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सात मौतों के दर्द से कराह रहा महला गांव
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शोहरतगढ़ क्षेत्र महला गांव में मृतकों को शव पहुंचने पर लगी ग्रामीणों की भीड़। संवाद
- फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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सात मौतों के दर्द से कराह रहा महला गांव
शादी के घर में मातम, गांव में हर चार घर के बाद चीखते दिखे परिवार
शोहरतगढ़ थाना क्षेत्र के महला और चिल्हिया थाना क्षेत्र के कम्हरिया गांव में छाया रहा मातम
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर/शोहरतगढ़। शोहरतगढ़ का महला गांव सात मौतों के दर्द से कराह रहा है। शनिवार की काली रात यह गांव कभी नहीं भूल पाएगा। जैसे ही सूरज निकला लोग पीड़ित परिवारों को ढांढस बंधाने पहुंचे। लोगों को देखकर उनकी चीख-पुकार तेज हो गई। इस हादसे ने किसी के लाल को छीन लिया तो किसी का सुहाग चला गया। किसी के पिता तो किसी बहन का भाई चला गया।
महला गांव में शनिवार को बरात निकलते समय शनिवार को जहां खुशियों का माहौल था। वहां शनिवार रात दो बजे के बाद गम का माहौल हो गया। सुबह होते-होते हर तरफ चीख-पुकार की आवाजें उठ रहीं थीं। हर गली में महिलाएं और बच्चे अपनों को खोने के गम में बिलख रहे थे। हादसे में एक साथ, एक ही गांव के छह लोगों की जान जाने की खबर ने क्षेत्र के लोगों को भी सदमे में डाल दिया। गांव पहुंचने वाले हर शख्स की आंखे रोने-बिलखने का दृश्य देखकर नम हो जा रहीं थीं। इसके साथ ही पड़ोस के खम्हरिया गांव निवासी एक व्यक्ति की इसी हादसे में मौत से वहां पर मातम जैसा माहौल था।
शोहरतगढ़ थाना क्षेत्र के महला गांव में छह और खम्हरिया में एक घर के परिजनों की चीत्कार से गांव समेत आसपास के गांवों में मातम पसर गया। महला निवासी मृतक कमलेश उर्फ पिंटू (36) की पत्नी रीमा देवी, माता सुशीला देवी, पिता शिवपूजन, भाई राकेश, अखिलेश, दुर्गेंश सड़क हादसे में हुए मौत की खबर सुनकर रोते-बिलखते रहे। उनकी पत्नी रो-रोकर बेहोश हो जा रही थीं। मृतक कमलेश के तीन बच्चे सलोनी (6) आयुष (3) और एक वर्षीय लाडो मां रीमा देवी को बेहोशी हालत में देखकर चिल्ला रहे थे। कमलेश दिल्ली व मुंबई जा कर दिहाड़ी मजदूरी और खेती के समय खेती करता था। एक महीना पहले गांव आया था। वहीं, मृतक मुकेश पाल (35) की पत्नी बीना, पिता विभूति पाल, भाई गोरख, पुत्र बालकेश्वर (7) शैलेश कुमार (11) सड़क हादसे की खबर सुनकर दहाड़ें मारकर रोने लगे। मुकेश घर पर रह कर खेती-बारी करते थे। मृतक रवि पासवान (18) के घर वाले बिलख रहे थे। सड़क हादसे की खबर मिलते ही पिता राजाराम पासवान, माता विलायती रोने-बिलखने लगीं। रोते हुए मां कहती रही कि बेटा बरात में न जा। मेरे रोकने के बाद भी नहीं माना। अगर न गया होता तो ये बुरा दिन नहीं आता। अब मेरा बेटे कहां है? कोई उसे क्यों बुला नहीं रहा है। यह कह-कह कर मां बेहोश हो जा रही थी। मृतक रवि ने इंटर की परीक्षा दी है। एक भाई अजय है, जो अभी पढ़ रहा है। शिवसागर (14) के घर पर लोगों की भीड़ रही। रात में ही सड़क हादसे में