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गांवों में पल रहे जेई-एईएस के जनक
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Fri, 26 May 2017 10:48 PM IST
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सुअर
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जोगिया। पूर्वांचल के लिए अभिशाप बने जेई-एईएस से हर वर्ष सैकड़ों मासूम जिंदगी चली जाती है तो वहीं अधिकांश दिव्यांग होकर जिल्लत की जिंदगी जीने को मजबूर हैं। इस बीमारी पर अंकुश लगाने के लिए शासन ने पूरा जोर लगा दिया है, लेकिन असल समस्या पर जिम्मेदारों का ध्यान नहीं है।
इंसेफेलाइटिस के वाहक सुअर गांव के बीचो-बीच पल रहे हैं। बार-बार हिदायतों के बावजूद सूअरबाड़ा को आबादी से दूर नहीं ले जाया जा सका है। जोगिया ब्लॉक का जेई-एईएस प्रभावित कटहना गांव इसकी नजीर है।
यहां घनी आबादी के बीच सूअर बाड़ा चल रहा है। खुलने के बाद सूअर नालियों में लोटते हैं और लोगों के घरों के आसपास मंडराते हैं जिससे लोगों को दुश्वारियां हो रही हैं, मगर इन्हेें हटवाने की कोई हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है। ग्राम प्रधान श्रवण पांडेय का कहना है कि गांव के पास से गुजरी नहर के पास सूअर बाड़ा खोल दिया गया है। सूअर खुलेआम घूम रहे हैं जिससे लोगों का खाना-पीना दुश्वार हो गया है। बगल में मिनी सचिवालय भी है। रात में सूअरों को उसी में बंद कर दिया जाता है। इससे पूरा सचिवालय गंदगी से पट जाता है।
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मामले को लेकर एसडीएम को कई बार अवगत भी करा चुके हैं, लेकिन अभी तक इस पर प्रशासन की ओर से कोई कदम नहीं उठाया गया है। गांव निवासी दीपक कुमार मिश्र, रामचंद्र भारती, उमेश कुमार, अजय कुमार ध्रुव कुमार, पंकज लवकुश आदि का कहना है कि सूअर के आबादी के बीच होने से जेई-एईएस का अधिक खतरा होता है, इसके बावजूद प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।
इस संबंध में बीडीओ विद्यामणि त्रिपाठी ने बताया कि मामले की जानकारी नहीं थी, अगर ऐसा है जो नियम विरुद्ध है। जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
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इंसेफेलाइटिस के वाहक सुअर गांव के बीचो-बीच पल रहे हैं। बार-बार हिदायतों के बावजूद सूअरबाड़ा को आबादी से दूर नहीं ले जाया जा सका है। जोगिया ब्लॉक का जेई-एईएस प्रभावित कटहना गांव इसकी नजीर है।
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यहां घनी आबादी के बीच सूअर बाड़ा चल रहा है। खुलने के बाद सूअर नालियों में लोटते हैं और लोगों के घरों के आसपास मंडराते हैं जिससे लोगों को दुश्वारियां हो रही हैं, मगर इन्हेें हटवाने की कोई हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है। ग्राम प्रधान श्रवण पांडेय का कहना है कि गांव के पास से गुजरी नहर के पास सूअर बाड़ा खोल दिया गया है। सूअर खुलेआम घूम रहे हैं जिससे लोगों का खाना-पीना दुश्वार हो गया है। बगल में मिनी सचिवालय भी है। रात में सूअरों को उसी में बंद कर दिया जाता है। इससे पूरा सचिवालय गंदगी से पट जाता है।
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मामले को लेकर एसडीएम को कई बार अवगत भी करा चुके हैं, लेकिन अभी तक इस पर प्रशासन की ओर से कोई कदम नहीं उठाया गया है। गांव निवासी दीपक कुमार मिश्र, रामचंद्र भारती, उमेश कुमार, अजय कुमार ध्रुव कुमार, पंकज लवकुश आदि का कहना है कि सूअर के आबादी के बीच होने से जेई-एईएस का अधिक खतरा होता है, इसके बावजूद प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।
इस संबंध में बीडीओ विद्यामणि त्रिपाठी ने बताया कि मामले की जानकारी नहीं थी, अगर ऐसा है जो नियम विरुद्ध है। जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।