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फार्मासिस्ट के भरोसे चल रहा सीएचसी
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Fri, 08 Jul 2016 10:43 PM IST
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इटवा क्षेत्र के कठेला में बदहाल पड़ा पीएचसी।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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इटवा। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कठेला बदहाल है। समस्याएं मुंह खोले खड़ी हैं। यहां डॉक्टर की तैनाती नहीं है। महिला स्टाफ का भी अभाव है। नतीजा मरीज भी नाममात्र के आते हैं। एक फार्मासिस्ट के भरोसे अस्पताल चल रहा है। सबसे बुरा हाल महिला मरीजों का है। 20 किमी दूर इटवा सीएचसी में लोगों को इलाज के लिए जाना पड़ रहा है। विभागीय अनदेखी से क्षेत्र में दुकान चला रहे अप्रशिक्षित डॉक्टरों की चांदी हो गई है।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कठेला की बदहाली से करीब पचास गांव के ग्रामीणों का स्वास्थ्य भगवान भरोसे है। कई साल से अस्पताल डॉक्टर विहीन चल है। महिला चिकित्सक न होने से जननी सुरक्षा योजना यहां दम तोड़ रही है। फार्मासिस्ट के आने पर ही ताला खुलता है। यहां बेहतर दवा व स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में मरीज निजी व अप्रशिक्षित चिकित्सकों के पास पहुंच रहे हैं।
हालात यह है कि कठेला गर्वी, कठेला शर्की, चेचराफ, हौसिलाबाद, बिन्दुआरी, औरहवा ग्रांट आदि गांवों के ग्रामीण बीस किमी की दूरी तय कर इटवा पहुंचते हैं। नदी के दोआबा में बने अस्पताल परिसर में विभाग ने लाखों खर्च कर पानी की टंकी व वाटर सप्लाई का जाल बिछाया, लेकिन उदासीनता के चलते खराब हो गया।
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देखरेख के अभाव में स्टाफ कॉलोनी भी बदहाल हो गई है। मरीजों को पेयजल के लिए तरसना पड़ता है। क्षेत्र के ग्रामीणों को चिकित्सक की कमी महसूस हो रही है। फार्मासिस्ट शिवसहाय उपाध्याय, लैैब टेक्नीशियन विमल मिश्रा व वार्ड ब्वाय की तैनाती है।
स्थानीय लोगो ने पीएचसी पर चिकित्सक व महिला स्टॉफ के तैनाती की मांग की है। फार्मासिस्ट शिवसहाय ने बताया कि विभाग से सुविधाएं मिल रही है। प्रयास रहता है कि लाभ ग्रामीणों तक पहुंचे। चिकित्सक की कमी के संबंध में उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जाता है। उधर, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. राजेंद्र कपूर ने कहा कि डॉक्टरों की कमी के चलते कुछ जगहों पर दिक्कतें आ रही हैं। शासन को अवगत कराया गया है। डॉक्टरों की नई तैनाती होते ही इस अस्पताल पर नियुक्ति की जाएगी।
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प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कठेला की बदहाली से करीब पचास गांव के ग्रामीणों का स्वास्थ्य भगवान भरोसे है। कई साल से अस्पताल डॉक्टर विहीन चल है। महिला चिकित्सक न होने से जननी सुरक्षा योजना यहां दम तोड़ रही है। फार्मासिस्ट के आने पर ही ताला खुलता है। यहां बेहतर दवा व स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में मरीज निजी व अप्रशिक्षित चिकित्सकों के पास पहुंच रहे हैं।
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हालात यह है कि कठेला गर्वी, कठेला शर्की, चेचराफ, हौसिलाबाद, बिन्दुआरी, औरहवा ग्रांट आदि गांवों के ग्रामीण बीस किमी की दूरी तय कर इटवा पहुंचते हैं। नदी के दोआबा में बने अस्पताल परिसर में विभाग ने लाखों खर्च कर पानी की टंकी व वाटर सप्लाई का जाल बिछाया, लेकिन उदासीनता के चलते खराब हो गया।
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देखरेख के अभाव में स्टाफ कॉलोनी भी बदहाल हो गई है। मरीजों को पेयजल के लिए तरसना पड़ता है। क्षेत्र के ग्रामीणों को चिकित्सक की कमी महसूस हो रही है। फार्मासिस्ट शिवसहाय उपाध्याय, लैैब टेक्नीशियन विमल मिश्रा व वार्ड ब्वाय की तैनाती है।
स्थानीय लोगो ने पीएचसी पर चिकित्सक व महिला स्टॉफ के तैनाती की मांग की है। फार्मासिस्ट शिवसहाय ने बताया कि विभाग से सुविधाएं मिल रही है। प्रयास रहता है कि लाभ ग्रामीणों तक पहुंचे। चिकित्सक की कमी के संबंध में उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जाता है। उधर, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. राजेंद्र कपूर ने कहा कि डॉक्टरों की कमी के चलते कुछ जगहों पर दिक्कतें आ रही हैं। शासन को अवगत कराया गया है। डॉक्टरों की नई तैनाती होते ही इस अस्पताल पर नियुक्ति की जाएगी।