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बिना मान्यता के चल रहे चार सौ स्कूल
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 03 Jul 2016 10:40 PM IST
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परिषदीय विद्यालयों की हालत खस्ता।
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सिद्धार्थनगर। जिले में गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों की संख्या में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। न इनका कोई मानक है और न ही कोई नियम-कानून। प्रशासन तो इससे बेखबर है ही शिक्षा विभाग के पास भी इनका कोई लेखा-जोखा नहीं है। पूरे जिले में चार सौ से अधिक ऐसे स्कूल चल रहे हैं, जिनके पास कोई मान्यता नहीं है। खुद शिक्षा विभाग ने 388 स्कूलों को चिह्नित किया है। इसमें 262 प्राइमरी व 126 जूनियर हाईस्कूल हैं। कई स्कूल तो तहसील और जिला मुख्यालय पर ही चल रहे हैं। अफसरों की मौन सहमति से इन स्कूलों में न सिर्फ शिक्षा का खुलेआम व्यापार हो रहा है, बल्कि अभिभावकों की जेब काटने और बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ भी जारी है।
नियमों के मुताबिक बिना मान्यता किसी भी स्कूल का संचालन नहीं किया जा सकता। इसे दरकिनार पर ऊंची पहुंच और रसूख का लाभ लेकर कतिपय लोग धड़ल्ले से स्कूल चला रहे हैं। हर साल इनकी तादाद बढ़ती ही जा रही है। इन स्कूलों में न ट्रेंड शिक्षक हैं और न ही पठन-पाठन के लिए उपयुक्त संसाधन। कहीं झोपड़ी में स्कूल चल रहे हैं तो कहीं दो-तीन कमरों का भवन बनाकर शिक्षा की दुकान सजाई गई है।
फीस, कॉपी, किताब, ड्रेस के नाम यह स्कूल बच्चों और अभिभावकों का भरपूर शोषण भी कर रहे हैं। विभाग के रिकार्ड में इनका कोई उल्लेख न होने से इन पर शिकंजा भी नहीं कसा जा रहा। नतीजा स्कूल संचालकों की मनमानी जारी है। ऐसा नहीं कि विभाग के लोग इन स्कूलों से अनजान हैं, अलबत्ता विभाग ने सर्वे के जरिए इन स्कूलों को चिह्नित भी कर रखा है। मगर संचालकों की रसूख और ऊंची पहुंच के चलते कार्रवाई से हिचक रहे हैं।
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खामियाजा बच्चे और अभिभावक भुगत रहे हैं। इस संबंध में बेसिक शिक्षा अधिकारी अरविंद कुमार पाठक ने बताया कि बिना मान्यता प्राप्त किए कोई भी स्कूल नहीं चल सकता। ऐसे स्कूलों को चिह्नित किया जा रहा है। सहायक शिक्षा निदेशक की बैठक में भी निर्देश मिले हैं। जल्द ही इन्हें नोटिस भेजकर आगाह किया जाएगा। इसके बावजूद स्कूल बंद नहीं होते तो उनके खिलाफ प्रशासन की मदद से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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नियमों के मुताबिक बिना मान्यता किसी भी स्कूल का संचालन नहीं किया जा सकता। इसे दरकिनार पर ऊंची पहुंच और रसूख का लाभ लेकर कतिपय लोग धड़ल्ले से स्कूल चला रहे हैं। हर साल इनकी तादाद बढ़ती ही जा रही है। इन स्कूलों में न ट्रेंड शिक्षक हैं और न ही पठन-पाठन के लिए उपयुक्त संसाधन। कहीं झोपड़ी में स्कूल चल रहे हैं तो कहीं दो-तीन कमरों का भवन बनाकर शिक्षा की दुकान सजाई गई है।
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फीस, कॉपी, किताब, ड्रेस के नाम यह स्कूल बच्चों और अभिभावकों का भरपूर शोषण भी कर रहे हैं। विभाग के रिकार्ड में इनका कोई उल्लेख न होने से इन पर शिकंजा भी नहीं कसा जा रहा। नतीजा स्कूल संचालकों की मनमानी जारी है। ऐसा नहीं कि विभाग के लोग इन स्कूलों से अनजान हैं, अलबत्ता विभाग ने सर्वे के जरिए इन स्कूलों को चिह्नित भी कर रखा है। मगर संचालकों की रसूख और ऊंची पहुंच के चलते कार्रवाई से हिचक रहे हैं।
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खामियाजा बच्चे और अभिभावक भुगत रहे हैं। इस संबंध में बेसिक शिक्षा अधिकारी अरविंद कुमार पाठक ने बताया कि बिना मान्यता प्राप्त किए कोई भी स्कूल नहीं चल सकता। ऐसे स्कूलों को चिह्नित किया जा रहा है। सहायक शिक्षा निदेशक की बैठक में भी निर्देश मिले हैं। जल्द ही इन्हें नोटिस भेजकर आगाह किया जाएगा। इसके बावजूद स्कूल बंद नहीं होते तो उनके खिलाफ प्रशासन की मदद से सख्त कार्रवाई की जाएगी।