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Siddharthnagar News: कस्बे के बाजारों में दुकान लगाकर छांगुर बाबा ने तैयार किया नेटवर्क
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। धर्मांतरण कराने का नेटवर्क संचालित करने और देशविरोधी गतिविधियों के साथ ही विदेशी फंडिंग के मामले में बलरामपुर के उतरौला निवासी जमालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा की गिरफ्तारी के बाद उससे जुड़े नए-नए मामले सामने आ रहे हैं। बलरामपुर से सटे पड़ोसी जिलों के सीमावर्ती कस्बों के साप्ताहिक बाजार में दुकान लगाकर अंगूठी और नग बेचने की आड़ में नेटवर्क खड़ा करने के भी इनपुट भी जांच एजेंसियों को मिले हैं। इन्हीं बाजारों में उसके गिरोह से जुड़े लोग मिलते-जुलते थे साथ ही दुकान पर आने वाली महिलाओं को वह बरगलाता था।
एजेंसियां इन इनपुट पर भी काम कर रहीं हैं। बताया जा रहा है कि छांगुर बाबा दिखाने के लिए नग और अंगूठी बेचता था। असल में उसके लोग साप्ताहिक बाजार में उससे संपर्क करते थे। इन्हीं गुर्गों के जरिये नेटवर्क को मजबूत करने का काम होता था। जांच एजेंसियों को ऐसे इनपुट मिले हैं। इसके बाद बलरामपुर से सटे कस्बों के साप्ताहिक बाजार के बारे में जानकारी ले रही है, ताकि छांगुर से जुड़े लोगों के बारे में जानकारी मिल सके और उसके काले कारनामे के दायरे में कितने और कौन लोग शामिल हैं इसका खुलासा हो सके। ताकि उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सके।
सूत्रों के मुताबिक छांगुर बाबा के साथ काम करने वालों से सुरक्षा एजेंसियों को जानकारी मिली है कि बाजार में छांगुर के गुर्गे महिलाओं से उसका संपर्क करवाते थे। बाजार के बाद एक स्थान तय होता था, जहां छांगुर बैठक करता था। किसी को धर्म की बात बताकर तो किसी को हिंदू धर्म की बंदिशों और इसे गलत बताते हुए धर्मांतरण के लिए उकसाता था। कुछ महिलाएं उसकी बातों में आकर उसके बताए रास्ते पर चल पड़ती थीं, तो कुछ रुपये के लालच में आ जातीं थीं। उसके टारगेट पर गरीबी से परेशान और बीमारी से तंग लोग रहते थे। जो जरूरतें पूरी करने के लिए विवश हो जाते थे।
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इन सबके पीछे कहीं न कहीं एक मुखिया जरूर होता था। इनमें सामाजिक रूप से प्रभावशाली व्यक्ति भी थे जिनके संपर्क में हर तबके के लोग हों। इनमें अपने समाज की अगुवाई करने वाले लोग भी शामिल होते थे। छांगुर इसके लिए उन्हें मोटी रकम देता था, जो हैंडलर के रूप में काम थे। जांच एजेंसियां इसकी सच्चाई और छांगुर से जुड़े संदिग्धों की कुंडली खंगाल रहीं है। बढ़नी से डुमरियागंंज, इटवा और कठेला तक में कई बाजार और मेले समय- समय पर लगते हैं। साथ ही यह इलाका बलरामपुर जनपद से लगता भी है। इन बाजारों में छांगुर का आना-जाना था।
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सिद्धार्थनगर। धर्मांतरण कराने का नेटवर्क संचालित करने और देशविरोधी गतिविधियों के साथ ही विदेशी फंडिंग के मामले में बलरामपुर के उतरौला निवासी जमालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा की गिरफ्तारी के बाद उससे जुड़े नए-नए मामले सामने आ रहे हैं। बलरामपुर से सटे पड़ोसी जिलों के सीमावर्ती कस्बों के साप्ताहिक बाजार में दुकान लगाकर अंगूठी और नग बेचने की आड़ में नेटवर्क खड़ा करने के भी इनपुट भी जांच एजेंसियों को मिले हैं। इन्हीं बाजारों में उसके गिरोह से जुड़े लोग मिलते-जुलते थे साथ ही दुकान पर आने वाली महिलाओं को वह बरगलाता था।
एजेंसियां इन इनपुट पर भी काम कर रहीं हैं। बताया जा रहा है कि छांगुर बाबा दिखाने के लिए नग और अंगूठी बेचता था। असल में उसके लोग साप्ताहिक बाजार में उससे संपर्क करते थे। इन्हीं गुर्गों के जरिये नेटवर्क को मजबूत करने का काम होता था। जांच एजेंसियों को ऐसे इनपुट मिले हैं। इसके बाद बलरामपुर से सटे कस्बों के साप्ताहिक बाजार के बारे में जानकारी ले रही है, ताकि छांगुर से जुड़े लोगों के बारे में जानकारी मिल सके और उसके काले कारनामे के दायरे में कितने और कौन लोग शामिल हैं इसका खुलासा हो सके। ताकि उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सके।
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सूत्रों के मुताबिक छांगुर बाबा के साथ काम करने वालों से सुरक्षा एजेंसियों को जानकारी मिली है कि बाजार में छांगुर के गुर्गे महिलाओं से उसका संपर्क करवाते थे। बाजार के बाद एक स्थान तय होता था, जहां छांगुर बैठक करता था। किसी को धर्म की बात बताकर तो किसी को हिंदू धर्म की बंदिशों और इसे गलत बताते हुए धर्मांतरण के लिए उकसाता था। कुछ महिलाएं उसकी बातों में आकर उसके बताए रास्ते पर चल पड़ती थीं, तो कुछ रुपये के लालच में आ जातीं थीं। उसके टारगेट पर गरीबी से परेशान और बीमारी से तंग लोग रहते थे। जो जरूरतें पूरी करने के लिए विवश हो जाते थे।
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इन सबके पीछे कहीं न कहीं एक मुखिया जरूर होता था। इनमें सामाजिक रूप से प्रभावशाली व्यक्ति भी थे जिनके संपर्क में हर तबके के लोग हों। इनमें अपने समाज की अगुवाई करने वाले लोग भी शामिल होते थे। छांगुर इसके लिए उन्हें मोटी रकम देता था, जो हैंडलर के रूप में काम थे। जांच एजेंसियां इसकी सच्चाई और छांगुर से जुड़े संदिग्धों की कुंडली खंगाल रहीं है। बढ़नी से डुमरियागंंज, इटवा और कठेला तक में कई बाजार और मेले समय- समय पर लगते हैं। साथ ही यह इलाका बलरामपुर जनपद से लगता भी है। इन बाजारों में छांगुर का आना-जाना था।