{"_id":"610d6ee88ebc3e311b0d2fd6","slug":"katan-start-of-rapti-river-siddharthnagar-news-gkp404656330","type":"story","status":"publish","title_hn":"राप्ती नदी का जलस्तर घटने से कटान तेज, दो रिहायशी मकान विलीन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
राप्ती नदी का जलस्तर घटने से कटान तेज, दो रिहायशी मकान विलीन
विज्ञापन
मन्नीजोत क्षेत्र में कटान करती राप्ती नदी। संवाद
- फोटो : SIDDHARTHNAGAR
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राप्ती नदी का जलस्तर घटने से कटान तेज, दो रिहायशी मकान विलीन
संवाद न्यूज एजेंसी
मन्नीजोत। राप्ती नदी के जलस्तर घटने के कारण कटान तेजी से हो रहा है। नदी किनारे बने दो रिहायशी मकानों को विलीन कर चुकी है। गांव के अस्तित्व पर खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों ने कटान को रोकने के लिए प्रबंध करने की मांग की है।
डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के पिकौरा गांव के दक्षिण पास से होकर जाने वाली राप्ती नदी का कटान इतना तेज हो रहा कि अब तक दो रिहायशी मकानों को अपने मे समाहित कर चुकी है। पिकौरा गांव निवासी प्रहलाद ने कहा कि गांव के मनोहर तथा सनोहर का रिहायशी मकान नदी में समाहित हो चुका है। अब तक सरकारी तंत्र नहीं पहुंचा।
गंगा सागर, सुक्खू, सोमई, राम औतार, बुद्धू, शिवप्रसाद, राकेश, द्वारपाल, अवधराम, लखन, त्रिलोकीनाथ, सोलई, नन्कू, ओम प्रकाश, बब्लू, रोहित का कहना है कि पिछले तीन दिन में लगभग तीन से चार मीटर की कटान हुई है, लगातार कटान से खेत नदी में तब्दील हो रही है। इस संबंध में अवर अभियंता कालिका प्रसाद ने कहा कि कुछ दिनों पूर्व मनरेगा से थोड़ा बहुत काम कराकर कटान रोकने का प्रयास किया गया था, मगर नहीं रुका। मौके पर देखकर कटान रोकने का उचित प्रबंध किया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
मन्नीजोत। राप्ती नदी के जलस्तर घटने के कारण कटान तेजी से हो रहा है। नदी किनारे बने दो रिहायशी मकानों को विलीन कर चुकी है। गांव के अस्तित्व पर खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों ने कटान को रोकने के लिए प्रबंध करने की मांग की है।
डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के पिकौरा गांव के दक्षिण पास से होकर जाने वाली राप्ती नदी का कटान इतना तेज हो रहा कि अब तक दो रिहायशी मकानों को अपने मे समाहित कर चुकी है। पिकौरा गांव निवासी प्रहलाद ने कहा कि गांव के मनोहर तथा सनोहर का रिहायशी मकान नदी में समाहित हो चुका है। अब तक सरकारी तंत्र नहीं पहुंचा।
विज्ञापन
गंगा सागर, सुक्खू, सोमई, राम औतार, बुद्धू, शिवप्रसाद, राकेश, द्वारपाल, अवधराम, लखन, त्रिलोकीनाथ, सोलई, नन्कू, ओम प्रकाश, बब्लू, रोहित का कहना है कि पिछले तीन दिन में लगभग तीन से चार मीटर की कटान हुई है, लगातार कटान से खेत नदी में तब्दील हो रही है। इस संबंध में अवर अभियंता कालिका प्रसाद ने कहा कि कुछ दिनों पूर्व मनरेगा से थोड़ा बहुत काम कराकर कटान रोकने का प्रयास किया गया था, मगर नहीं रुका। मौके पर देखकर कटान रोकने का उचित प्रबंध किया जाएगा।
विज्ञापन