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25 वर्ष बाद एक बार फिर से संचालित होंगे कांजी हाउस
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25 वर्ष बाद फिर से संचालित होंगे कांजी हाउस
1.70 करोड़ की लागत से नौ कांजी हाउस का होगा पुनरोद्धार
जिला पंचायत करा रहा निर्माण, छुट्टा पशुओं को मिलेगा आश्रय
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। जिले के विभिन्न स्थानों पर 25 वर्ष से बंद पड़े कांजी हाउस एक बार फिर से संचालित होंगे। जिला पंचायत की तरफ से 1.70 करोड़ रुपये से पूर्व में संचालित नौ कांजी हाउस की पुनरोद्धार किया जाएगा। इन कांजी हाउस के पुनरोद्धार होने से छुट्टा पशुओं को आश्रय मिलेगा।
जिला पंचायत की ओर से जिले में 12 स्थानों पर कांजी हाउस संचालित थे, जिनमें तब खेतों में फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले छुट्टा पशुओं को रखा जाता था। इसके संचालन का नियम था कि जब किसी पशुपालक का पशु कांजी हाउस पहुंचा दिया जाता था तो उसे छुड़ाने के लिए निर्धारित शुल्क वसूला जाता था। शुल्क से होने वाले धनोपार्जन से कांजी हाउस का संचालन और रखरखाव होता था। यह सभी कांजी हाउस पिछले 25 वर्ष से बंद पड़े हैं। अब जिला पंचायत ने इनमें से नौ कांजी हाउस के पुनर्निर्माण कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी हरिओम नारायण चंद का कहना है कि कांजी हाउस का पुनर्निर्माण कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जो पूर्ण कराकर फिर से संचालित किया जाएगा।
इन कांजी हाउस का होगा पुनर्निर्माण
जिला पंचायत की भूमि पर स्थित डुमरियागंज, इटवा, बिस्कोहर, कलनाखोर, कैथवलिया, सेखुई, उज्जैनिया, पतिला और देउरा बाजार के कांजी हाउस का पुनर्निर्माण किया जाएगा। इनमें उज्जैनिया और इटवा स्थित कांजी हाउस का सबसे अधिक 24-24 लाख रुपये और कलनाखोर में सबसे कम तीन लाख रुपये से पुनर्निर्माण किया जाएगा।
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तीन कांजी हाउस की भूमि है विवादित
जिला पंचायत के उसका, लोटन और सीकरी में स्थित कांजी हाउस की भूमि के संबंध में विवाद है, इसलिए इन स्थानों पर काजी हाउस का पुनर्निर्माण नहीं किया जा रहा है। जबकि डुमरियागंज, खेसरहा और बांसी क्षेत्र में स्थित कांजी हाउस में वर्तमान में अस्थायी गोशाला संचालित किया जा रहा है।
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1.70 करोड़ की लागत से नौ कांजी हाउस का होगा पुनरोद्धार
जिला पंचायत करा रहा निर्माण, छुट्टा पशुओं को मिलेगा आश्रय
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। जिले के विभिन्न स्थानों पर 25 वर्ष से बंद पड़े कांजी हाउस एक बार फिर से संचालित होंगे। जिला पंचायत की तरफ से 1.70 करोड़ रुपये से पूर्व में संचालित नौ कांजी हाउस की पुनरोद्धार किया जाएगा। इन कांजी हाउस के पुनरोद्धार होने से छुट्टा पशुओं को आश्रय मिलेगा।
जिला पंचायत की ओर से जिले में 12 स्थानों पर कांजी हाउस संचालित थे, जिनमें तब खेतों में फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले छुट्टा पशुओं को रखा जाता था। इसके संचालन का नियम था कि जब किसी पशुपालक का पशु कांजी हाउस पहुंचा दिया जाता था तो उसे छुड़ाने के लिए निर्धारित शुल्क वसूला जाता था। शुल्क से होने वाले धनोपार्जन से कांजी हाउस का संचालन और रखरखाव होता था। यह सभी कांजी हाउस पिछले 25 वर्ष से बंद पड़े हैं। अब जिला पंचायत ने इनमें से नौ कांजी हाउस के पुनर्निर्माण कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी हरिओम नारायण चंद का कहना है कि कांजी हाउस का पुनर्निर्माण कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जो पूर्ण कराकर फिर से संचालित किया जाएगा।
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इन कांजी हाउस का होगा पुनर्निर्माण
जिला पंचायत की भूमि पर स्थित डुमरियागंज, इटवा, बिस्कोहर, कलनाखोर, कैथवलिया, सेखुई, उज्जैनिया, पतिला और देउरा बाजार के कांजी हाउस का पुनर्निर्माण किया जाएगा। इनमें उज्जैनिया और इटवा स्थित कांजी हाउस का सबसे अधिक 24-24 लाख रुपये और कलनाखोर में सबसे कम तीन लाख रुपये से पुनर्निर्माण किया जाएगा।
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तीन कांजी हाउस की भूमि है विवादित
जिला पंचायत के उसका, लोटन और सीकरी में स्थित कांजी हाउस की भूमि के संबंध में विवाद है, इसलिए इन स्थानों पर काजी हाउस का पुनर्निर्माण नहीं किया जा रहा है। जबकि डुमरियागंज, खेसरहा और बांसी क्षेत्र में स्थित कांजी हाउस में वर्तमान में अस्थायी गोशाला संचालित किया जा रहा है।