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छात्रा के इच्छा मृत्यु का मामला दिल्ली तक पहुंचा
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 23 Aug 2018 10:53 PM IST
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model case
सिद्धार्थनगर। छेड़खानी से आहत छात्रा द्वारा इच्छा मृत्यु की मांग करने का मामला दिल्ली तक पहुंच गया है। एक विशेष जांच एजेंसी ने मामले को संज्ञान में लेते हुए स्थानीय टीम से सच्चाई का पता लगाने को कहा है। जांच एजेंसी की स्थानीय टीम अपने स्तर पर मामले की छानबीन कर दिल्ली कार्यालय को रिपोर्ट भेजेगी। दूसरी ओर, अखबार में खबर छपने के बाद हरकत में आई पुलिस बृहस्पतिवार को छात्रा का बयान दर्ज करने के लिए उसके घर पहुंची। उस समय छात्रा मौजूद नहीं थी। इसलिए उसे बयान देने के लिए थाने बुलाया गया। वहां से लौटने के बाद छात्रा ने पुलिस पर बयान बदलवाने के लिए दबाव डालने का आरोप लगाया है।
इटवा थाना क्षेत्र के एक गांव में 19 जून को एक युवक ने घर में घुसकर बीएससी की एक छात्रा छेड़खानी की थी। विरोध करने पर उसने छात्रा की मां और बहन की पिटाई कर दी थी। शिकायत करने पर भी पुलिस ने इस मामले में जिले के एक विधायक के दबाव में कार्रवाई नहीं की। पुलिस ने पहले मामले को टालना चाहा और जब बार-बार शिकायत की गई तो छात्रा को फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी देने लगी। इससे आहत छात्रा ने 20 अगस्त को राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर सपरिवार इच्छा मृत्यु की इजाजत मांगी।
अमर उजाला में इस आशय की खबर छपने के बाद पुलिस हरकत में आई और बुधवार को चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। बृहस्पतिवार को इटवा थाना पुलिस बयान दर्ज करने के लिए छात्रा के घर पहुंची, लेकिन उस समय वह मौजूद नहीं थी। बाद में पुलिस ने छात्रा को थाने बुलाया। थाने पहुंच कर छात्रा ने पूर्व में दिए बयान दर्ज करने को कहा। छात्रा का आरोप है कि पुलिस ने उसके ऊपर बयान बदलने के लिए दबाव डाला और सहमत नहीं होने पर दरोगा ने गाली-गलौज की। उसका कहना है कि पुलिस ने एक बार फिर फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी दी है। इस संबंध्ा में डीएम कुणाल सिल्कू ने बताया कि छात्रा ने तहसील दिवस में शिकायत करने की बात कही है। मुझे इस बात की जानकारी नहीं थी। अगर वास्तव में शिकायत की गई है और अफसरों ने इस पर ध्यान नहीं दिया है तो यह गंभीर मामला है। इसकी जांच कराई जाएगी। दोषी मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
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दबाव डालने की बात गलत : एसओ
इटवा थाने के एसओ अखिलानंद उपाध्याय ने कहा है कि छात्रा पर किसी तरह का दबाव नहीं डाला गया। उसे बयान दर्ज कराने के लिए थाने बुलाया गया था। बयान दर्ज करने के लिए छात्रा से महिला पुलिस मिली थी। पुलिस मामले की जांच कर रही है और जो दोषी होगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
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इटवा थाना क्षेत्र के एक गांव में 19 जून को एक युवक ने घर में घुसकर बीएससी की एक छात्रा छेड़खानी की थी। विरोध करने पर उसने छात्रा की मां और बहन की पिटाई कर दी थी। शिकायत करने पर भी पुलिस ने इस मामले में जिले के एक विधायक के दबाव में कार्रवाई नहीं की। पुलिस ने पहले मामले को टालना चाहा और जब बार-बार शिकायत की गई तो छात्रा को फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी देने लगी। इससे आहत छात्रा ने 20 अगस्त को राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर सपरिवार इच्छा मृत्यु की इजाजत मांगी।
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अमर उजाला में इस आशय की खबर छपने के बाद पुलिस हरकत में आई और बुधवार को चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। बृहस्पतिवार को इटवा थाना पुलिस बयान दर्ज करने के लिए छात्रा के घर पहुंची, लेकिन उस समय वह मौजूद नहीं थी। बाद में पुलिस ने छात्रा को थाने बुलाया। थाने पहुंच कर छात्रा ने पूर्व में दिए बयान दर्ज करने को कहा। छात्रा का आरोप है कि पुलिस ने उसके ऊपर बयान बदलने के लिए दबाव डाला और सहमत नहीं होने पर दरोगा ने गाली-गलौज की। उसका कहना है कि पुलिस ने एक बार फिर फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी दी है। इस संबंध्ा में डीएम कुणाल सिल्कू ने बताया कि छात्रा ने तहसील दिवस में शिकायत करने की बात कही है। मुझे इस बात की जानकारी नहीं थी। अगर वास्तव में शिकायत की गई है और अफसरों ने इस पर ध्यान नहीं दिया है तो यह गंभीर मामला है। इसकी जांच कराई जाएगी। दोषी मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
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दबाव डालने की बात गलत : एसओ
इटवा थाने के एसओ अखिलानंद उपाध्याय ने कहा है कि छात्रा पर किसी तरह का दबाव नहीं डाला गया। उसे बयान दर्ज कराने के लिए थाने बुलाया गया था। बयान दर्ज करने के लिए छात्रा से महिला पुलिस मिली थी। पुलिस मामले की जांच कर रही है और जो दोषी होगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।