं। इसलिए इस चावल को वह अधिक खरीदने हैं। कई ऐसे कारोबारी हैं जो इंपोर्ट के जरिए चावल को इन देशों में पहुंच रहे हैं और उसका उन्हें लाभ मिल रहा है। फिलहाल मौजूदा समय में केंद्र सरकार ने गैर बासमती चावल के निर्यात पर रोक है।
मूल रूप से संत कबीरनगर जनपद के महुली थाना क्षेत्र के झींगुरा पार गांव के रहने वाले डॉक्टर आरसी चौधरी का बचपन, इसी गांव में पढ़ते-लिखते आगे बढ़ा। उन्होंने एमएससी की डिग्री कानपुर विश्वविद्यालय से ली। डॉक्टरेट की उपाधि भी एग्रीकल्चर में यही से प्राप्त की। उन्होंने पोस्ट डॉक्टरेट की डिग्री जर्मनी से ली। 8 नवंबर 1944 को जन्मे डॉक्टर चौधरी तुलसी के वैज्ञानिक और बायो मेडिकल महत्व को दर्शाते हुए खेती पर करीब दो दशक पहले तक बड़ा अभियान चलाया।
बौद्ध देशों में है अधिक डिमांड
नेपाल, चीन, वर्मा, ताइवान, इंडोनेशिया और श्रीलंका में बौद्ध धर्म को मानने वाले काला नमक चावल को भगवान गौतम बुद्ध का प्रसाद मानते हैं। इसलिए इस चावल को वह अधिक खरीदने हैं। कई ऐसे कारोबारी हैं जो इंपोर्ट के जरिए चावल को इन देशों में पहुंच रहे हैं और उसका उन्हें लाभ मिल रहा है। फिलहाल मौजूदा समय में केंद्र सरकार ने गैर बासमती चावल के निर्यात पर रोक है।