Siddharthnagar Flood: राप्ती ने तोड़ा 50 साल का रिकॉर्ड, चहुंओर तबाही का मंजर
राज्य कृषि मौसम केंद्र के प्रभारी अतुल कुमार सिंह ने बातया कि अब बारिश का पूर्वानुमान नहीं है। 30 सितंबर को मानसून ऋतु समाप्त होने के बाद भी मानसून की प्रदेश से पूरी तरह विदाई नहीं हुई थी। अक्तूबर के प्रथम पखवाड़े के दौरान प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में बंगाल की खाडी़ में बने कम दबाव के क्षेत्र के कारण भारी बारिश हुई।
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राप्ती नदी की बाढ़ ने बीते 50 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। एक दिन पहले तीन बांधों के टूटने के कारण शुक्रवार को जिले में जलमग्न गांवों में संख्या 351 हो गई है। इनमें 182 गांव मैरुंड हैं। बाढ़ इतनी भयावह है कि प्रशासन के इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं। बूढ़ी राप्ती नदी और कूड़ा नदी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।
बांसी में केंद्रीय जल आयोग कार्यालय 1972 में स्थापित हुआ था। दस्तावेजों के अनुसार राप्ती नदी ने शुक्रवार शाम 6 बजे अब तक का उच्चतम जलस्तर पार कर लिया। राप्ती नदी का उच्चतम जलस्तर 85.950 मीटर था, जबकि नदी की लहरें 85.970 मीटर तक पहुंच गईं। अब तक के सभी रिकॉर्ड ध्वस्त होने से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में चहुंओर तबाही का मंजर है।
राप्ती नदी का खतरे का निशान 84.900 मीटर है, नदी एक मीटर सात सेमी ऊपर बह रही है। बूढ़ी राप्ती नदी खतरे के निशान 85.650 मीटर से दो मीटर 24 सेमी ऊपर 87.890 मीटर के निशान पर बह रही है। वहीं कूड़ा नदी भी खतरे के निशान से ऊपर 83.660 मीटर पर बह रही है।
भयावह बाढ़ के असर से बृहस्पतिवार को बांसी में नगवा अशोगवा, इटवा में मदरहवा अशोगवा एवं शोहरतगढ़ में लखनापार बैदौला बांध टूट गया। इस कारण बाढ़ प्रभावित गांवों की संख्या डेढ़ गुनी हो गई। सबसे अधिक तबाही मैरुंड हो चुके 182 गांवों में है, जहां घरों में पानी है, सड़कों पर पानी का सैलाब है और नाव भी पर्याप्त नहीं हैं।
प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार 2.47 लाख आबादी बाढ़ प्रभावित हो गई है, जबकि 31 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल बाढ़ प्रभावित हो चुका है। शुक्रवार को बारिश बंद होने के बावजूद भी नदियों के जलस्तर में वृद्धि के कारण प्रभावित गांवों की संख्या बढ़ रही है। बांध टूटने के बाद बूढ़ी राप्ती धीरे-धीरे घट रही है, जबकि राप्ती नदी के बांधों पर खतरा अभी टला नहीं है।
गांवों के लोग प्रशासन के भरोसे बैठने की बजाए खुद ही बांधों का रिसाव बंद करने के लिए पानी में उतरकर पसीना बहा रहे हैं। लोग रात में जागकर बांधों की रखवाली कर रहे हैं ताकि तबाही का सामना न करना पड़े। जिले में 154 नावें और 30 मोटरबोट हैं। इन्हीं संसाधनों के भरोसे जनप्रतिनिधि और अधिकारी भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जा रहे हैं। सभी मैरुंड गांवों में नाव नहीं पहुंच सकी है।
मानसून गया, अब बारिश का अनुमान नहीं
राज्य कृषि मौसम केंद्र के प्रभारी अतुल कुमार सिंह ने बातया कि अब बारिश का पूर्वानुमान नहीं है। 30 सितंबर को मानसून ऋतु समाप्त होने के बाद भी मानसून की प्रदेश से पूरी तरह विदाई नहीं हुई थी। अक्तूबर के प्रथम पखवाड़े के दौरान प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में बंगाल की खाडी़ में बने कम दबाव के क्षेत्र के कारण भारी बारिश हुई। 13 अक्तूबर को मौसम शुष्क होने के उपरांत 14 अक्तूबर को जनपद एवं संपूर्ण प्रदेश से मानसून विदा हो गया।