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Siddharthnagar News: बारिश तो कहीं बिन बरसे गुजर गए बादल
Thu, 13 Aug 2026 11:02 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 13 Aug 2026 11:02 PM IST
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सिद्धार्थनगर। आसमान में बदली छाई। कहीं बूंदें गिरीं और कहीं बादल बिना बरसे ही गुजर गए। बृहस्पतिवार को जिले में मौसम का यही मिजाज रहा। कुछ हिस्सों में छिटपुट बारिश हुई लेकिन जिला मुख्यालय समेत कई इलाकों में धरती प्यासी रह गई। बारिश की फुहार से जहां कुछ देर के लिए उमस कम हुई वहीं तापमान 34 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना रहा। न्यूनतम तापमान में बुधवार के मुकाबले करीब दो डिग्री की कमी जरूर आई।
बारिश का असमान होना शहर से लेकर गांव तक असर दिखा रहा है। कहीं खेतों में पानी की जरूरत महसूस हो रही है तो कहीं किसान निजी संसाधनों से सिंचाई कर फसल बचाने में जुटे हैं। धान की फसल इस समय बढ़वार के महत्वपूर्ण चरण में है। ऐसे में बारिश का लंबा अंतराल किसानों की चिंता बढ़ा रहा है।इटवा क्षेत्र के बिस्कोहर, डेगहर और परसोहन सिवान में कई खेतों में बारिश का इंतजार है।
किसानों के अनुसार धान की फसल को इस समय खेत में पर्याप्त नमी चाहिए। बारिश नहीं होने पर निजी नलकूप और पंपिंग सेट से पानी देना पड़ रहा है। बिस्कोहर क्षेत्र के किसान भारत प्रसाद मिश्रा और गोमती आदि का कहना है कि धान की रोपाई के बाद अब फसल को पानी की जरूरत है। बारिश न होने पर बार-बार सिंचाई करनी पड़ रही है। छोटे किसानों के लिए अतिरिक्त सिंचाई का खर्च चिंता का कारण बन रहा है।
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प्रगतिशील किसान राम मूर्ति कहते हैं कि डीजल की कीमत, पंपसेट का खर्च और सिंचाई के लिए मजदूरी जोड़ने पर प्रति खेत लागत बढ़ रही है। किसानों की निगाह अब मौसम के अगले दौर पर टिकी हैं।
सामान्य से 31 फीसदी कम हुई बारिश : 10 अगस्त तक जिले में करीब 510 मिलीमीटर सामान्य बारिश होनी चाहिए थी लेकिन अब तक लगभग 350 मिलीमीटर ही वर्षा दर्ज हुई है। यानी सामान्य से करीब 160 मिलीमीटर यानी 31 प्रतिशत बारिश कम हुई है। पिछले वर्ष इसी अवधि में लगभग 520 मिलीमीटर बारिश हुई थी। इस लिहाज से इस बार पिछले साल के मुकाबले भी करीब 170 मिलीमीटर कम बारिश हुई है।
गर्मी में शरीर में पानी की कमी : मेडिकल कॉलेज के फिजीशियन डॉ. गौरव दुबे के अनुसार उमस और गर्मी के मौसम में शरीर से पानी और इलेक्ट्रोलाइट की कमी तेजी से हो सकती है। ऐसे में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, धूप में अनावश्यक निकलने से बचना चाहिए।
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बारिश का असमान होना शहर से लेकर गांव तक असर दिखा रहा है। कहीं खेतों में पानी की जरूरत महसूस हो रही है तो कहीं किसान निजी संसाधनों से सिंचाई कर फसल बचाने में जुटे हैं। धान की फसल इस समय बढ़वार के महत्वपूर्ण चरण में है। ऐसे में बारिश का लंबा अंतराल किसानों की चिंता बढ़ा रहा है।इटवा क्षेत्र के बिस्कोहर, डेगहर और परसोहन सिवान में कई खेतों में बारिश का इंतजार है।
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किसानों के अनुसार धान की फसल को इस समय खेत में पर्याप्त नमी चाहिए। बारिश नहीं होने पर निजी नलकूप और पंपिंग सेट से पानी देना पड़ रहा है। बिस्कोहर क्षेत्र के किसान भारत प्रसाद मिश्रा और गोमती आदि का कहना है कि धान की रोपाई के बाद अब फसल को पानी की जरूरत है। बारिश न होने पर बार-बार सिंचाई करनी पड़ रही है। छोटे किसानों के लिए अतिरिक्त सिंचाई का खर्च चिंता का कारण बन रहा है।
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प्रगतिशील किसान राम मूर्ति कहते हैं कि डीजल की कीमत, पंपसेट का खर्च और सिंचाई के लिए मजदूरी जोड़ने पर प्रति खेत लागत बढ़ रही है। किसानों की निगाह अब मौसम के अगले दौर पर टिकी हैं।
सामान्य से 31 फीसदी कम हुई बारिश : 10 अगस्त तक जिले में करीब 510 मिलीमीटर सामान्य बारिश होनी चाहिए थी लेकिन अब तक लगभग 350 मिलीमीटर ही वर्षा दर्ज हुई है। यानी सामान्य से करीब 160 मिलीमीटर यानी 31 प्रतिशत बारिश कम हुई है। पिछले वर्ष इसी अवधि में लगभग 520 मिलीमीटर बारिश हुई थी। इस लिहाज से इस बार पिछले साल के मुकाबले भी करीब 170 मिलीमीटर कम बारिश हुई है।
गर्मी में शरीर में पानी की कमी : मेडिकल कॉलेज के फिजीशियन डॉ. गौरव दुबे के अनुसार उमस और गर्मी के मौसम में शरीर से पानी और इलेक्ट्रोलाइट की कमी तेजी से हो सकती है। ऐसे में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, धूप में अनावश्यक निकलने से बचना चाहिए।