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हत्या के मामले में चार को दस-दस वर्ष की सजा
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 06 Oct 2016 11:13 PM IST
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कोर्ट
- फोटो : डेमो फोटो
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सिद्धार्थनगर। उसका बाजार थाना क्षेत्र के उस्की गांव में वर्ष 2012 में हुए एक व्यक्ति के हत्या के मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश ने चार आरोपियों को 10-10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने उन पर 20-20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
थाना उसका बाजार के उस्की गांव निवासी अदालत ने आठ मार्च 2012 को थाने में तहरीर देकर चार लोगों के खिलाफ जानलेवा हमले का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया था। उसका आरोप था कि वह अपने खेत की रखवाली के लिए रात में खेत की ओर जा रहा था, इसी दौरान गंगाधपुर गांव निवासी मनोज व अन्य तीन लोगों ने उसे रोक लिया और तलाशी लेने लगे।
मना करने पर धारदार हथियार से हमला कर दिया। अभियोजन के अनुसार 12 दिन बाद 20 मार्च को अदालत की मौत हो गई थी। तहरीर के आधार पुलिस ने जांचकर आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया था। सत्य परीक्षण के दौरान अभियोजन पक्ष के शासकीय अधिवक्ता अखिलेश नरायन श्रीवास्तव ने 10 गवाह व कई अभिलेखीय साक्ष्य प्रस्तुत किया।
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न्यायाधीश अजय कुमार श्रीवास्तव ने साक्ष्य व दलीलों की पड़ताल के बाद हत्यारोपी मनोज, राधेश्याम उर्फ गुड्डन, माहिर व तुलसी को दोषी करार देते हुए 10-10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। प्रत्येक अभियुक्त पर 20 हजार रुपये के अर्थदंड का भी निर्देश दिया।
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थाना उसका बाजार के उस्की गांव निवासी अदालत ने आठ मार्च 2012 को थाने में तहरीर देकर चार लोगों के खिलाफ जानलेवा हमले का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया था। उसका आरोप था कि वह अपने खेत की रखवाली के लिए रात में खेत की ओर जा रहा था, इसी दौरान गंगाधपुर गांव निवासी मनोज व अन्य तीन लोगों ने उसे रोक लिया और तलाशी लेने लगे।
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मना करने पर धारदार हथियार से हमला कर दिया। अभियोजन के अनुसार 12 दिन बाद 20 मार्च को अदालत की मौत हो गई थी। तहरीर के आधार पुलिस ने जांचकर आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया था। सत्य परीक्षण के दौरान अभियोजन पक्ष के शासकीय अधिवक्ता अखिलेश नरायन श्रीवास्तव ने 10 गवाह व कई अभिलेखीय साक्ष्य प्रस्तुत किया।
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न्यायाधीश अजय कुमार श्रीवास्तव ने साक्ष्य व दलीलों की पड़ताल के बाद हत्यारोपी मनोज, राधेश्याम उर्फ गुड्डन, माहिर व तुलसी को दोषी करार देते हुए 10-10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। प्रत्येक अभियुक्त पर 20 हजार रुपये के अर्थदंड का भी निर्देश दिया।