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खुदाई में मिले बौद्ध कालीन साक्ष्य
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 19 Feb 2017 11:07 PM IST
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नेपाल के तौलिहवां-जीतपुर मार्ग के निर्माण के लिए चल रही खुदाई के दौरान बौद्धकालीन अवशेष मिले।
- फोटो : अमर उजाला
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कपिलवस्तु। तौलिहवां जीतपुर डबल लेन की सड़क निर्माण के लिए चल रही खुदाई के दौरान रविवार को निग्लिहवां अशोक स्तंभ के निकट बौद्ध कॉलीन दीवार मिली है। साथ ही बुद्ध कॉलीन अवशेषों के अलावा एक प्राचीन कुंआ भी मिला है, जिसके अंदर जाने के लिए सीढ़ियां बनी हुई हैं। प्राचीन अवशेषों के मिलने के बाद सड़क की खुदाई रोककर पुरातत्व मंत्रालय को सूचना दी गई है।
तौलिहवां से जीतपुर तक डबल लेन की सड़क निर्माण के लिए सड़क योजना आयोग के तहत 33 करोड़ की राशि अवमुक्त हुई। पिछले माह सड़क डिवीजन कार्यालय कपिलवस्तु ने खुदाई के कार्य को तेजी से शुरू किया। शनिवार को निग्लिहवां गविस के निकट निगाली कोट स्थित प्राचीन अशोक स्तंभ के किनारे बड़ी प्राचीन दीवार के साथ कई प्रकार के प्राचीन अवशेष प्राप्त हुए हैं। यहां गहरा कुंआ भी मिला है, जिसके अंदर जाने के लिए सीढ़ियां बनी हुई हैं। गांववालों ने प्राचीन अवशेषों के मिलने के बाद खुदाई का कार्य बंद कराते हुए लुंबिनी विकास कोष को इसकी जानकारी दी।
रविवार को पुरातत्व विभाग के प्रमुख अधिकृत राम बहादुर कुंवर, लुंबिनी विकास कोष के अधिकृत कृष्ण केसी, हिमाल उत्प्रेती, ध्रुव नारायण पांडेय ने मुख्य स्थल का निरीक्षण किया। लुंबिनी विकास कोष कपिलवस्तु के प्रतिनिधि माधव आचार्य ने बताया कि स्थान पर बुद्धकालीन संरचना के पर्याप्त साक्ष्य मिले हैं।
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तौलिहवां से जीतपुर तक डबल लेन की सड़क निर्माण के लिए सड़क योजना आयोग के तहत 33 करोड़ की राशि अवमुक्त हुई। पिछले माह सड़क डिवीजन कार्यालय कपिलवस्तु ने खुदाई के कार्य को तेजी से शुरू किया। शनिवार को निग्लिहवां गविस के निकट निगाली कोट स्थित प्राचीन अशोक स्तंभ के किनारे बड़ी प्राचीन दीवार के साथ कई प्रकार के प्राचीन अवशेष प्राप्त हुए हैं। यहां गहरा कुंआ भी मिला है, जिसके अंदर जाने के लिए सीढ़ियां बनी हुई हैं। गांववालों ने प्राचीन अवशेषों के मिलने के बाद खुदाई का कार्य बंद कराते हुए लुंबिनी विकास कोष को इसकी जानकारी दी।
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रविवार को पुरातत्व विभाग के प्रमुख अधिकृत राम बहादुर कुंवर, लुंबिनी विकास कोष के अधिकृत कृष्ण केसी, हिमाल उत्प्रेती, ध्रुव नारायण पांडेय ने मुख्य स्थल का निरीक्षण किया। लुंबिनी विकास कोष कपिलवस्तु के प्रतिनिधि माधव आचार्य ने बताया कि स्थान पर बुद्धकालीन संरचना के पर्याप्त साक्ष्य मिले हैं।
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