मौत की खबर सुनकर मां अकाली, पिता प्रभुनाथ, भाई गोविंद, कैलाश और बहन चांदनी व बबली दहाड़ें मारकर रोने-बिलखने लगीं। शिवसागर अभी पढ़ रहा था। उससे परिवार को बहुत उम्मीदें थीं लेकिन हादसे में उसकी जान चली गई। वहीं, लाल चन्द्र (26) घर पहुंचे तो इधर-उधर लोग रोते हुए दिखे। मौत की खबर सुनने के बाद पत्नी सबिता, मां आरती, पिता फूलचंद, भाई दीपचंद्र, दीपक और कन्हैया रोने-बिलखने लगे। पत्नी साबिता रोते-रोते कई घंटों तक बेहोश रही। उसके गोद में तीन माह के पुत्र छोटू और तीन वर्षीय आयुष मां के पास बैठकर कर चीख रहे थे। ग्रामीण तीन माह के बच्चे को गोद में उठाकर उसे चुप करा रहे थे। लालचंद घर रह कर खेती और दिहाड़ी मजदूरी करते थे। परिवार को चलाने में उनका अहम योगदान था। उनकी मौत के बाद परिवार बेसहारा हो गया।
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सचिन पाल (13) के घर भी भयावह दृश्य था। घर के सामने भीड़ एकत्र थी। मौत की खबर सुनकर मां दुर्गावती, पिता कृपानाथ, बहन सोनी रोने-बिलखने लगीं। मृतक का एक भाई विपिन (11) है। सचिन अभी पढ़ रहा था, जबकि चिल्हिया थाना क्षेत्र के खम्हरिया निवासी गोरख प्रसाद (42) की सड़क हादसे में मौत की खबर सुनने के बाद पत्नी अर्चना, पिता रामसहाय, बेटी रुपाली (16), ज्योति (14), महिमा (12) और बेटा दिव्यांश (11) आयुष (6) रोने-बिलखने लगे। मृतक गोरख अपने मां-बाप के इकलौते थे। इनके पिता रामसहाय इंटर कॉलेज में अध्यापक थे, जो सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इन्होंने गोरख के लिए एक किराने की दुकान खोलवा दी थी। सड़क हादसे के समय गोरख ही बोलेरो चला रहे थे। वह उनका निजी वाहन था। किराया पर चलाने का कार्य करता था। बरात भी किराए पर ले जाने के लिए पहले ही सट्टा बांध रखा था। मौत की खबर पाकर पूरा गांव गोरख के घर पर पहुंचा। उन्हें सांत्वना देने वाले भी अपनी आंसू नहीं रोक पा रहे थे।
मौत बनकर आई थी झपकी
हादसे में बचे चार लोग भी लड़ रहे हैं जिंदगी से जंग
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। एक झपकी हमेशा के लिए सात लोगों मौत की नींद सुला देगी, यह किसी ने सोचा भी नहीं था। हादसे में सात की जान चली गई तो वहीं, चार अब भी जिंदगी के लिए जंग लड़ रहे हैं। बांसी-बस्ती एनएच पर स्थित कटया गांव के पास हुए हादसे को देखने के बाद राह से गुजरने वाला हर व्यक्ति वहां रुकने पर विवश था। वहीं, हादसे के बाद मौके पर मौजूद लोग पूरे दिन चर्चा करते रहे।
सुबह घटनास्थल पर मौजूद कटया और सोनवल गांव के कुछ ग्रामीण यह कहते दिखे कि हादसे का कारण झपकी थी। क्योंकि जब पुलिस रात में घटना स्थल पर पहुंचकर घायलों को बाहर निकाल रही थी तो उसमें एक युवक, जिसे थोड़ी कम चोट आई थी। वह बार-बार यही कह रहा था। बोलेरो में सवार सभी लोगों को नींद आ रही थी। गाड़ी रोककर मुंह धुलने की बात हुई। नींद में आई झपकी और जल्द घर पहुंचने की कोशिश में यह घटना घटित हुई। मौके पर मौजूद गांव वालों की भी जुबान पर यही लफ्ज थे कि जल्दबाजी और नींद में ही यह हादसा हुआ क्योंकि ट्रेलर सड़क के किनारे खड़ा था और सड़क भी रात में खाली थी। ऐसे में पीछे से आकर घुस जाना, यह नींद आने पर ही हो सकता है। एक झपकी ने सात लोगों की जान ले ली।
फंसे शव को निकालने में लगा आधा घंटा
रफ्तार तेज होने के कारण बोलेरो ट्रेलर में पीछे से जिस प्रकार से घुसी है। उससे देखकर यह अंदाजा लगा पाना मुश्किल था गति कितनी तेज रही होगी, क्योंकि ट्रेलर के पीछे का लोहे का इंगल तोड़ते हुए बोलेरो तीन से चार फीट अंदर घुस गई थी। बोलेरो पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुकी थी। पहले पुलिस कर्मियों ने शव को बाहर निकालने की कोशिश की लेकिन जब सफल नहीं हुए तो क्रेन से गाड़ी को बाहर खिंचवाया। आधा घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद किसी तरह पार्ट तोड़कर शव को बाहर निकाला गया। खून और क्षत-विक्षत चेहरे देखने के बाद गांव के लोग पीछे हट गए। पुलिस कर्मियों ने बड़ी मशक्कत के बाद एक-एक करके चार लोगों के शवों को बाहर निकाला। इसके बाद उन्हें पोस्टमार्टम हाउस भेजवाया।
पुलिस के साथ ग्रामीणों ने भी दिखाई मानवता
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक जोगिया कोतवाली पुलिस ने हादसे में बड़ी तत्परता दिखाई। एसएसबी जवानों ने पुलिस को सूचना दी तो जोगिया के प्रभारी कोतवाल राजेश कुमार शुक्ल टीम के साथ मौके पर पहुंचे तो स्थानीय लोग जान बचाने में जुटे थे। सबसे पहले पीछे हिस्से में घायल पड़े लोगों को बाहर निकलवाया और पुलिस कर्मियों के साथ जिला अस्पताल भेजवा दिया। पुलिस की तत्परता से ही चार लोग समय से अस्पताल पहुंच पाए। अगर थोड़ी भी देरी हुई होती तो घायलों की स्थिति और गंभीर हो सकती थी। वहीं, जोगिया पुलिस के पहुंचने के कुछ ही देर बाद सदर थाने से भी पुलिस टीम पहुंच गई थी।
हादसे की जानकारी मिलने के बाद पहुंचने लगे नेता
हादसे की जानकारी मिलने के बाद जिला अस्पताल पर नेताओं की भीड़ लगने लगी। दोपहर में सदर विधायक श्यामधनी राही के प्रतिनिधि सत्यप्रकाश राही, सांसद प्रतिनिधि सूर्यप्रकाश पांडेय, जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि उपेंद्र प्रताप सिंह सहित अन्य नेता अस्पताल पहुंचे। वहीं, पोस्टमार्टम हाउस पर सांसद जगदंबिका पाल, शोहरतगढ़ से विधायक विनय वर्मा के प्रतिनिधि भी मौके पर मौजूद रहे।
अस्पताल पहुंचकर एसपी ने ली जानकारी
एसपी डॉ. यशवीर सिंह सुबह लगभग आठ बजे जिला अस्पताल पहुंचे। यहां पर घायल शुभम और उसके परिवार के लोगों से मिले। उनका हाल जाना और हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। इसके बाद वह घटनास्थल पर कटया गांव पहुंचे। यहां जायजा लिया। इसके बाद क्षतिग्रस्त हाल में पड़ी बोलेरो को क्रेन से तत्काल हटवाया।
गम में गुम हुई शहनाई, रुक गई बेटी की विदाई
हादसे की जानकारी मिलने के बाद लड़की के घर मातम, बराती रात में चल पड़े गांव
कुछ देर रुकी रही शादी, फिर गम के माहौल में पूरी हुई रस्म
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर/पथरा बाजार। शिवनगर डिडई थाना क्षेत्र के महुआ गांव में हादसे में बरातियों की मौत की खबर लगी तो हृदयविदारक हादसे के गम में शादी की शहनाई की शोर गुम हो गया। खबर मिलते ही जहां खुशियां थीं। वहां गम छा गया। शादी की रस्म रुक गई। कुछ देर बाद शादी शुरू हुई और गम के बीच दूल्हा और दुल्हन ने फेरे लिए, लेकिन बिटिया की विदाई रुक गई। वहीं, हादसे की जानकारी मिलते ही दूल्हा और उसके पिता के अलावा सभी लोग रात में ही गांव के लिए निकले पड़े।
