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अस्पताल तो खुला पर गायब रहे डॉक्टर
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 16 Oct 2016 10:14 PM IST
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जिला अस्पताल में रविवार को खुले दवा काउंटर में बैठे कर्मचारी।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सिद्धार्थनगर। डेंगू, चिकनगुनिया के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए स्वास्थ्य निदेशालय ने रविवार को भी अस्पताल की ओपीडी खोलने का निर्देश जारी किया था। इस क्रम में रविवार को जिला अस्पताल खुला तो जरूर, मगर डॉक्टर गायब रहे। ज्यादातर चिकित्सकों के चेंबर खाली थे। हालांकि प्लास्टर कक्ष, दवा काउंटर व लाइब्रेरी खुली रही और कर्मचारी भी मौजूद रहे। दूर-दराज से जो मरीज आए, वह यहां-वहां भटकते रहे।
बदलते मौसम में डेंगू, चिकनगुनिया के प्रकोप पर नियंत्रण के लिए अब रविवार को भी जिला अस्पताल की ओपीडी खोलने का निर्देश दिया है। पहले रविवार पर अस्पताल तो खुला हुआ जरूर नजर आया, लेकिन अपने केबिन में चिकित्सक नहीं थे। कई डॉक्टरों का केबिन तो खुला भी नहीं था। जिनका खुला, वह भी अनुपस्थित थे। सिर्फ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. संजय चौधरी ही ड्यूटी पर मुस्तैद दिखे। बच्चों की जांच कर दवाएं भी दी।
इसके साथ वह आईसीयू वार्ड मेें भी ड्यूटी करते रहे। नेत्र चिकित्सक का केबिन खुला था, मगर कोई डॉक्टर या कर्मचरी नहीं था। हड्डी रोग विशेषज्ञ की कुर्सियां भी खाली थीं। मौजूद लोगों का कहना था कि डॉक्टर साहब आए ही नहीं थे। इंजेक्शन कक्ष, दवा वितरण केंद्र, एक्सरे कक्ष, प्लास्टर रूम खोलकर कर्मचारी ड्यूटी करते नजर आए। कुछ कर्मचारियों ने नाम न छापने के शर्त पर बताया कि 25 मरीजों ने पर्ची कटवाया, मगर केवल बच्चों का ही इलाज हो पाया।
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अन्य मरीजों को निराश लौटना पड़ा। इस संबंध में सीएमएस डॉ. रोचस्मति पांडेय का कहना था कि ओपीडी में सभी डॉक्टरों की ड्यूटी नहीं थी। चार डॉक्टर लगाए गए थे। मेरी जानकारी में सभी मौजूद रहे। अगर कोई अनुपस्थित था तो जानकारी लेकर कार्रवाई की जाएगी।
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बदलते मौसम में डेंगू, चिकनगुनिया के प्रकोप पर नियंत्रण के लिए अब रविवार को भी जिला अस्पताल की ओपीडी खोलने का निर्देश दिया है। पहले रविवार पर अस्पताल तो खुला हुआ जरूर नजर आया, लेकिन अपने केबिन में चिकित्सक नहीं थे। कई डॉक्टरों का केबिन तो खुला भी नहीं था। जिनका खुला, वह भी अनुपस्थित थे। सिर्फ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. संजय चौधरी ही ड्यूटी पर मुस्तैद दिखे। बच्चों की जांच कर दवाएं भी दी।
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इसके साथ वह आईसीयू वार्ड मेें भी ड्यूटी करते रहे। नेत्र चिकित्सक का केबिन खुला था, मगर कोई डॉक्टर या कर्मचरी नहीं था। हड्डी रोग विशेषज्ञ की कुर्सियां भी खाली थीं। मौजूद लोगों का कहना था कि डॉक्टर साहब आए ही नहीं थे। इंजेक्शन कक्ष, दवा वितरण केंद्र, एक्सरे कक्ष, प्लास्टर रूम खोलकर कर्मचारी ड्यूटी करते नजर आए। कुछ कर्मचारियों ने नाम न छापने के शर्त पर बताया कि 25 मरीजों ने पर्ची कटवाया, मगर केवल बच्चों का ही इलाज हो पाया।
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अन्य मरीजों को निराश लौटना पड़ा। इस संबंध में सीएमएस डॉ. रोचस्मति पांडेय का कहना था कि ओपीडी में सभी डॉक्टरों की ड्यूटी नहीं थी। चार डॉक्टर लगाए गए थे। मेरी जानकारी में सभी मौजूद रहे। अगर कोई अनुपस्थित था तो जानकारी लेकर कार्रवाई की जाएगी।