{"_id":"60e5e4be8ebc3e9eb00d9db1","slug":"haichari-siddharthnagar-news-gkp401018762","type":"story","status":"publish","title_hn":"हैचरी से खुद के साथ ही दूसरों का भी कर रहे उत्थान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हैचरी से खुद के साथ ही दूसरों का भी कर रहे उत्थान
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हैचरी से खुद के साथ ही दूसरों का भी कर रहे उत्थान
- डॉ. अजय बर्डपुर में संचालित कर रहे पूर्वांचल की सबसे अधिक क्षमता वाली हैचरी, दो हजार लोगों को दे रहे हैं रोजगार
जयराम यादव
बर्डपुर। जिले के बर्डपुर में पूर्वांचल की सबसे अधिक क्षमता वाली ब्रायलर पैरेंट्स फॉर्मिंग (हैचरी) है। यहां हर दूसरे दिन 9 से 10 हजार चूजे पैदा होते हैं। तीन वर्ष में टर्नओवर 3.5 करोड़ रुपया वार्षिक हो गया है। प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से इससे दो हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिल रहा है। यह संभव हुआ बर्डपुर के किसान डॉ. अजय रावत की दृढ़ इच्छाशक्ति से और उत्तर प्रदेश कुक्कुट परियोजना के अनुदान से।
हैचरी संचालक डॉ. अजय ने बताया कि छह एकड़ क्षेत्र में वर्ष 2018 में हैचरी बनाई गई है। उत्तर प्रदेश कक्कुट विकास नीति 2018 से 22 के अंतर्गत उन्होंने 2.06 करोड़ रुपये ब्याज रहित ऋण प्राप्त किया। 65 लाख रुपये पूंजी उन्होंने खुद लगाई। नवीनतम तकनीकी और सक्रियता की बदौलत उन्होंने तीन वर्ष के अंदर यूनिट की संख्या एक से बढ़ाकर दो कर ली। दोनों यूनिट में 44 कर्मचारी नियमित कार्य करते हैं। यहां सिद्धार्थनगर, बस्ती, गोरखपुर, देवरिया, महराजगंज के साथ ही बलिया और आजमगढ़ की सीमा तक के मुर्गी फार्म में यहां के चूजे पाले जा रहे हैं। प्रोजेक्ट से लगभग दो हजार लोगों को रोजगार मिला हुआ है। संवाद
यहां पैदा होते हैं अमेरिकन बर्ड के चूजे
डॉ. अजय रावत ने बताया कि राजनीति शास्त्र में पीएचडी करने के बाद उन्होंने कुछ अलग करने की कोशिश शुरू की। उन्होंने इंडियन पोल्ट्री इंस्टीट्यूट पुणे से डिप्लोमा करने के साथ कई नेशनल सेमिनार में जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने प्रोजेक्ट शुरू किया। वर्ष 2017 में वे बैंकाक में हुए इंटरनेशनल सेमिनार में प्रशिक्षण लेने गए थे। उन्होंने बताया कि यूनिट में अमेरिकन बर्ड के चूजे पैदा किए जाते हैं, जिसमें मांस ज्यादा होता है।
विज्ञापन
21 दिन में अंडे से निकलते हैं चूजे
अमेरिकन बर्ड के पैरेंट्स चूजे की कीमत करीब 350 रुपया होती है। एयर कंडीशन (एसी) के माध्यम से मुर्गियों को 29 से 31 डिग्री सेल्सियस तापमान में रखा जाता है। मुर्गी जब अंडे देने की स्थिति में होती है तो उसकी कीमत 1650 तक पहुंच जाती है। एक मुुर्गी 18 माह तक अंडे देती है। औसतन वे 142 चूजे पैदा करती हैं। इसके बाद मुर्गियों को मीट प्रोसेसिंग यूनिट में बेच दिया जाता है। एक मुर्गी 6.5 से 7 किग्रा की होती है। वहीं यूनिट के ऑपरेटर ट्रे में अंडे रखकर मशीन में सेट कर देते हैं। हैचरी में 21 दिन बाद उसमें चूजे तैयार हो जाते हैं।
बर्डपुर में पूर्वांचल की सबसे अधिक क्षमता वाली हैचरी है। इसमें प्रबंधन और साफ-सफाई बेहतर होती है। इसके संचालक विदेशी तकनीकी को भी अपनाने में सक्रिय रहते हैं। छह से अधिक जिलों में दो हजार से अधिक लोगों को इस प्रोजेक्ट से रोजगार मिल रहा है।