पथरा थाना क्षेत्र के धरमपुरवा गांव के टोला के महुआ निवासी शोमनाथ गौड़ की पुत्री रेनू की शादी शनिवार को थी। शोहरतगढ़ थाना क्षेत्र के महला गांव से बरात रात नौ बजे के आसपास पहुंची। बरात पहुंचने पर लड़की पक्ष के लोगों ने जल-पान, नाश्ता कराने के बाद तिलक चढ़ाया और 11 बजे द्वार पूजा शुरू हुई। लगभग 12 बजे द्वार पूजा खत्म हुई। खाना खाने के बाद कई लोग वाहन से घर के लिए निकल पड़े। महुआ गांव के लोगों ने बताया कि सभी बराती 13 बोलेरो से आए थे। चार-पांच बोलेरो छोड़कर और सभी गाड़ियां रात में ही बरातियों को लेकर वापस चली गईं। इसके बाद शादी की प्रक्रिया शुरू हुई ही थी कि घटना की सूचना बरातियों को मिली तो दूल्हे व उसके पिता के अलावा इक्का-दुक्का ही लोग बचे। शेष लोग रात में ही घर निकल पड़े।
बगैर दुल्हन के ही लौटा दूल्हा
इधर, शादी के सात फेरे शुरू हुए, उधर, बरातियों की मौत की खबर सुनकर शादी की खुशियां मातम में बदल र्गइं। लोगों की समझ में कुछ नहीं आ रहा था कि क्या किया जाए। अंत में बगैर वैवाहिक गीत के साधारण रूप से शादी संपन्न हुई। शादी संपन्न होने के बाद लड़की और लड़के पक्ष के लोगों ने हादसे की वजह से दुल्हन की विदाई नहीं करने का प्रस्ताव रखा। इसके बाद दूल्हा बगैर दुल्हन के वापस चला गया। इस मौके हर किसी की आंखें नम थीं।
एनएच पर वाहन खड़ा करना खतरनाक
किसी भी नेशनल हाईवे पर वाहनों को खड़ा करके छोड़ नहीं सकते हैं। इस मार्ग पर केवल वाहन से चल सकते हैं। अगर वाहन खड़ा करते हैं तो यह नियम के विरुद्ध है। ऐसी दशा में कार्रवाई हो सकती है। अगर किन्हीं परिस्थितियों में वाहन खराब हो जाता है या फिर दुर्घटनाग्रस्त हो जाता है तो तत्काल उसे क्रेन और अन्य माध्यम से सड़क से हटवा दें। अगर ऐसा नहीं करते हैं तो कार्रवाई के दायरे में आएंगे।
-आशुतोष कुमार शुक्ल, एआरटीओ सिद्धार्थनगर
बोले एनएच के जिम्मेदार
अगर एनएच पर कहीं कोई गाड़ी खराब या दुर्घटनाग्रस्त होती है तो यह एनएच के कर्मचारी ही देखते हैं। इसके अलावा अगर किसी को पुलिस एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड की आवश्यकता पड़ती है तो यह हम लोग करते हैं। उन्हें सूचना देकर मौके पर बुलाएंगे और समस्या का निस्तारण कराएंगे। 1033 हेल्पलाइन पर फोन करके कोई भी व्यक्ति हाईवे पर वाहन खड़ा करने की शिकायत कर सकता है।
-राजेश गुप्ता, मैनेजर एनएच-28, बेलगड़ी टोल प्लाजा, सिद्धार्थनगर
पीएम मोदी ने जताया शोक
सिद्धार्थनगर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिले में शनिवार देर रात हुए सड़क हादसे में सात लोगों की मौत पर शोक संवेदना व्यक्त की है। पीएम ने अपने ट्विटर हैंडल पर शोक व्यक्त करते हुए घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की है। पीएमओ ने मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये एवं घायलों को 50-50 हजार रुपये मदद की घोषणा की है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने मृतकों के प्रति शोक संवदेना व्यक्त करते हुए दुर्घटना में घायलों को समुचित उपचार कराने के निर्देश दिए हैं। संवाद
