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Siddharthnagar News: राप्ती किनारे बढ़ी वन्यजीवों की चहल, मोर और हिरणों का नया बसेरा
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औराताल। डुमरियागंज तहसील क्षेत्र में राप्ती नदी का किनारा इन दिनों राष्ट्रीय पक्षी मोर और हिरणों का पसंदीदा ठिकाना बन गया है।औराताल क्षेत्र के अंतर्गत बनगाई, सुकरौली, बिलवट होते हुए बनकटा से सेहरी घाट तक राप्ती नदी का किनारा अब वन्यजीवों की सक्रियता का केंद्र बन गया है। जहां पहले गांवों में मोर कम ही दिखते थे, वहीं अब नदी किनारे इनकी अच्छी खासी मौजूदगी देखने को मिल रही है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार सुबह धूप निकलते ही मोर खेतों में टहलते नजर आते हैं।
बनगाई के सुनील यादव बताते हैं कि नदी किनारे की घनी झाड़ियों में मोरों ने अपना बसेरा बना लिया है और धूप निकलते ही वे बाहर निकलकर दाना चुगते और धूप सेंकते हैं। इसी तरह बिलवट गांव के विनय के अनुसार, राप्ती किनारे पेड़ों और झाड़ियों में करीब 10 से 12 मोर नियमित रूप से देखे जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि नदी किनारे उगी ऊंची घास और झाड़ियां न सिर्फ मोरों बल्कि हिरणों के लिए भी सुरक्षित आवास बन गई हैं हालांकि हिरणों की संख्या का सटीक अनुमान लगाना मुश्किल है।
ग्रामीणों का कहना है कि कुछ साल पहले इसी क्षेत्र में एक हिरण कुत्तों के हमले में घायल हो गया था, जिसे वन विभाग की टीम ने उपचार के लिए ले जाया था। इसके बाद से क्षेत्र में वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर जागरूकता भी बढ़ी है। सेहरी घाट के सुनील मिश्रा और बनकटा की खुशी पाठक बताती हैं कि उनके गांव के उत्तर दिशा में मोर और हिरण अक्सर दिखाई देते हैं। मोर कई बार घरों के पास तक आकर दाना चुगते हैं, जो ग्रामीणों के लिए आकर्षण का केंद्र बन जाते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि नदी किनारे का प्राकृतिक वातावरण, पर्याप्त भोजन और कम मानवीय हस्तक्षेप इन वन्यजीवों के लिए अनुकूल साबित हो रहा है।
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बनगाई के सुनील यादव बताते हैं कि नदी किनारे की घनी झाड़ियों में मोरों ने अपना बसेरा बना लिया है और धूप निकलते ही वे बाहर निकलकर दाना चुगते और धूप सेंकते हैं। इसी तरह बिलवट गांव के विनय के अनुसार, राप्ती किनारे पेड़ों और झाड़ियों में करीब 10 से 12 मोर नियमित रूप से देखे जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि नदी किनारे उगी ऊंची घास और झाड़ियां न सिर्फ मोरों बल्कि हिरणों के लिए भी सुरक्षित आवास बन गई हैं हालांकि हिरणों की संख्या का सटीक अनुमान लगाना मुश्किल है।
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ग्रामीणों का कहना है कि कुछ साल पहले इसी क्षेत्र में एक हिरण कुत्तों के हमले में घायल हो गया था, जिसे वन विभाग की टीम ने उपचार के लिए ले जाया था। इसके बाद से क्षेत्र में वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर जागरूकता भी बढ़ी है। सेहरी घाट के सुनील मिश्रा और बनकटा की खुशी पाठक बताती हैं कि उनके गांव के उत्तर दिशा में मोर और हिरण अक्सर दिखाई देते हैं। मोर कई बार घरों के पास तक आकर दाना चुगते हैं, जो ग्रामीणों के लिए आकर्षण का केंद्र बन जाते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि नदी किनारे का प्राकृतिक वातावरण, पर्याप्त भोजन और कम मानवीय हस्तक्षेप इन वन्यजीवों के लिए अनुकूल साबित हो रहा है।
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