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धान की फसल में झूठा कंडवा (हल्दिया रोग) से सतर्क रहें किसान

Sun, 27 Sep 2020 06:48 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 27 Sep 2020 06:48 PM IST
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dhan ki fasal
धान में हल्दिया रोग से सतर्क रहें किसान
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मन्नीजोत। अभी तक किसान धान की फसल में जीवाणु झुलसा, शीथ ब्लाइट रोगों से परेशान थे ही अब धान में बाली निकलनी शुरू हुई तो फसल हल्दिया रोग की चपेट में आ गई। कृषि विज्ञान केंद्र सोहना के पौध संरक्षण अनुभाग के कृषि वैज्ञानिक डा. प्रदीप कुमार ने धान की फसल में लगने वाले रोगों से बचाव के उपाय किसानों को बताए। डॉ. प्रदीप ने बताया कि रोग को झूठा कंडवा रोग, फाल्स स्मट, पीला हरदिया रोग आदि कई नाम से पहचानते हैं। पौधे में फूल लगने और वयस्कता की अवधि में वर्षा और बादल युक्त मौसम इस रोग के लिए अनुकूल माना गया है। धान की हाइब्रिड किस्म में यह रोग की अधिक लगता है। शुरुआत में दानों पर पीले रंग के गोल मखमली धब्बे पड़ते हैं, समय के साथ दाने काले पड़ने लगते हैं। रोग का लक्षण दिखने पर ग्रसित पौधों को किसी प्लास्टिक या लिफाफे में कर कहीं दूर मिट्टी में दबा दें। इसका पाउडर खेत में ना गिरे। मेड़ और सिंचाई की नालियों के खरपतवार की सफाई करते रहें। इस समय यूरिया का प्रयोग बंद कर दें। रासायनिक छिड़काव के लिए प्रॉपिकॉनाजोल या हेक्साकोनाजोल एक एमएल प्रति लीटर पानी में 15 दिन के अंतराल पर दो छिड़काव करें। पहला छिड़काव पुष्प गुच्छ के निकलने से पहले और दूसरा छिड़काव पुष्प गुच्छ निकलने के दस दिन बाद करना है।
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