{"_id":"580e3dfa4f1c1bcc75bc2694","slug":"in-the-silence-of-fierce-siddharth-in-lucknow","type":"story","status":"publish","title_hn":"लखनऊ में घमासान से सिद्धार्थनगर में सन्नाटा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लखनऊ में घमासान से सिद्धार्थनगर में सन्नाटा
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Mon, 24 Oct 2016 10:29 PM IST
विज्ञापन
सपा जिला कार्यालय पर पसरा सन्नाटा।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सिद्धार्थनगर। सपा में सोमवार को घमासान चरम पर रहा। बैठक भले ही पार्टी मुख्यालय पर चल रही थी, मगर जिले का सपाई खुद को उससे दूर नहीं रख पाया। भविष्य की चिंताओं के बीच दिनभर पार्टी कार्यालय और नेताओं की गतिविधियों की टोह लेने में जुटे रहे। कोई लखनऊ में जमे जिलाध्यक्ष, विधायक और अन्य पदाधिकारियों के संपर्क में था तो कई टीवी, इंटरनेट, वाट्सएप जैसे साधनों से पल-पल की खबर जानने में लगे रहे। पार्टी कार्यालय पर पूरी तरह छाए सन्नाटे में सपाइयों की बेचैनी साफ झलक रही थी।
जिले के बड़े नेताओं से लेकर विधायक तक कई दिनों से लखनऊ में जमे हुए हैं। पल-पल बदल रहे राजनीतिक घटनाक्रमों पर उनकी नजर है। यही हाल जिले के अन्य नेताओं व टिकट के दावेदारों का भी है। रविवार को चार कद्दावर मंत्रियों और उसके बदले राष्ट्रीय महासचिव की बर्खास्तगी के बाद से सबको सोमवार की बैठक का इंतजार था। सपा सुप्रीमो के नेतृत्व में बैठक शुरू होने के पहले से ही लोग पार्टी मुख्यालय से खुद को जोड़ने में जुट गए थे।
वहां मौजूद पदाधिकारियों, विधायकों से संपर्क साधते रहे। पूरे दिन वह टीवी, इंटरनेट और मोबाइल से भी लगातार जुड़े रहे। कब, कौन, क्या कर रहा है और उस पर प्रतिक्रियाएं क्या हो रही है, इसकी जानकारी जुटाते रहे। कार्यकर्ताओं को पार्टी के भविष्य के साथ अपने भविष्य की चिंता सता रही है। जिला कार्यालय पर पिछले कई दिनों से कोई हलचल नहीं है। यही हाल सदर विधायक विजय पासवान के पकड़ी स्थित कैंप कार्यालय का भी है। इटवा, डुमरियागंज, बांसी व शोहरतगढ़ का भी कमोबेश यही हाल है।
विज्ञापन
सत्ताधारी दल के अंतहीन हो चुके अंदरूनी झगड़े पर विपक्षी दलों के नेताओं की रुचि कम नहीं है। वे भी हर घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं और आगे सपा में क्या हो सकता है इसकी कयासबाजी में उलझे हुए हैं। उन्हें इस पूरे मामले में अपना फायदा साफ दिख रहा है।
विज्ञापन
जिले के बड़े नेताओं से लेकर विधायक तक कई दिनों से लखनऊ में जमे हुए हैं। पल-पल बदल रहे राजनीतिक घटनाक्रमों पर उनकी नजर है। यही हाल जिले के अन्य नेताओं व टिकट के दावेदारों का भी है। रविवार को चार कद्दावर मंत्रियों और उसके बदले राष्ट्रीय महासचिव की बर्खास्तगी के बाद से सबको सोमवार की बैठक का इंतजार था। सपा सुप्रीमो के नेतृत्व में बैठक शुरू होने के पहले से ही लोग पार्टी मुख्यालय से खुद को जोड़ने में जुट गए थे।
विज्ञापन
वहां मौजूद पदाधिकारियों, विधायकों से संपर्क साधते रहे। पूरे दिन वह टीवी, इंटरनेट और मोबाइल से भी लगातार जुड़े रहे। कब, कौन, क्या कर रहा है और उस पर प्रतिक्रियाएं क्या हो रही है, इसकी जानकारी जुटाते रहे। कार्यकर्ताओं को पार्टी के भविष्य के साथ अपने भविष्य की चिंता सता रही है। जिला कार्यालय पर पिछले कई दिनों से कोई हलचल नहीं है। यही हाल सदर विधायक विजय पासवान के पकड़ी स्थित कैंप कार्यालय का भी है। इटवा, डुमरियागंज, बांसी व शोहरतगढ़ का भी कमोबेश यही हाल है।
विज्ञापन
सत्ताधारी दल के अंतहीन हो चुके अंदरूनी झगड़े पर विपक्षी दलों के नेताओं की रुचि कम नहीं है। वे भी हर घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं और आगे सपा में क्या हो सकता है इसकी कयासबाजी में उलझे हुए हैं। उन्हें इस पूरे मामले में अपना फायदा साफ दिख रहा है।