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जमील ही होंगे शोहरतगढ़ से बसपा प्रत्याशी
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 05 May 2016 11:13 PM IST
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राजनेतिक
- फोटो : अमर उजाला
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शोहरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याशी को लेकर बसपा का असमंजस खत्म हो गया है। हाथी पर सवार होने के 24 घंटे के भीतर ही बसपा ने जमील को महावत घोषित कर दिया।
बस्ती में जोनल कोऑर्डिनेटर लालजी वर्मा ने जमील के उम्मीदवारी की घोषणा करते हुए पार्टी कार्यकर्ताओं से उनके साथ जुड़ने की बात कही है।
जमील की उम्मीदवारी के बाद इस विधानसभा क्षेत्र में नए सियासी समीकरण बन गए हैं। वोटों की पुरानी गुणा-गणित फेल होने पर अब दिग्गज भी नए पासे बिछाने में जुट गए हैं। शुरू से ही साइकिल की सवारी करने वाले नगर पालिका चेयरमैन मो.जमील सिद्दीकी के शोहरतगढ़ से चुनाव लड़ने की सुगबुगाहट तो काफी पहले से ही थी, मगर पार्टी में पहले से ही मजबूत उम्मीदवार होने के कारण खुल कर अपनी इच्छा नहीं जाहिर कर पा रहे थे।
पार्टी में दाल गलती न देख जमील ने कड़े विरोध के बावजूद हाथी की सवारी कर ली। बुधवार को उन्हें शोहरतगढ़ में बसपा की सदस्यता दिलाई गई थी, अगले ही दिन उनकी उम्मीदवारी भी घोषित हो गई। जानकारों के मुताबिक जमील के नाम की घोषणा बुधवार को ही होनी थी, मगर कार्यकर्ताओं के गुस्से को भांपते हुए पदाधिकारियों ने मौन साधे रखा। बस्ती पहुंचते ही जोनल कोऑर्डिनेटर ने अपना फैसला सुना दिया। हालांकि इस फैसले के बाद भी बसपा में गतिरोध खत्म नहीं हुआ है। पार्टी का एक धड़ा अभी भी नाम के पुरजोर विरोध में जुटा हुआ है।
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बस्ती में जोनल कोऑर्डिनेटर लालजी वर्मा ने जमील के उम्मीदवारी की घोषणा करते हुए पार्टी कार्यकर्ताओं से उनके साथ जुड़ने की बात कही है।
जमील की उम्मीदवारी के बाद इस विधानसभा क्षेत्र में नए सियासी समीकरण बन गए हैं। वोटों की पुरानी गुणा-गणित फेल होने पर अब दिग्गज भी नए पासे बिछाने में जुट गए हैं। शुरू से ही साइकिल की सवारी करने वाले नगर पालिका चेयरमैन मो.जमील सिद्दीकी के शोहरतगढ़ से चुनाव लड़ने की सुगबुगाहट तो काफी पहले से ही थी, मगर पार्टी में पहले से ही मजबूत उम्मीदवार होने के कारण खुल कर अपनी इच्छा नहीं जाहिर कर पा रहे थे।
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पार्टी में दाल गलती न देख जमील ने कड़े विरोध के बावजूद हाथी की सवारी कर ली। बुधवार को उन्हें शोहरतगढ़ में बसपा की सदस्यता दिलाई गई थी, अगले ही दिन उनकी उम्मीदवारी भी घोषित हो गई। जानकारों के मुताबिक जमील के नाम की घोषणा बुधवार को ही होनी थी, मगर कार्यकर्ताओं के गुस्से को भांपते हुए पदाधिकारियों ने मौन साधे रखा। बस्ती पहुंचते ही जोनल कोऑर्डिनेटर ने अपना फैसला सुना दिया। हालांकि इस फैसले के बाद भी बसपा में गतिरोध खत्म नहीं हुआ है। पार्टी का एक धड़ा अभी भी नाम के पुरजोर विरोध में जुटा हुआ है।
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