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शादी के घर में मातम, गांव में हर चार घर के बाद चीखते दिखे परिवार
शोहरतगढ़ थाना क्षेत्र के महला और चिल्हिया थाना क्षेत्र के कम्हरिया गांव में छाया रहा मातम
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर/शोहरतगढ़। शोहरतगढ़ का महला गांव सात मौतों के दर्द से कराह रहा है। शनिवार की काली रात यह गांव कभी नहीं भूल पाएगा। जैसे ही सूरज निकला लोग पीड़ित परिवारों को ढांढस बंधाने पहुंचे। लोगों को देखकर उनकी चीख-पुकार तेज हो गई। इस हादसे ने किसी के लाल को छीन लिया तो किसी का सुहाग चला गया। किसी के पिता तो किसी बहन का भाई चला गया।
महला गांव में शनिवार को बरात निकलते समय शनिवार को जहां खुशियों का माहौल था। वहां शनिवार रात दो बजे के बाद गम का माहौल हो गया। सुबह होते-होते हर तरफ चीख-पुकार की आवाजें उठ रहीं थीं। हर गली में महिलाएं और बच्चे अपनों को खोने के गम में बिलख रहे थे। हादसे में एक साथ, एक ही गांव के छह लोगों की जान जाने की खबर ने क्षेत्र के लोगों को भी सदमे में डाल दिया। गांव पहुंचने वाले हर शख्स की आंखे रोने-बिलखने का दृश्य देखकर नम हो जा रहीं थीं। इसके साथ ही पड़ोस के खम्हरिया गांव निवासी एक व्यक्ति की इसी हादसे में मौत से वहां पर मातम जैसा माहौल था।
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शोहरतगढ़ थाना क्षेत्र के महला गांव में छह और खम्हरिया में एक घर के परिजनों की चीत्कार से गांव समेत आसपास के गांवों में मातम पसर गया। महला निवासी मृतक कमलेश उर्फ पिंटू (36) की पत्नी रीमा देवी, माता सुशीला देवी, पिता शिवपूजन, भाई राकेश, अखिलेश, दुर्गेंश सड़क हादसे में हुए मौत की खबर सुनकर रोते-बिलखते रहे। उनकी पत्नी रो-रोकर बेहोश हो जा रही थीं। मृतक कमलेश के तीन बच्चे सलोनी (6) आयुष (3) और एक वर्षीय लाडो मां रीमा देवी को बेहोशी हालत में देखकर चिल्ला रहे थे। कमलेश दिल्ली व मुंबई जा कर दिहाड़ी मजदूरी और खेती के समय खेती करता था। एक महीना पहले गांव आया था। वहीं, मृतक मुकेश पाल (35) की पत्नी बीना, पिता विभूति पाल, भाई गोरख, पुत्र बालकेश्वर (7) शैलेश कुमार (11) सड़क हादसे की खबर सुनकर दहाड़ें मारकर रोने लगे। मुकेश घर पर रह कर खेती-बारी करते थे। मृतक रवि पासवान (18) के घर वाले बिलख रहे थे। सड़क हादसे की खबर मिलते ही पिता राजाराम पासवान, माता विलायती रोने-बिलखने लगीं। रोते हुए मां कहती रही कि बेटा बरात में न जा। मेरे रोकने के बाद भी नहीं माना। अगर न गया होता तो ये बुरा दिन नहीं आता। अब मेरा बेटे कहां है? कोई उसे क्यों बुला नहीं रहा है। यह कह-कह कर मां बेहोश हो जा रही थी। मृतक रवि ने इंटर की परीक्षा दी है। एक भाई अजय है, जो अभी पढ़ रहा है। शिवसागर (14) के घर पर लोगों की भीड़ रही। रात में ही सड़क हादसे में मौत की खबर सुनकर मां अकाली, पिता प्रभुनाथ, भाई गोविंद, कैलाश और बहन चांदनी व बबली दहाड़ें मारकर रोने-बिलखने लगीं। शिवसागर अभी पढ़ रहा