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बारिश की आस में मुरझा रहीं फसलें
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Sat, 13 Aug 2016 10:49 PM IST
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बांसी क्षेत्र में सूख रहे धान के पौधे।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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बांसी। बारिश न होने से फसलों पर असर पड़ने लगा है। खेतों में लगे धान की फसल सूख रही है। खेतों को देख किसान दुखी होने लगे हैं। डीजल का अतिरिक्त खर्चा कंधे पर पड़ गया। खेतों में सिंचाई के लिए पंपिंग सेट से पानी चलाने की मजबूरी हो गई है। किसान बारिश के लिए टोटका व पूजा का सहारा लेने लगे हैं।
तहसील क्षेत्र के अधिकांश हिस्से में बारिश न होने से धान की फसल सूखने लगी है। सबसे बुरा हाल पथरा क्षेत्र का है। फसल को बर्बाद होते देख किसान खून के आंसू बहा रहे हैं। इसे लेकर किसान चिंता में डूबने लगे हैं। फसल को बचाने के लिए पंपिंगसेट चला कर खेत में पानी भरा जा रहा है। इंद्रदेव को मनाने के लिये लोग टोटका करने लगे हैं। हालत यह है कि लगभग पंद्रह दिनो सें बारिश नहीं हुई। खेतो में लगी धान की फसल सूखने लगी है। किसान फसल को बचाने के प्रयास मे जुट गये है।
पीले पड़ रहे धान को बचाने के लिए खेतों में पंपिगसेट से पानी भर रहे है। जो धान की फसल के लिए पर्याप्त नहीं है। डीजल का अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी पड़ रहा है। हालात यह है कि खेतों में पानी भरने के बाद कुछ घंटों में फिर से सूख जा रहा है। किसान अपने खून-पसीने की कमाई को बर्बाद होता देख दुखी हो गए हैं। क्षेत्र के सेहरी बुजुर्ग, खोरिया रघुवीर सिंह, गौरी पाठक, झहरांव, भग्गोभार, जमुनी, सिसई कला, बनगवा, रेहरा, पाला-पाली, बरगदी आदि गांवों के किसान जी जान से फसल को बचाने में लग गए हैं। किसान शारदा प्रसाद चौधरी, ओमप्रकाश यादव, चुन्नीलाल, मो. अजीज और विक्रम आदि का कहना है की मौसम का मिजाज देखकर ऐसा लग रहा है कि इस बार भी सूखे की मार को झेलना पड़ेगा।
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इटवा। मौसम की बेरुखी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। दो सप्ताह से बरसात नहीं होने से धान की फसलें सूख रही हैं। जिससे किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीर दिखने लगी हैं। जिन किसानों के पास सिंचाई के साधन है, उन्होंने खेतों में पानी भरना शुरू कर दिया है। वहीं गरीब तबके के किसान जिन्होंने किसी तरह से धान की रोपाई कर दिया है। वह बारिश की आस में रोज उमड़ते हुए बादलों पर नजर टिकाए हुए हैं कि कब बारिश होगी।
तहसील क्षेत्र के जल ग्रहण वाले क्षेत्रों को छोड़कर अन्य गांवों में पिछले पंद्रह दिनों से बारिश के न होने के कारण किसानों की धान की फसल सूखने लगी है। इससे किसानों के चेहरे पर चिन्ता के बादल मडऱाने लगे हैं। क्षेत्र के लटेरा, कलवारी, लोहटा, कुनगाई, हरैया नबेलवा, बल्लीजोत, धोबहा, बसडीला, देवभरिया सहित दर्जनों गांवो में धान की फसलें सूखने लगी है। ऐसे में जिन किसानों के पास सिंचाई के अपने संसाधन है। वह धान की फसलों में पानी भरने लगे हैं। जिसके कारण पंपों पर डीजल के लिए किसानों की भीड़ बढ़ गई है।
