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नजदीकी मुकाबले का इतिहास तो दोहराया लेकिन परिणाम बदल गया

Fri, 11 Mar 2022 10:16 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 11 Mar 2022 10:16 PM IST
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History of close match repeated but result changed
नजदीकी मुकाबले का इतिहास तो दोहराया लेकिन परिणाम बदल गया
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-पिछले चुनाव में भाजपा ने 171 वोटों से डुमरियागंज में दर्ज की थी जीत
-इस बार सपा ने नजदीकी मुकाबले में 711 मतों से भाजपा को दी शिकस्त
सिद्धार्थनगर। जिले की डुमरियागंज विधानसभा सीट पर हुए ध्रुवीकरण के खेल में इस बार सपा के सिर पर जीत का सेहरा बंधा। पिछले चुनाव में जहां 171 वोटों से नतीजा तय हुआ था, वहीं इस बार 711 मतों से जीत-हार का निर्णय हुआ। भाजपा प्रत्याशी राघवेंद्र प्रताप सिंह को नजदीकी मुकाबले में सपा उम्मीदवार सैय्यदा खातून ने शिकस्त देने में कामयाब रहीं।
सियासी मिजाज के लिहाज से जिले की सबसे हॉट सीट डुमरियागंज के परिणाम पर पूरे जिले की निगाह टिकी थी। मतगणना के दिन चरण दर चरण हो रही गिनती सबकी सांसे अटका दे रही थी। कभी महज कुछ वोटों से भाजपा आगे तो कभी कुछ वोटों से सपा आगे। हर बीतते पल के साथ सबकी धड़कनें बढ़ती रहीं। इस बार जीत का सेहरा सपा प्रत्याशी सैय्यदा खातून के सिर बंधा। उन्हें कुल 85098 वोट मिले तो भाजपा के राघवेंद्र प्रताप सिंह को 84327 मत। नजदीकी मुकाबले में सैय्यदा 711 वोटों से विजयी रहीं।
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यह वहीं सीट है, जहां वर्ष 2017 के चुनाव में जीत-हार का नतीजा केवल 171 वोटों से तय हुआ था और भाज के राघवेंद्र प्रताप ने तब बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ी सैय्यदा को कांटे की टक्कर में शिकस्त दी थी। इस बार भी दिल धड़का देने वाली लड़ाई का इतिहास तो दोहराया गया लेकिन परिणाम बदल गया।
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बगावत और ध्रुवीकरण ने बिगाड़ा भाजपा का समीकरण
डुमरियागंज में भाजपा की हार की प्रमुख वजह बगावत और मुस्लिम मतों का ध्रुवीकरण रहा। चुनाव से पहले भाजपा नेता शैलेंद्र उर्फ राजू श्रीवास्तव, पाला बदलते हुए शिवसेना के टिकट से चुनावी मैदान में उतर गए। कुल 3702 वोट पाकर वह चुनावी मैदान में उतरे 13 प्रत्याशियों की रेस में नौवें स्थान पर रहे। जानकारों की माने तो 711 वोटों की जीत-हार में इन वोटों ने बड़ी भूमिका निभाई। इसके अलावा भाजपा की हार में सपा के पक्ष में मुस्लिम मतों का ध्रुवीकरण निर्णायक साबित हुआ।
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हार-जीत के अंतर से ज्यादा रहा नोटा का मत
डुमरियागंज विधानसभा में 711 मतों से हुए जीत-हार के निर्णय में नोटा का बटन दबाने वाले मतदाताओं की भूमिका अहम रही। नोटा के लिए कुल 1124 लोगों ने मतदान किया। अगर इन मतदाताओं ने नोटा के लिए मतदान नहीं किया होता तो परिणाम बदल भी बदल सकता था।

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तीसरी बार में मिली सैय्यदा खातून को जीत
डुमरियागंज से सपा की नवनिर्वाचित विधायक सैय्यदा खातून तीसरी बार में सियासत की विरासत बचाने में कामयाब हुई हैं। वर्ष 2012 में 1659 और वर्ष 2017 में 171 वोट से कांटे की टक्कर में वह हार चुकी थीं। दो बार बसपा से चुनाव लड़ी थीं, जबकि इस साइकिल की सवारी रास आ गई। इसके पहले उनके पिता मलिक तौफीक अहमद और मां खातून तौफीक भी विधायक थे।
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