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नेपाल की तराई में खुद को मजबूत करने में जुटा चीन, योजनाएं शुरू करने की तैयारी
Fri, 10 Jan 2020 12:03 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
नीरज मिश्र/ध्रुव यादव, अमर उजाला
नीरज मिश्र/ध्रुव यादव, अमर उजाला
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 10 Jan 2020 12:03 PM IST
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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (फाइल फोटो)
- फोटो : PTI
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चीन फिर से नेपाल की तराई में खुद को मजबूत करने में जुट गया है। नई रणनीति के तहत पर्वतीय क्षेत्रों के बाद अब तराई में भी विकास योजनाएं शुरू करने की तैयारी कर रहा। इसी क्रम में बुधवार को चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं ने नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के साथ यहां की सरकार में शामिल और तराई में मजबूत पकड़ रखने वाली राष्ट्रीय जनता पार्टी नेपाल (राजपा नेपाल) के नेताओं से मुलाकात की है।
चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के एशिया ब्यूरो के जनरल डायरेक्टर सीयू संग अपनी टीम के साथ राजपा नेपाल के केंद्रीय कार्यालय में पार्टी के संयोजक राजेंद्र महतो व अध्यक्ष महंथ ठाकुर से मुलाकात की। इसके कई मायने निकाले जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, तराई में चीन अपनी दखल मजबूत करने को कई अहम योजनाएं लाने वाला है।
भैरहवा में अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का काम चीन के जिम्मे है। यह भारत-नेपाल सीमा से महज 8-10 किमी दूर है। गौतमबुद्ध की जन्मस्थली लुंबिनी में भी चीन मंदिर बना रहा है। मुलाकात के बाद यह बात सामने आई है कि तराई के बुटवल, भैरहवा, कपिलवस्तु, रुपनदेही, नारायणघाट सहित नेपालगंज जैसे नेपाल के कई शहरों में चीन बड़े बाजार खोलने की तैयारी में है। इसका मुख्य मकसद विकास के जरिये तराई में मजबूत पकड़ बनाना है।
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चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के एशिया ब्यूरो के जनरल डायरेक्टर सीयू संग अपनी टीम के साथ राजपा नेपाल के केंद्रीय कार्यालय में पार्टी के संयोजक राजेंद्र महतो व अध्यक्ष महंथ ठाकुर से मुलाकात की। इसके कई मायने निकाले जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, तराई में चीन अपनी दखल मजबूत करने को कई अहम योजनाएं लाने वाला है।
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भैरहवा में अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का काम चीन के जिम्मे है। यह भारत-नेपाल सीमा से महज 8-10 किमी दूर है। गौतमबुद्ध की जन्मस्थली लुंबिनी में भी चीन मंदिर बना रहा है। मुलाकात के बाद यह बात सामने आई है कि तराई के बुटवल, भैरहवा, कपिलवस्तु, रुपनदेही, नारायणघाट सहित नेपालगंज जैसे नेपाल के कई शहरों में चीन बड़े बाजार खोलने की तैयारी में है। इसका मुख्य मकसद विकास के जरिये तराई में मजबूत पकड़ बनाना है।
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