{"_id":"5704019a4f1c1b5935c8139c","slug":"council-schools-suffering-toilet","type":"story","status":"publish","title_hn":"परिषदीय विद्यालयों के शौचालय बेहाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
परिषदीय विद्यालयों के शौचालय बेहाल
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Tue, 05 Apr 2016 11:49 PM IST
विज्ञापन
खेसरहा के प्राथमिक विद्यालय में बदहाल पड़ा शौचालय।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विकासखंड खेसरहा के प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालय में बने अधिकतर शौचालय निरर्थक साबित हो रहे हैं। देखरेख के अभाव में शौचालय बदहाल पड़े हैं। कहीं शौचालय गंदगी से पटे हैं तो कहीं क्षतिग्रस्त हाल में हैं।
ऐसे में बच्चों को शौच के लिए खुले में जाना पड़ रहा है। एक तरफ सरकार खुद खुले में शौच की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने पर जोर दे रही हैं, वही परिषदीय विद्यालयों में अव्यवस्था से बच्चे परेशान हैं। क्षेत्र के कोटिया पांडेय, परोई, कुड़जा, सकारपार, भुसौला, बनकेगांव, मरवटिया बाजार के प्राथमिक व भूसौला, वेलवा लगनुही, रेहरा, झुंडिया के पूर्व माध्यमिक विद्यालय के शौचालयों का कुछ ऐसा ही हाल है।
अभिभावक दिग्विजय पांडेय, भानु प्रताप सिंह, मुबारक अली, श्यामधर यादव, सोमन प्रसाद का कहना है कि परिषदीय विद्यालय में बनने वाले शौचालयों में मानक व गुणवत्ता का कोई ध्यान नहीं दिया जाता है। नतीजा शौचालय कुछ ही दिनों में जर्जर हो जाता है।
विज्ञापन
लोगों की यह भी शिकायत है कि शौचालयों की सफाई पर भी ध्यान नहीं दिया जाता है। इस संबंध मे खंड शिक्षा अधिकारी ज्ञान चन्द्र मिश्र का कहना है कि जो भी शौचालय जर्जर हैं, उनके नवनिर्माण के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। धन मिलने के बाद निर्माण किया जाएगा।
विज्ञापन
ऐसे में बच्चों को शौच के लिए खुले में जाना पड़ रहा है। एक तरफ सरकार खुद खुले में शौच की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने पर जोर दे रही हैं, वही परिषदीय विद्यालयों में अव्यवस्था से बच्चे परेशान हैं। क्षेत्र के कोटिया पांडेय, परोई, कुड़जा, सकारपार, भुसौला, बनकेगांव, मरवटिया बाजार के प्राथमिक व भूसौला, वेलवा लगनुही, रेहरा, झुंडिया के पूर्व माध्यमिक विद्यालय के शौचालयों का कुछ ऐसा ही हाल है।
विज्ञापन
अभिभावक दिग्विजय पांडेय, भानु प्रताप सिंह, मुबारक अली, श्यामधर यादव, सोमन प्रसाद का कहना है कि परिषदीय विद्यालय में बनने वाले शौचालयों में मानक व गुणवत्ता का कोई ध्यान नहीं दिया जाता है। नतीजा शौचालय कुछ ही दिनों में जर्जर हो जाता है।
विज्ञापन
लोगों की यह भी शिकायत है कि शौचालयों की सफाई पर भी ध्यान नहीं दिया जाता है। इस संबंध मे खंड शिक्षा अधिकारी ज्ञान चन्द्र मिश्र का कहना है कि जो भी शौचालय जर्जर हैं, उनके नवनिर्माण के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। धन मिलने के बाद निर्माण किया जाएगा।