किसानों में पुरुषोत्तम पांडेय, सुग्रीव, विश्वकर्मा, करम हुसैन, मेहताब आदि किसानों का कहना है कि यदि निकट भविष्य में बारिश नहीं हुई तो पैदावार पर प्रतिकूल संभावना पड़ने की पूरी संभावना है। इधर-उधर से किसी प्रकार से कर्ज लेकर धान की रोपई की गई है, अब वह भी पानी के अभाव में अधर में पड़ गया है।
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तहसील क्षेत्र के अधिकांश हिस्से में बारिश न होने से धान की फसल सूखने लगी है। सबसे बुरा हाल पथरा क्षेत्र का है। फसल को बर्बाद होते देख किसान खून के आंसू बहा रहे हैं। इसे लेकर किसान चिंता में डूबने लगे हैं। फसल को बचाने के लिए पंपिंगसेट चला कर खेत में पानी भरा जा रहा है। इंद्रदेव को मनाने के लिये लोग टोटका करने लगे हैं। हालत यह है कि लगभग पंद्रह दिनो सें बारिश नहीं हुई। खेतो में लगी धान की फसल सूखने लगी है। किसान फसल को बचाने के प्रयास मे जुट गये है।
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पीले पड़ रहे धान को बचाने के लिए खेतों में पंपिगसेट से पानी भर रहे है। जो धान की फसल के लिए पर्याप्त नहीं है। डीजल का अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी पड़ रहा है। हालात यह है कि खेतों में पानी भरने के बाद कुछ घंटों में फिर से सूख जा रहा है। किसान अपने खून-पसीने की कमाई को बर्बाद होता देख दुखी हो गए हैं। क्षेत्र के सेहरी बुजुर्ग, खोरिया रघुवीर सिंह, गौरी पाठक, झहरांव, भग्गोभार, जमुनी, सिसई कला, बनगवा, रेहरा, पाला-पाली, बरगदी आदि गांवों के किसान जी जान से फसल को बचाने में लग गए हैं। किसान शारदा प्रसाद चौधरी, ओमप्रकाश यादव, चुन्नीलाल, मो. अजीज और विक्रम आदि का कहना है की मौसम का मिजाज देखकर ऐसा लग रहा है कि इस बार भी सूखे की मार को झेलना पड़ेगा।
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इटवा। मौसम की बेरुखी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। दो सप्ताह से बरसात नहीं होने से धान की फसलें सूख रही हैं। जिससे किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीर दिखने लगी हैं। जिन किसानों के पास सिंचाई के साधन है, उन्होंने खेतों में पानी भरना शुरू कर दिया है। वहीं गरीब तबके के किसान जिन्होंने किसी तरह से धान की रोपाई कर दिया है। वह बारिश की आस में रोज उमड़ते हुए बादलों पर नजर टिकाए हुए हैं कि कब बारिश होगी।
तहसील क्षेत्र के जल ग्रहण वाले क्षेत्रों को छोड़कर अन्य गांवों में पिछले पंद्रह दिनों से बारिश के न होने के कारण किसानों की धान की फसल सूखने लगी है। इससे किसानों के चेहरे पर चिन्ता के बादल मडऱाने लगे हैं। क्षेत्र के लटेरा, कलवारी, लोहटा, कुनगाई, हरैया नबेलवा, बल्लीजोत, धोबहा, बसडीला, देवभरिया सहित दर्जनों गांवो में धान की फसलें सूखने लगी है। ऐसे में जिन किसानों के पास सिंचाई के अपने संसाधन है। वह धान की फसलों में पानी भरने लगे हैं। जिसके कारण पंपों पर डीजल के लिए किसानों की भीड़ बढ़ गई है।
किसानों में पुरुषोत्तम पांडेय, सुग्रीव, विश्वकर्मा, करम हुसैन, मेहताब आदि किसानों का कहना है कि यदि निकट भविष्य में बारिश नहीं हुई तो पैदावार पर प्रतिकूल संभावना पड़ने की पूरी संभावना है। इधर-उधर से किसी प्रकार से कर्ज लेकर धान की रोपई की गई है, अब वह भी पानी के अभाव में अधर में पड़ गया है।