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आग ने भूमिहीन किसानों का सबकुछ छीना

Thu, 14 Apr 2016 11:28 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर Updated Thu, 14 Apr 2016 11:28 PM IST
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Fire stolen everything of landless farmers
आग
जिले के किसानों पर कहर बनकर बरपी आग ने सिर्फ आशियाना ही नहीं छीना है, बल्कि उनकी उम्मीद और सपने भी तोड़ दिए हैं। सबसे करारी चोट उन भूमिहीन किसानों पर पड़ी है, जिन्हें हाड़-तोड़ मेहनत और पूरी पूंजी लगाने के बाद भी मुआवजे के रूप में फूटी कौड़ी नहीं मिलेगी। बटाई पर जमीन लेकर खेती करने वाले यह किसान ठगे से रह गए हैं। सरकारी नियमों के तहत नुकसान का मुआवजा खेत स्वामी को खसरा-खतौनी के आधार पर दिया जाएगा, ऐसे में बटाई पर खेती करने वाले उन किसानों का क्या, जिन्होंने अपनी पूरी पूंजी और मेहनत खेत में झोंक दी थी।
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आग की तबाही से अब तक जिले में करीब 20 हजार बीघा गेहूं के खेत फूंक गए हैं। इनमें ज्यादातर किसान खेत के मालिक खुद हैं। मगर उन किसानों की संख्या भी कम नहीं है, जो भूस्वामी से बटाई पर लेकर खेती करते रहे हैं।
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अकेले बांसी क्षेत्र के थुम्हवा गांव में इस श्रेणी के डेढ़ दर्जन से अधिक किसान हैं। खेत के साथ इनके अरमान भी राख हो चुके हैं। इन्हें न उपज मिली और न ही सरकारी मदद की कोई उम्मीद है।
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खेती के जुए में सब कुछ गंवाने वाले यह परिवार हताश, निराश और उदास हैं। उन्हें एक तरफ खेती की खातिर लिए गए कर्ज की याद आ रही है तो दूसरी ओर परिवार के भरण-पोषण का खर्च सता रहा है। इन पीड़ितों का कहना है कि खेती से काफी उम्मीद थी, लेकिन आग ने कहीं का नहीं छोड़ा। सब कुछ खत्म होने के बाद सरकारी मुआवजे की राशि तिनके का सहारा बनती, लेकिन हमें वह भी नसीब नहीं। 
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