फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Siddharthnagar News ›   Farmers are still preparing, smugglers started sending urea to Nepal

Siddharthnagar News: किसान अभी तैयारी में, तस्कर नेपाल भेजने लगे यूरिया

Fri, 30 May 2025 11:12 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 30 May 2025 11:12 PM IST
विज्ञापन
Farmers are still preparing, smugglers started sending urea to Nepal
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

सिद्धार्थनगर। धान की रोपाई के साथ किसानों को डीएपी की जरूरत पड़ेगी। उससे चार कदम आगे बढ़कर तस्कर यूरिया बाॅर्डर पार करने लगे हैं। यूरिया की जरूरत अभी दो माह बाद पड़ेगी।
ऐसे में तस्कर सीमावर्ती क्षेत्र की दुकानों से सेटिंग करके खाद नेपाल पहुंचाने लगे हैं। ऑपरेशन सिंदूर के बाद बाॅर्डर पर सख्ती बढ़ गई है। इसलिए गाड़ी के बजाय साइकिल और बाॅर्डर तक पहुंचाकर सिर पर रखकर सीमा पा कर दी जा रही है।
विज्ञापन

एक पखवाड़े में यूरिया तस्करी के कई मामले सामने आ चुके हैं। अगर तस्करी पर अंकुश नहीं लगा तो यूरिया के लिए किसानों को मशक्कत करनी पड़ेगी। धान और गेंहू की फसल की बुवाई और रोपाई के साथ किसानों को खाद की जरूरत पड़ती है। डीएपी और यूरिया इसमें प्रमुख खाद है। खाद तो पर्याप्त मात्रा में जनपद में आवंटित होती है, लेकिन इसके बाद खाद की किल्लत शुरू हो जाती है। जैसा कि रबी के सीजन में बुवाई में एक- एक बोरी डीएपी और यूरिया के लिए किसानों को कई दिनों तक लाइन लगानी पड़ी। निजी दुकानों से किसानों को अधिक दाम देकर खाद खरीदनी पड़ती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

इस बार धान का सीजन शुरू हो रहा है, लेकिन इस सीजन में भी खाद की समस्या से इन्कार नहीं किया जा सकता है। क्योंकि एक से डेढ़ माह में धान की रोपाई के साथ डीएपी की जरूरत पड़ेगी। वहीं, रोपाई के कुछ दिन बाद यूरिया की जरूरत पड़ेगी। अभी से यूरिया की तस्करी बढ़ गई है। एक पखवाड़ा में कई बार यूरिया के साथ तस्कर पकड़े गए। इनमें नेपाली और भारतीय दोनों शामिल रहे हैं। इसका केंद्र बढ़नी और खुनुवां बाॅर्डर है। क्योंकि यहीं से अभी तक तस्करी के मामले पकड़े जा रहे हैं।
सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों के मुताबिक यह सब सीमावर्ती क्षेत्र की खाद दुकानदारों और तस्करों की सेटिंग से हो रहा है। लोगों से चर्चा में सीमावर्ती क्षेत्र में तेजी से बढ़ रही खाद तस्करी की हकीकत सामने आई है। क्षेत्र के किसानों ने बताया कि सीमावर्ती क्षेत्र में उर्वरक की दुकान और गोदाम अलग-अलग बने हैं। तस्करों की सेटिंग दुकानदार से है, दुकान पर रुपये जमा होता है और बाद में गोदाम से खाद दी जाती है।

आवंटित होती है इतनी खाद : आंकड़ाें के मुताबिक जिले में लगभग डेढ़ लाख हेक्टेयर भूमि पर धान और गेहूं की खेती होती है। इतने रकबे के लिए 10687 मीट्रिक टन डीएपी, 6211 मीट्रिक टन एनपीके, एमओपी 1381 मीट्रिक, सुपर फास्फेट 20899 मीट्रिक टन। जबकि, यूरिया 47 हजार मीट्रिक टन लक्ष्य है। इसमें 27 हजार एमटी, निजी दुकानों और समितियों को आवंटित होती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed