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Siddharthnagar News: पुराने कंबल के भरोसे रहें तो लग जाएगी ठंड, चार साल से नहीं हुई खरीदारी
Tue, 20 Dec 2022 01:44 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर।
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर।
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 20 Dec 2022 01:44 PM IST
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जिला अस्पताल में भर्ती मरीज के तीमारदार उकीला जिला अस्पताल के पतले कंबल को दिखाती।
- फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध संयुक्त जिला अस्पताल के कंबल से मरीजों को ठंड से बच पाना संभव नहीं है। जबकि विभाग के पास पुराने कंबल भी पर्याप्त नहीं है। ऐसी स्थिति में मरीज और तीमारदार को ठंड बचने के लिए घर से कंबल व रजाई अस्पताल ले जाना पड़ रहा है।
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जिला अस्पताल को मेडिकल कॉलेज से संबंध होने के बाद मरीजों को लगभग 330 बेड पर भर्ती किया जा रहा है, जबकि करीब 250 कंबल ही हैं। जिला अस्पताल में 24 घंटे में 80 से 110 मरीज भर्ती हो रहे हैं। अस्पताल में चार साल से कंबल की खरीद नहीं हो पाई है। अस्पताल में चादर धुलने का टेंडर है, लेकिन कंबल की धुलाई का टेंडर भी नहीं हुआ है। एक स्वास्थ्य कर्मी ने दबी जुबान से बताया कि इस सीजन में कंबल की धुलाई नहीं हुई है। टेंडर नहीं होने के कारण धुलाई का बिल अलग से बनाया जाता है। कंबल जल्दी सूखता नहीं है, इस कारण धुलाई कराने में भी सोचना पड़ रहा है।
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प्रसव कक्ष में भी ठंड का डर
एमसीएच विंग में प्रसव कक्षा स्थानांतरित कर दिया गया है। एक स्टाफ नर्स ने बताया कि प्रसव कक्ष में ब्लोअर या रूम हीटर नहीं लगा है। प्रसव के कुछ देर बाद जच्चा-बच्चा को बाहर वार्ड में भेजा जाता है, तो उन्हें कंबल दी जाती है। प्रसव कक्ष में ठंड होने से स्वास्थ्य कर्मियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्वास्थ्य कर्मियों की सूचना देने के बावजूद भी ठंड से बचाव का बेहतर इंतजाम नहीं किया गया है।
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बारिश बीता, ठंड में भी खाली नहीं हुआ रैन बसेरा
संयुक्त जिला अस्पताल में मरीजों के लिए बनाए गए रैन बसेरा में एंबुलेंस कर्मियों का ठहराव है। इस कारण मरीज व परिजन को वहां ठहरने की सुविधा नहीं मिल पा रही है। चार माह पहले ही बारिश के मौसम में चिकित्साधिकारियों ने रैन बसेरा खाली कराने को कहा था, लेकिन ठंड में भी रैन बसेरा में मरीजों को सुविधा नहीं मिल पा रही है। मजबूरी में परिजन बरामदे में ही सोने को मजबूर हैं। ठंड बढ़ रही है।
जिला अस्पताल में कंबल खरीदने का आदेश हो गया है, जल्द ही 300 कंबल आ जाएंगे। मरीजों को कंबल दिए जा रहे हैं, जबकि सभी मरीज अस्पताल का कंबल नहीं लेते हैं। प्रसव कक्ष में ब्लोअर या रूम हीटर के लिए प्रभारी ने मांग नहीं की होगी। इस कारण रूम को गर्म करने की व्यवस्था नहीं हो पाई होगी। -डॉ. सीबी चौधरी, प्रभारी सीएमएस
पांच बजे शुरू होती है ठंड, आठ बजे बंटता है कंबल
संयुक्त जिला अस्पताल के वार्डों में रात में आठ बजे कंबल वितरण होता है। सोमवार देर शाम 7 बजे संवाददाता ने पड़ताल की तो वार्ड में मरीजों के बेड पर अस्पताल का कंबल नहीं था, सभी मरीजों के बेड पर उनके घर से लाए हुए कंबल ही थे। शाम पांच बजे ही ठंड शुरू होने के सवाल पर कंबल वितरण शुरू किया गया। इस मौके पर मरीज, परिजन ने कंबल की कमियां भी दिखाई।
केस एक
वार्ड नंबर एक में भर्ती रामविलास की पत्नी उकीला ने कंबल दिखाते हुए कहा कि इस कंबल से ठंड जाना संभव नहीं है।मरीजों को तो ठंड भी अधिक लगती है। घर के कंबल न हो तो ठंड से तबीयत और बिगड़ जाएगी।
केस दो
वार्ड नंबर एक में भर्ती सुशीला के पति राजू ने बताया कि उन्होंने घर से कंबल लाया है। यहां रात में कंबल वितरण होता है, लेकिन शाम से ही ठंड शुरू हो जाती है। इस मौसम में दिन में भी कंबल मिलना चाहिए।