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लॉकडाउन के बाद अब बाजार पर पितृपक्ष की मार
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लॉकडाउन के बाद बाजार पर पितृपक्ष का असर
बाजारों में सन्नाटा, दुकानदारों का खर्च निकालना भी मुश्किल
अमर उजाला ब्यूरो
डुमरियागंज। लॉकडाउन से कामकाज ठप होने से कारोबार को झटका लग गया था। अनलॉक होने पर दुकानें खुलीं तो कारोबारियों को कुछ राहत महसूस हुई। मगर पितृपक्ष में बाजारों में फिर से सन्नाटा पसर गया है। दुकानदार दिनभर बैठकर दुकानों पर ग्राहकों का इंतजार करते दिखाई दे रहे हैं। अब तो हालात यह हो गया हैं कि दुकान पर काम करने वाले कर्मचारियों का खर्च भी निकाल पाना मुश्किल हो गया है, जिससे व्यापारी परेशान हैं। मालूम हो कि पितृपक्ष में परंपरा के मुताबिक लोग नई चीजों के खरीदने या नया कार्य प्रारंभ करने से परहेज करते हैं। इस कारण बाजार की गतिविधियां भी ठप सी हो गई हैं। नगर के कपड़ा व्यवसायी प्रेमप्रकाश उर्फ बंटू गुप्ता ने कहा कि पहले लॉकडाउन की मार उसके बाद बाजार में आर्थिक मंदी और अब पितृपक्ष की मार सह रहे हैं। पूरे दिन दुकान पर बैठकर ग्राहक का इंतजार करना पड़ रहा है। शाम को यह सोचकर दुकान बंद करते हैं कि शायद कल ग्राहक आएंगे। किराना व्यवसायी बंशीधर उर्फ बोधे अग्रहरि ने कहा कि पहले जून तक सहालग तक अच्छी खासी बिक्री हो जाती थी। लेकिन इस साल कोरोना संक्रमण के कारण ग्राहक बाजार नहीं आ रहे हैं। बिजली का बिल, कर्मचारियों की मानदेय, घर के खर्चे जुटा पाना मुश्किल हो गया है।
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बाजारों में सन्नाटा, दुकानदारों का खर्च निकालना भी मुश्किल
अमर उजाला ब्यूरो
डुमरियागंज। लॉकडाउन से कामकाज ठप होने से कारोबार को झटका लग गया था। अनलॉक होने पर दुकानें खुलीं तो कारोबारियों को कुछ राहत महसूस हुई। मगर पितृपक्ष में बाजारों में फिर से सन्नाटा पसर गया है। दुकानदार दिनभर बैठकर दुकानों पर ग्राहकों का इंतजार करते दिखाई दे रहे हैं। अब तो हालात यह हो गया हैं कि दुकान पर काम करने वाले कर्मचारियों का खर्च भी निकाल पाना मुश्किल हो गया है, जिससे व्यापारी परेशान हैं। मालूम हो कि पितृपक्ष में परंपरा के मुताबिक लोग नई चीजों के खरीदने या नया कार्य प्रारंभ करने से परहेज करते हैं। इस कारण बाजार की गतिविधियां भी ठप सी हो गई हैं। नगर के कपड़ा व्यवसायी प्रेमप्रकाश उर्फ बंटू गुप्ता ने कहा कि पहले लॉकडाउन की मार उसके बाद बाजार में आर्थिक मंदी और अब पितृपक्ष की मार सह रहे हैं। पूरे दिन दुकान पर बैठकर ग्राहक का इंतजार करना पड़ रहा है। शाम को यह सोचकर दुकान बंद करते हैं कि शायद कल ग्राहक आएंगे। किराना व्यवसायी बंशीधर उर्फ बोधे अग्रहरि ने कहा कि पहले जून तक सहालग तक अच्छी खासी बिक्री हो जाती थी। लेकिन इस साल कोरोना संक्रमण के कारण ग्राहक बाजार नहीं आ रहे हैं। बिजली का बिल, कर्मचारियों की मानदेय, घर के खर्चे जुटा पाना मुश्किल हो गया है।