था। उससे परिवार को बहुत उम्मीदें थीं लेकिन हादसे में उसकी जान चली गई। वहीं, लाल चन्द्र (26) घर पहुंचे तो इधर-उधर लोग रोते हुए दिखे। मौत की खबर सुनने के बाद पत्नी सबिता, मां आरती, पिता फूलचंद, भाई दीपचंद्र, दीपक और कन्हैया रोने-बिलखने लगे। पत्नी साबिता रोते-रोते कई घंटों तक बेहोश रही। उसके गोद में तीन माह के पुत्र छोटू और तीन वर्षीय आयुष मां के पास बैठकर कर चीख रहे थे। ग्रामीण तीन माह के बच्चे को गोद में उठाकर उसे चुप करा रहे थे। लालचंद घर रह कर खेती और दिहाड़ी मजदूरी करते थे। परिवार को चलाने में उनका अहम योगदान था। उनकी मौत के बाद परिवार बेसहारा हो गया।
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सचिन पाल (13) के घर भी भयावह दृश्य था। घर के सामने भीड़ एकत्र थी। मौत की खबर सुनकर मां दुर्गावती, पिता कृपानाथ, बहन सोनी रोने-बिलखने लगीं। मृतक का एक भाई विपिन (11) है। सचिन अभी पढ़ रहा था, जबकि चिल्हिया थाना क्षेत्र के खम्हरिया निवासी गोरख प्रसाद (42) की सड़क हादसे में मौत की खबर सुनने के बाद पत्नी अर्चना, पिता रामसहाय, बेटी रुपाली (16), ज्योति (14), महिमा (12) और बेटा दिव्यांश (11) आयुष (6) रोने-बिलखने लगे। मृतक गोरख अपने मां-बाप के इकलौते थे। इनके पिता रामसहाय इंटर कॉलेज में अध्यापक थे, जो सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इन्होंने गोरख के लिए एक किराने की दुकान खोलवा दी थी। सड़क हादसे के समय गोरख ही बोलेरो चला रहे थे। वह उनका निजी वाहन था। किराया पर चलाने का कार्य करता था। बरात भी किराए पर ले जाने के लिए पहले ही सट्टा बांध रखा था। मौत की खबर पाकर पूरा गांव गोरख के घर पर पहुंचा। उन्हें सांत्वना देने वाले भी अपनी आंसू नहीं रोक पा रहे थे।
मौत बनकर आई थी झपकी
हादसे में बचे चार लोग भी लड़ रहे हैं जिंदगी से जंग
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। एक झपकी हमेशा के लिए सात लोगों मौत की नींद सुला देगी, यह किसी ने सोचा भी नहीं था। हादसे में सात की जान चली गई तो वहीं, चार अब भी जिंदगी के लिए जंग लड़ रहे हैं। बांसी-बस्ती एनएच पर स्थित कटया गांव के पास हुए हादसे को देखने के बाद राह से गुजरने वाला हर व्यक्ति वहां रुकने पर विवश था। वहीं, हादसे के बाद मौके पर मौजूद लोग पूरे दिन चर्चा करते रहे।
सुबह घटनास्थल पर मौजूद कटया और सोनवल गांव के कुछ ग्रामीण यह कहते दिखे कि हादसे का कारण झपकी थी। क्योंकि जब पुलिस रात में घटना स्थल पर पहुंचकर घायलों को बाहर निकाल रही थी तो उसमें एक युवक, जिसे थोड़ी कम चोट आई थी। वह बार-बार यही कह रहा था। बोलेरो में सवार सभी लोगों को नींद आ रही थी। गाड़ी रोककर मुंह धुलने की बात हुई। नींद में आई झपकी और जल्द घर पहुंचने की कोशिश में यह घटना घटित हुई। मौके पर मौजूद गांव वालों की भी जुबान पर यही लफ्ज थे कि जल्दबाजी और नींद में ही यह हादसा हुआ क्योंकि ट्रेलर सड़क के किनारे खड़ा था और सड़क भी रात में खाली थी। ऐसे में पीछे से आकर घुस जाना, यह नींद आने पर ही हो सकता है। एक झपकी ने सात लोगों की जान ले ली।
फंसे शव को निकालने में लगा आधा घंटा
