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भारतीय थल सेनाध्यक्ष को महारथी सम्मान से नवाजेगी नेपाली सेना
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भारतीय थल सेनाध्यक्ष को महारथी सम्मान से नवाजेगी नेपाली सेना
रॉ चीफ के बाद थल सेनाध्यक्ष के नेपाल दौरे से संबंधों में मधुरता के कयास
चार नवंबर को नेपाल पहुंचेंगे भारतीय थल सेना अध्यक्ष मनोज मुकुंद नरवणे
अमर उजाला ब्यूरो
कपिलवस्तु/सिद्धार्थनगर। नेपाल सेना भारतीय थल सेना अध्यक्ष मनोज मुकुंद नवरणे को नेपाल सेना का सर्वोच्च कहा जाने वाला महारथी सम्मान से नवाजेगी। इसके लिए भारतीय थलसेना अध्यक्ष चार नवंबर को नेपाल पहुंच रहे हैं। दोनों देश के उच्च सैन्य अधिकारियों के बीच राय मशविरा के बाद यह तिथि तय हुई है। रॉ चीफ सामंत गोयल के बाद थलसेना प्रमुख का सम्मान किए जाने से दोनों देशों के बीच सामरिक और कूटनीतिक संबंधों में बेहतरी के कयास लगाए जा रहे हैं।
भारत और नेपाल के बीच भौगोलिक, सांस्कृतिक, सामरिक स्तर पर पैदा हुई गलतफहमियों को दूर करने के लिए दोनों ही देशों के उच्चाधिकारी प्रयासरत हैं। दोनों देशों के बीच उत्तराखंड के लिपुलेख, लिंपियाधुरा और कालापानी के क्षेत्र पर कब्जेदारी का विवाद बीते दो-तीन साल से चल रहा है। नेपाल न सिर्फ लिपुलेख, लिंपियाधुरा और कालापानी पर अपना दावा जता रहा है बल्कि इस क्षेत्र को अपने में समाहित करते हुए नया नक्शा भी जारी किया है। इधर, भारत ने इस क्षेत्र से मानसरोवर के प्रवेशद्वार तक सड़क निर्माण किया है। हाल ही में रॉ चीफ सामंत गोयल ने प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली से मुलाकात की थी। आरोप लगा था कि ओली ने रॉ प्रमुख से जिस कमरे में मुलाकात की उसमें नेपाल का पुराना नक्शा लगाया गया था। हालांकि ओली ने आरोप खारिज करते हुए नए नक्शे का छोटा प्रतिरूप लगाए जाने की सफाई दी थी। भारत के लिए सकारात्मक संकेतों के बीच अब थलसेना अध्यक्ष मनोज मुकुंद नरवणे की नेपाल यात्रा और उन्हें नेपाली सेना का सम्मान दिया जाना दोनों देशों के रिश्तों को मजबूती प्रदान किए जाने की कड़ी माना जा रहा है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि नेपाल दौरे पर जा रहे भारतीय थल सेनाध्यक्ष और नेपाल सेनाध्यक्ष के बीच सीमा प्रबंधन पर भी ठोस वार्ता होगी। भारतीय थल सेनाध्यक्ष नेपाल में और किन लोगों से मिलेंगे यह अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
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रॉ चीफ के बाद थल सेनाध्यक्ष के नेपाल दौरे से संबंधों में मधुरता के कयास
चार नवंबर को नेपाल पहुंचेंगे भारतीय थल सेना अध्यक्ष मनोज मुकुंद नरवणे
अमर उजाला ब्यूरो
कपिलवस्तु/सिद्धार्थनगर। नेपाल सेना भारतीय थल सेना अध्यक्ष मनोज मुकुंद नवरणे को नेपाल सेना का सर्वोच्च कहा जाने वाला महारथी सम्मान से नवाजेगी। इसके लिए भारतीय थलसेना अध्यक्ष चार नवंबर को नेपाल पहुंच रहे हैं। दोनों देश के उच्च सैन्य अधिकारियों के बीच राय मशविरा के बाद यह तिथि तय हुई है। रॉ चीफ सामंत गोयल के बाद थलसेना प्रमुख का सम्मान किए जाने से दोनों देशों के बीच सामरिक और कूटनीतिक संबंधों में बेहतरी के कयास लगाए जा रहे हैं।
भारत और नेपाल के बीच भौगोलिक, सांस्कृतिक, सामरिक स्तर पर पैदा हुई गलतफहमियों को दूर करने के लिए दोनों ही देशों के उच्चाधिकारी प्रयासरत हैं। दोनों देशों के बीच उत्तराखंड के लिपुलेख, लिंपियाधुरा और कालापानी के क्षेत्र पर कब्जेदारी का विवाद बीते दो-तीन साल से चल रहा है। नेपाल न सिर्फ लिपुलेख, लिंपियाधुरा और कालापानी पर अपना दावा जता रहा है बल्कि इस क्षेत्र को अपने में समाहित करते हुए नया नक्शा भी जारी किया है। इधर, भारत ने इस क्षेत्र से मानसरोवर के प्रवेशद्वार तक सड़क निर्माण किया है। हाल ही में रॉ चीफ सामंत गोयल ने प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली से मुलाकात की थी। आरोप लगा था कि ओली ने रॉ प्रमुख से जिस कमरे में मुलाकात की उसमें नेपाल का पुराना नक्शा लगाया गया था। हालांकि ओली ने आरोप खारिज करते हुए नए नक्शे का छोटा प्रतिरूप लगाए जाने की सफाई दी थी। भारत के लिए सकारात्मक संकेतों के बीच अब थलसेना अध्यक्ष मनोज मुकुंद नरवणे की नेपाल यात्रा और उन्हें नेपाली सेना का सम्मान दिया जाना दोनों देशों के रिश्तों को मजबूती प्रदान किए जाने की कड़ी माना जा रहा है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि नेपाल दौरे पर जा रहे भारतीय थल सेनाध्यक्ष और नेपाल सेनाध्यक्ष के बीच सीमा प्रबंधन पर भी ठोस वार्ता होगी। भारतीय थल सेनाध्यक्ष नेपाल में और किन लोगों से मिलेंगे यह अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
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