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बारिश में कमी, कम हो सकता है कालानमक धान का रकबा
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काला नमक धान की खेती। संवाद
- फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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बारिश में कमी, कम हो सकता है कालानमक धान का रकबा
- एक जिला एक उत्पाद प्रोत्साहन योजना में शामिल है कालानमक
- बारिश नहीं होने से धान की रोपाई में हो रही देरी
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। जिले में बारिश नहीं होने से कालानमक धान की खेती का रकबा कम हो सकता है। कालानमक की सिंचाई में अधिक पानी की आवश्यकता पड़ती है। इधर बारिश नहीं होने की वजह से किसान धान की रोपाई करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।
कृषि विभाग के अनुसार कालानमक चावल को एक जिला एक उत्पाद प्रोत्साहन योजना में शामिल होने के बाद जिले में धान की खेती का रकबा बढ़ रहा है। पिछले वर्ष 12 हजार हेक्टेयर में धान की खेती हुई थी। इस बार बारिश कम होने के कारण किसानों ने जितने खेत में रोपाई की तैयारी की है, उससे कम रकबा में रोपाई की योजना बना रहे हैं।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार कालानमक प्रजाति का धान 145 दिन में तैयार होता है। कालानमक की रोपाई 10 जुलाई से 15 अगस्त तक होती है। नर्सरी तैयार हो गई है, लेकिन बारिश नहीं होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है।
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नहरों में पानी नहीं, सरकारी नलकूप खराब
जिले के नहरों में सिंचाई विभाग की ओर से पानी नहीं छोड़ा गया है। वहीं, सरकारी नलकूप भी खराब पड़े हैं। इस कारण किसानों को सिंचाई में दिक्कत हो रही है। जिला कृषि अधिकारी सीपी सिंह ने कहा कि बारिश के इंतजार में कालानमक धान की खेती पर असर पड़ा है। जिन किसानों के पास सिंचाई का साधन उपलब्ध है, वे रोपाई कर रहे हैं। 70 प्रतिशत धान की रोपाई नहीं हो सकी है। मानसून सीजन में 134.8 मिमी बारिश हुई है। बारिश में 58 प्रतिशत कमी है।
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- एक जिला एक उत्पाद प्रोत्साहन योजना में शामिल है कालानमक
- बारिश नहीं होने से धान की रोपाई में हो रही देरी
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। जिले में बारिश नहीं होने से कालानमक धान की खेती का रकबा कम हो सकता है। कालानमक की सिंचाई में अधिक पानी की आवश्यकता पड़ती है। इधर बारिश नहीं होने की वजह से किसान धान की रोपाई करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।
कृषि विभाग के अनुसार कालानमक चावल को एक जिला एक उत्पाद प्रोत्साहन योजना में शामिल होने के बाद जिले में धान की खेती का रकबा बढ़ रहा है। पिछले वर्ष 12 हजार हेक्टेयर में धान की खेती हुई थी। इस बार बारिश कम होने के कारण किसानों ने जितने खेत में रोपाई की तैयारी की है, उससे कम रकबा में रोपाई की योजना बना रहे हैं।
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कृषि विशेषज्ञों के अनुसार कालानमक प्रजाति का धान 145 दिन में तैयार होता है। कालानमक की रोपाई 10 जुलाई से 15 अगस्त तक होती है। नर्सरी तैयार हो गई है, लेकिन बारिश नहीं होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है।
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नहरों में पानी नहीं, सरकारी नलकूप खराब
जिले के नहरों में सिंचाई विभाग की ओर से पानी नहीं छोड़ा गया है। वहीं, सरकारी नलकूप भी खराब पड़े हैं। इस कारण किसानों को सिंचाई में दिक्कत हो रही है। जिला कृषि अधिकारी सीपी सिंह ने कहा कि बारिश के इंतजार में कालानमक धान की खेती पर असर पड़ा है। जिन किसानों के पास सिंचाई का साधन उपलब्ध है, वे रोपाई कर रहे हैं। 70 प्रतिशत धान की रोपाई नहीं हो सकी है। मानसून सीजन में 134.8 मिमी बारिश हुई है। बारिश में 58 प्रतिशत कमी है।