रफ्तार तेज होने के कारण बोलेरो ट्रेलर में पीछे से जिस प्रकार से घुसी है। उससे देखकर यह अंदाजा लगा पाना मुश्किल था गति कितनी तेज रही होगी, क्योंकि ट्रेलर के पीछे का लोहे का इंगल तोड़ते हुए बोलेरो तीन से चार फीट अंदर घुस गई थी। बोलेरो पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुकी थी। पहले पुलिस कर्मियों ने शव को बाहर निकालने की कोशिश की लेकिन जब सफल नहीं हुए तो क्रेन से गाड़ी को बाहर खिंचवाया। आधा घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद किसी तरह पार्ट तोड़कर शव को बाहर निकाला गया। खून और क्षत-विक्षत चेहरे देखने के बाद गांव के लोग पीछे हट गए। पुलिस कर्मियों ने बड़ी मशक्कत के बाद एक-एक करके चार लोगों के शवों को बाहर निकाला। इसके बाद उन्हें पोस्टमार्टम हाउस भेजवाया।
पुलिस के साथ ग्रामीणों ने भी दिखाई मानवता
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक जोगिया कोतवाली पुलिस ने हादसे में बड़ी तत्परता दिखाई। एसएसबी जवानों ने पुलिस को सूचना दी तो जोगिया के प्रभारी कोतवाल राजेश कुमार शुक्ल टीम के साथ मौके पर पहुंचे तो स्थानीय लोग जान बचाने में जुटे थे। सबसे पहले पीछे हिस्से में घायल पड़े लोगों को बाहर निकलवाया और पुलिस कर्मियों के साथ जिला अस्पताल भेजवा दिया। पुलिस की तत्परता से ही चार लोग समय से अस्पताल पहुंच पाए। अगर थोड़ी भी देरी हुई होती तो घायलों की स्थिति और गंभीर हो सकती थी। वहीं, जोगिया पुलिस के पहुंचने के कुछ ही देर बाद सदर थाने से भी पुलिस टीम पहुंच गई थी।
हादसे की जानकारी मिलने के बाद पहुंचने लगे नेता
हादसे की जानकारी मिलने के बाद जिला अस्पताल पर नेताओं की भीड़ लगने लगी। दोपहर में सदर विधायक श्यामधनी राही के प्रतिनिधि सत्यप्रकाश राही, सांसद प्रतिनिधि सूर्यप्रकाश पांडेय, जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि उपेंद्र प्रताप सिंह सहित अन्य नेता अस्पताल पहुंचे। वहीं, पोस्टमार्टम हाउस पर सांसद जगदंबिका पाल, शोहरतगढ़ से विधायक विनय वर्मा के प्रतिनिधि भी मौके पर मौजूद रहे।
अस्पताल पहुंचकर एसपी ने ली जानकारी
एसपी डॉ. यशवीर सिंह सुबह लगभग आठ बजे जिला अस्पताल पहुंचे। यहां पर घायल शुभम और उसके परिवार के लोगों से मिले। उनका हाल जाना और हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। इसके बाद वह घटनास्थल पर कटया गांव पहुंचे। यहां जायजा लिया। इसके बाद क्षतिग्रस्त हाल में पड़ी बोलेरो को क्रेन से तत्काल हटवाया।
गम में गुम हुई शहनाई, रुक गई बेटी की विदाई
हादसे की जानकारी मिलने के बाद लड़की के घर मातम, बराती रात में चल पड़े गांव
कुछ देर रुकी रही शादी, फिर गम के माहौल में पूरी हुई रस्म
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर/पथरा बाजार। शिवनगर डिडई थाना क्षेत्र के महुआ गांव में हादसे में बरातियों की मौत की खबर लगी तो हृदयविदारक हादसे के गम में शादी की शहनाई की शोर गुम हो गया। खबर मिलते ही जहां खुशियां थीं। वहां गम छा गया। शादी की रस्म रुक गई। कुछ देर बाद शादी शुरू हुई और गम के बीच दूल्हा और दुल्हन ने फेरे लिए, लेकिन बिटिया की विदाई रुक गई। वहीं, हादसे की जानकारी मिलते ही दूल्हा और उसके पिता के अलावा सभी लोग रात में ही गांव के लिए निकले पड़े।