- डॉ. वेदव्रत गंगवार, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
विज्ञापन
- डॉ. अजय बर्डपुर में संचालित कर रहे पूर्वांचल की सबसे अधिक क्षमता वाली हैचरी, दो हजार लोगों को दे रहे हैं रोजगार
जयराम यादव
बर्डपुर। जिले के बर्डपुर में पूर्वांचल की सबसे अधिक क्षमता वाली ब्रायलर पैरेंट्स फॉर्मिंग (हैचरी) है। यहां हर दूसरे दिन 9 से 10 हजार चूजे पैदा होते हैं। तीन वर्ष में टर्नओवर 3.5 करोड़ रुपया वार्षिक हो गया है। प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से इससे दो हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिल रहा है। यह संभव हुआ बर्डपुर के किसान डॉ. अजय रावत की दृढ़ इच्छाशक्ति से और उत्तर प्रदेश कुक्कुट परियोजना के अनुदान से।
हैचरी संचालक डॉ. अजय ने बताया कि छह एकड़ क्षेत्र में वर्ष 2018 में हैचरी बनाई गई है। उत्तर प्रदेश कक्कुट विकास नीति 2018 से 22 के अंतर्गत उन्होंने 2.06 करोड़ रुपये ब्याज रहित ऋण प्राप्त किया। 65 लाख रुपये पूंजी उन्होंने खुद लगाई। नवीनतम तकनीकी और सक्रियता की बदौलत उन्होंने तीन वर्ष के अंदर यूनिट की संख्या एक से बढ़ाकर दो कर ली। दोनों यूनिट में 44 कर्मचारी नियमित कार्य करते हैं। यहां सिद्धार्थनगर, बस्ती, गोरखपुर, देवरिया, महराजगंज के साथ ही बलिया और आजमगढ़ की सीमा तक के मुर्गी फार्म में यहां के चूजे पाले जा रहे हैं। प्रोजेक्ट से लगभग दो हजार लोगों को रोजगार मिला हुआ है। संवाद
विज्ञापन
यहां पैदा होते हैं अमेरिकन बर्ड के चूजे
डॉ. अजय रावत ने बताया कि राजनीति शास्त्र में पीएचडी करने के बाद उन्होंने कुछ अलग करने की कोशिश शुरू की। उन्होंने इंडियन पोल्ट्री इंस्टीट्यूट पुणे से डिप्लोमा करने के साथ कई नेशनल सेमिनार में जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने प्रोजेक्ट शुरू किया। वर्ष 2017 में वे बैंकाक में हुए इंटरनेशनल सेमिनार में प्रशिक्षण लेने गए थे। उन्होंने बताया कि यूनिट में अमेरिकन बर्ड के चूजे पैदा किए जाते हैं, जिसमें मांस ज्यादा होता है।
विज्ञापन
21 दिन में अंडे से निकलते हैं चूजे
अमेरिकन बर्ड के पैरेंट्स चूजे की कीमत करीब 350 रुपया होती है। एयर कंडीशन (एसी) के माध्यम से मुर्गियों को 29 से 31 डिग्री सेल्सियस तापमान में रखा जाता है। मुर्गी जब अंडे देने की स्थिति में होती है तो उसकी कीमत 1650 तक पहुंच जाती है। एक मुुर्गी 18 माह तक अंडे देती है। औसतन वे 142 चूजे पैदा करती हैं। इसके बाद मुर्गियों को मीट प्रोसेसिंग यूनिट में बेच दिया जाता है। एक मुर्गी 6.5 से 7 किग्रा की होती है। वहीं यूनिट के ऑपरेटर ट्रे में अंडे रखकर मशीन में सेट कर देते हैं। हैचरी में 21 दिन बाद उसमें चूजे तैयार हो जाते हैं।
बर्डपुर में पूर्वांचल की सबसे अधिक क्षमता वाली हैचरी है। इसमें प्रबंधन और साफ-सफाई बेहतर होती है। इसके संचालक विदेशी तकनीकी को भी अपनाने में सक्रिय रहते हैं। छह से अधिक जिलों में दो हजार से अधिक लोगों को इस प्रोजेक्ट से रोजगार मिल रहा है।
- डॉ. वेदव्रत गंगवार, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी