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कर्मचारी हड़ताल पर, बैंकों पर ताले लटके
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Fri, 29 Jul 2016 10:29 PM IST
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बैंकों की हड़ताल
- फोटो : PTI
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सिद्धार्थनगर। निजीकरण के विरोध सहित अन्य मांगों को लेकर बैंक कर्मचारी शुक्रवार को हड़ताल पर रहे। कर्मचारियों की हड़ताल से जिले के सभी राष्ट्रीयकृत बैंक शाखाओं पर ताला लगा रहा। कर्मचारियों ने मांगों के समर्थन में नारे लगाए और मांगों पर शीघ्र कार्रवाई की मांग की। हड़ताल के चलते एसबीआई, यूबीआई, केनरा बैंक, पीएनबी सहित विभिन्न बैंकों की जिले में चार दर्जन से अधिक शाखाओं में काम। इससे लाखों का कारोबार प्रभावित हुआ है।
सिविल लाइन स्थित एसबीआई शाखा पर एकत्र होकर बैंक कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। यहां हुई सभा में वक्ताओं ने कहा कि यह हड़ताल हमारी वेतन वृद्धि या अन्य मांगों के समर्थन में नहीं है, बल्कि राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले सार्वजनिक क्षेत्र को सुनियोजित ढंग से निजी क्षेत्र के हाथ में सौंपने की सरकार की साजिश को उजागर करने के लिए है। राष्ट्रीय निर्माण, प्राथमिकताओं व योजनाओं में सार्वजनिक क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है और इस क्षेत्र की रक्षा करना सभी नागरिकों का दायित्व है।
सुधारों के नाम पर सरकार का लक्ष्य निजीकरण, अधिग्रहण व मर्जर के बहाने सार्वजनिक क्षेत्र के ताने-बाने को तहस-नहस करना है। सरकारी नीतियां कॉरपोरेट घरानों व कुछ व्यक्तियों के ही हित में हैं, जिनके कारण बीएसएनएल, एमटीएनएल आदि पहले से ही संकट में हैं। सोची-समझी चाल के तहत यह प्रचारित किया जा रहा है कि सार्वजनिक क्षेत्र विशेषकर बैंक अच्छा कार्य नहीं कर रहे हैं।
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सरकार अपनी ओर से पूरे प्रयास कर रही है कि वह इस क्षेत्र में अपनी हिस्सेदारी कम करे जिसका पुरजोर विरोध होना चाहिए। विरोध-प्रदर्शन में बिंदेश्वरी, त्रिलोकी, रामसेवक गुप्ता, सुदर्शन, रूपक, महेंद्र प्रताप, गोविंद, अशोक, रामभरोसे, प्रभात रंजन, आनंद कुमार, नितिन, सचिन और मुनेश आदि शामिल रहे।
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सिविल लाइन स्थित एसबीआई शाखा पर एकत्र होकर बैंक कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। यहां हुई सभा में वक्ताओं ने कहा कि यह हड़ताल हमारी वेतन वृद्धि या अन्य मांगों के समर्थन में नहीं है, बल्कि राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले सार्वजनिक क्षेत्र को सुनियोजित ढंग से निजी क्षेत्र के हाथ में सौंपने की सरकार की साजिश को उजागर करने के लिए है। राष्ट्रीय निर्माण, प्राथमिकताओं व योजनाओं में सार्वजनिक क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है और इस क्षेत्र की रक्षा करना सभी नागरिकों का दायित्व है।
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सुधारों के नाम पर सरकार का लक्ष्य निजीकरण, अधिग्रहण व मर्जर के बहाने सार्वजनिक क्षेत्र के ताने-बाने को तहस-नहस करना है। सरकारी नीतियां कॉरपोरेट घरानों व कुछ व्यक्तियों के ही हित में हैं, जिनके कारण बीएसएनएल, एमटीएनएल आदि पहले से ही संकट में हैं। सोची-समझी चाल के तहत यह प्रचारित किया जा रहा है कि सार्वजनिक क्षेत्र विशेषकर बैंक अच्छा कार्य नहीं कर रहे हैं।
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सरकार अपनी ओर से पूरे प्रयास कर रही है कि वह इस क्षेत्र में अपनी हिस्सेदारी कम करे जिसका पुरजोर विरोध होना चाहिए। विरोध-प्रदर्शन में बिंदेश्वरी, त्रिलोकी, रामसेवक गुप्ता, सुदर्शन, रूपक, महेंद्र प्रताप, गोविंद, अशोक, रामभरोसे, प्रभात रंजन, आनंद कुमार, नितिन, सचिन और मुनेश आदि शामिल रहे।