पथरा थाना क्षेत्र के धरमपुरवा गांव के टोला के महुआ निवासी शोमनाथ गौड़ की पुत्री रेनू की शादी शनिवार को थी। शोहरतगढ़ थाना क्षेत्र के महला गांव से बरात रात नौ बजे के आसपास पहुंची। बरात पहुंचने पर लड़की पक्ष के लोगों ने जल-पान, नाश्ता कराने के बाद तिलक चढ़ाया और 11 बजे द्वार पूजा शुरू हुई। लगभग 12 बजे द्वार पूजा खत्म हुई। खाना खाने के बाद कई लोग वाहन से घर के लिए निकल पड़े। महुआ गांव के लोगों ने बताया कि सभी बराती 13 बोलेरो से आए थे। चार-पांच बोलेरो छोड़कर और सभी गाड़ियां रात में ही बरातियों को लेकर वापस चली गईं। इसके बाद शादी की प्रक्रिया शुरू हुई ही थी कि घटना की सूचना बरातियों को मिली तो दूल्हे व उसके पिता के अलावा इक्का-दुक्का ही लोग बचे। शेष लोग रात में ही घर निकल पड़े।
बगैर दुल्हन के ही लौटा दूल्हा
इधर, शादी के सात फेरे शुरू हुए, उधर, बरातियों की मौत की खबर सुनकर शादी की खुशियां मातम में बदल र्गइं। लोगों की समझ में कुछ नहीं आ रहा था कि क्या किया जाए। अंत में बगैर वैवाहिक गीत के साधारण रूप से शादी संपन्न हुई। शादी संपन्न होने के बाद लड़की और लड़के पक्ष के लोगों ने हादसे की वजह से दुल्हन की विदाई नहीं करने का प्रस्ताव रखा। इसके बाद दूल्हा बगैर दुल्हन के वापस चला गया। इस मौके हर किसी की आंखें नम थीं।
एनएच पर वाहन खड़ा करना खतरनाक
किसी भी नेशनल हाईवे पर वाहनों को खड़ा करके छोड़ नहीं सकते हैं। इस मार्ग पर केवल वाहन से चल सकते हैं। अगर वाहन खड़ा करते हैं तो यह नियम के विरुद्ध है। ऐसी दशा में कार्रवाई हो सकती है। अगर किन्हीं परिस्थितियों में वाहन खराब हो जाता है या फिर दुर्घटनाग्रस्त हो जाता है तो तत्काल उसे क्रेन और अन्य माध्यम से सड़क से हटवा दें। अगर ऐसा नहीं करते हैं तो कार्रवाई के दायरे में आएंगे।
-आशुतोष कुमार शुक्ल, एआरटीओ सिद्धार्थनगर
बोले एनएच के जिम्मेदार
अगर एनएच पर कहीं कोई गाड़ी खराब या दुर्घटनाग्रस्त होती है तो यह एनएच के कर्मचारी ही देखते हैं। इसके अलावा अगर किसी को पुलिस एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड की आवश्यकता पड़ती है तो यह हम लोग करते हैं। उन्हें सूचना देकर मौके पर बुलाएंगे और समस्या का निस्तारण कराएंगे। 1033 हेल्पलाइन पर फोन करके कोई भी व्यक्ति हाईवे पर वाहन खड़ा करने की शिकायत कर सकता है।
-राजेश गुप्ता, मैनेजर एनएच-28, बेलगड़ी टोल प्लाजा, सिद्धार्थनगर
पीएम मोदी ने जताया शोक
सिद्धार्थनगर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिले में शनिवार देर रात हुए सड़क हादसे में सात लोगों की मौत पर शोक संवेदना व्यक्त की है। पीएम ने अपने ट्विटर हैंडल पर शोक व्यक्त करते हुए घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की है। पीएमओ ने मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये एवं घायलों को 50-50 हजार रुपये मदद की घोषणा की है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने मृतकों के प्रति शोक संवदेना व्यक्त करते हुए दुर्घटना में घायलों को समुचित उपचार कराने के निर्देश दिए हैं। संवाद