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नोटबंदी की मार से कराह रहे नेपाली बाजार
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 15 Jan 2017 10:52 PM IST
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नेपाल के कृष्णानगर बजार में पसरा सन्नाटा।
- फोटो : अमर उजाला
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सिद्धार्थनगर। भारत में नोटबंदी को अब दो माह बीत चुके हैं। जैसे-तैसे भारतीय बाजार तो संभल गए, मगर नेपाली बाजारों में अब तक रौनक नहीं लौटी गई। सर्दी के सीजन में करोड़ों का कारोबार करने वाले इन बाजारों को नोटबंदी से जैसे पाला मार गया है। लाखों का व्यवसाय करने वाले दुकानदार कुछ सौ की बिक्री तक सिमट गए हैं। भारतीय क्षेत्र से खरीदारी को पहुंचने वाले पर्यटकों की संख्या आधे से कम हो गई है। प्रतिवर्ष जनवरी माह तक नेपाल के सीमाई बाजारों से निर्यात करोड़ों का होता था, इस बार पांच सीमाई जिलों का व्यवसाय सिर्फ 85 लाख रूपये पर सिमट गया है।
भारतीय मुद्रा नेपाल में दो माह तक प्रतिबंधित रही। नए नोट अब प्रचलन में हैं पर पर्यटकों की कमी से नेपाल के बाजार जूझ रहे हैं। सर्दी की शुरुआत से समाप्ति तक वर्ष 2015 में भारतीय सीमा से जुड़े नेपाल के बाजारों की बिक्री 25 करोड़ रुपये से अधिक की थी। इस बार इन जिलों में बिक्री का आंकड़ा 85 लाख रुपये पर सिमट रहा है। कपिलवस्तु, रूपनदेही, बुटवल, दांग और नवलपरासी जिले गर्म कपड़े, कंबल, इलेक्ट्रानिक और मसालों के बड़े बाजार हैं। भारतीय को खरीदारी के लिए यह बाजार वर्षों से मुफीद रहे हैं, क्योंकि यहां कम दर पर इस श्रेणी के सामान विभिन्न वेरायटी में मौजूद होते हैं।
रेडिमेड, ऊलेन और कंबल का व्यापार प्रतिवर्ष यहां 15 करोड़ से अधिक का था, जो इस बार 35 लाख तक ही पहुंच पाया है। कपिलवस्तु के भानू कसौधन ऊलेन रेडिमेड के कारोबारी हैं। उनका कहना है कि वह तिब्बत और चीन से सप्लाई लाते हैं। प्रतिवर्ष उनका कारोबार दो करोड़ का होता था जो इस बार दस लाख तक ही हो सका है। बुटवल में कंबलों के थोक व्यापारी हीरल बस्नेत का कहना है कि बाजार की बुरी स्थिति है इक्का दुक्का खरीदार ही नजर आते हैं, जबकि पहले इस सीजन में दुकानें ग्राहकों से भरी होती थीं। दांग में इलेक्ट्रिक आइटमों के सप्लायर दीपक का कहना है कि बाजार में सन्नाटा है। पहले ब्लोवर,रूम हीटर,वाटर हीटर, गीजर की काफी डिमांड होती थी इस बार डिमांड कम है। नेपाल के व्यापारियों की रोजी रोटी काफी हद तक भारतीय खरीददारों पर निर्भर है पर इस बार भारतीय नोटबंदी और नोट प्रतिबंध के कारण नेपाल के बाजार बाजार सन्नाटे में हैं।
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भारतीय मुद्रा नेपाल में दो माह तक प्रतिबंधित रही। नए नोट अब प्रचलन में हैं पर पर्यटकों की कमी से नेपाल के बाजार जूझ रहे हैं। सर्दी की शुरुआत से समाप्ति तक वर्ष 2015 में भारतीय सीमा से जुड़े नेपाल के बाजारों की बिक्री 25 करोड़ रुपये से अधिक की थी। इस बार इन जिलों में बिक्री का आंकड़ा 85 लाख रुपये पर सिमट रहा है। कपिलवस्तु, रूपनदेही, बुटवल, दांग और नवलपरासी जिले गर्म कपड़े, कंबल, इलेक्ट्रानिक और मसालों के बड़े बाजार हैं। भारतीय को खरीदारी के लिए यह बाजार वर्षों से मुफीद रहे हैं, क्योंकि यहां कम दर पर इस श्रेणी के सामान विभिन्न वेरायटी में मौजूद होते हैं।
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रेडिमेड, ऊलेन और कंबल का व्यापार प्रतिवर्ष यहां 15 करोड़ से अधिक का था, जो इस बार 35 लाख तक ही पहुंच पाया है। कपिलवस्तु के भानू कसौधन ऊलेन रेडिमेड के कारोबारी हैं। उनका कहना है कि वह तिब्बत और चीन से सप्लाई लाते हैं। प्रतिवर्ष उनका कारोबार दो करोड़ का होता था जो इस बार दस लाख तक ही हो सका है। बुटवल में कंबलों के थोक व्यापारी हीरल बस्नेत का कहना है कि बाजार की बुरी स्थिति है इक्का दुक्का खरीदार ही नजर आते हैं, जबकि पहले इस सीजन में दुकानें ग्राहकों से भरी होती थीं। दांग में इलेक्ट्रिक आइटमों के सप्लायर दीपक का कहना है कि बाजार में सन्नाटा है। पहले ब्लोवर,रूम हीटर,वाटर हीटर, गीजर की काफी डिमांड होती थी इस बार डिमांड कम है। नेपाल के व्यापारियों की रोजी रोटी काफी हद तक भारतीय खरीददारों पर निर्भर है पर इस बार भारतीय नोटबंदी और नोट प्रतिबंध के कारण नेपाल के बाजार बाजार सन्नाटे में हैं।
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