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नहीं थम रहा कच्ची का कारोबार
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 26 Feb 2017 10:56 PM IST
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बोलेरो के अंदर बोरे में छिपाकर रखी गई थी 110 बोतल शराब
- फोटो : अमर उजाला
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सिद्धार्थनगर। जिले में अवैध शराब की भट्ठियां धधक रही हैं। बेखौफ होकर धंधेबाज कच्ची का कारोबार कर रहे हैं, लेकिन जिन कंधों पर धंधेबाजों पर शिकंजा कसने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, वह इस पर लगाम लगाने में नाकाम साबित हो रहे हैं। नजीर के तौर पर वह गांव हैं, जहां छापेमारी करने के दूसरे दिन के बाद शराब बनता दिख रहा है।
जिले के पांच थाना क्षेत्रों के लगभग तीन दर्जन से अधिक गांव कच्ची के कारोबार के लिए चिह्नित हैं। इसमें अधिकांश गांव नदी के तट पर बसे हैं। चिह्नित होने के बावजूद इन गांवों में कच्ची का धंधा फलफूल रहा है। शाम ढलते ही इन गांवों में शराब पीने वालों का मजमा लगता है, जो देर रात तक चलता है। पीने को लेकर कई बार विवाद भी होते हैं। इससे पीने वालों का तो परिवार बर्बाद हो रहा है, उन हाथों को शराब के धंधे में लगा दिया गया है, जिन हाथों मेें किताब होने की जरूरत है। चुनाव आयोग के डंडे के बाद आबकारी विभाग की नींद खुली तो अभियान छेड़ा गया। इसके बाद भी कच्ची का कारोबार जोरों पर है। विभाग जिस गांव में एक दिन पूर्व छापेमारी कर रही है, उसी गांव में दोबारा शराब बन रहा है। जो विभाग की कार्यशैली और छापेमारी पर सवाल खड़ा कर रहा है।
अगर विभाग सक्रियता से काम में जुटा है तो फिर कैसे शराब बन रहा है। इस संबंध में जिला आबकारी अधिकारी अजय कुमार मिश्र का कहना है कि विभागीय टीम लगातार छापेमारी कर रही है। टीम गठित कर प्रतिदिन दबिश चल रही है। कच्ची शराब के कारोबार पर लगाम लगाने के लिए विभाग प्रयासरत है। जहां से भी सूचना मिल रही है, छापेमारी कर कार्रवाई की जा रही है।
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जिले के पांच थाना क्षेत्रों के लगभग तीन दर्जन से अधिक गांव कच्ची के कारोबार के लिए चिह्नित हैं। इसमें अधिकांश गांव नदी के तट पर बसे हैं। चिह्नित होने के बावजूद इन गांवों में कच्ची का धंधा फलफूल रहा है। शाम ढलते ही इन गांवों में शराब पीने वालों का मजमा लगता है, जो देर रात तक चलता है। पीने को लेकर कई बार विवाद भी होते हैं। इससे पीने वालों का तो परिवार बर्बाद हो रहा है, उन हाथों को शराब के धंधे में लगा दिया गया है, जिन हाथों मेें किताब होने की जरूरत है। चुनाव आयोग के डंडे के बाद आबकारी विभाग की नींद खुली तो अभियान छेड़ा गया। इसके बाद भी कच्ची का कारोबार जोरों पर है। विभाग जिस गांव में एक दिन पूर्व छापेमारी कर रही है, उसी गांव में दोबारा शराब बन रहा है। जो विभाग की कार्यशैली और छापेमारी पर सवाल खड़ा कर रहा है।
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अगर विभाग सक्रियता से काम में जुटा है तो फिर कैसे शराब बन रहा है। इस संबंध में जिला आबकारी अधिकारी अजय कुमार मिश्र का कहना है कि विभागीय टीम लगातार छापेमारी कर रही है। टीम गठित कर प्रतिदिन दबिश चल रही है। कच्ची शराब के कारोबार पर लगाम लगाने के लिए विभाग प्रयासरत है। जहां से भी सूचना मिल रही है, छापेमारी कर कार्रवाई की जा रही है।
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