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नाव नहीं मिलने के कारण बीमार किशोरी की मौत
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भनवापुर क्षेत्र के वीरपुर कोहलवा की आमिरा खातून के शव को दफनाने के लिए स्टीमर से बलरामपुर जनपद के
- फोटो : SIDDHARTHNAGAR
नाव नहीं मिलने के कारण बीमार किशोरी की मौत
भनवापुर (सिद्धार्थनगर)। जिले में बाढ़ जानलेवा हो गई है। बुधवार को एक किशोरी की नाव नहीं मिलने से इलाज नहीं मिल पाया और उसकी मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि यदि समय से नाव मिल जाती तो बेटी को बचाया जा सकता था। इसी तरह एक दिन पहले बिजौरा गांव में नाव के अभाव में बीमार बुजुर्ग रामअवतार की जान चली गई थी।
त्रिलोकपुर थाना क्षेत्र का वीरपुर कोहल गांव चारों तरफ से बाढ़ से घिरा है। गांव के अदील अहमद ने बताया कि मंगलवार को उनकी सोलह वर्षीय बेटी आमिरा खातून की तबीयत खराब हो गई। गांव में समुचित इलाज नहीं मिल पाने के कारण एसडीएम डुमरियागंज को रात में करीब नौ बजे फोन करके बेटी के इलाज के लिए नाव की व्यवस्था कराने के लिए कहा, लेकिन नाव नहीं मिल पाई। बुधवार सुबह करीब सात बजे एसडीएम को फिर फोन किया लेकिन बात नहीं हो सकी। सुबह करीब नौ बजे बेटी की मौत हो गई। तहसील प्रशासन ने सुबह 11 बजे मोटर बोट उपलब्ध कराया। अदील ने कहा कि यदि रात में नाव मिल जाती तो बेटी का समय से इलाज मिल जाता और वह बच सकती थी।
गांव वीरपुर कोहन में इस समय हर तरफ पानी ही पानी नजर आ रहा है। आने जाने के सभी रास्ते बंद हैं। गांव के अदील अहमद की पुत्री आमिरा खातून (16) पिछले चार दिनों से बीमार थी। उसे बुखार के साथ खांसी आ रही थी। बाढ़ की वजह से रास्ता बंद होने के कारण परिजन उसे इलाज के लिए बाहर नहीं ले सके। गांव के चौराहे के निजी चिकित्सक से इलाज करा रहे थे। मंगलवार को उसकी तबीयत अधिक खराब हो गई तो प्रशासन से नाव की मांग की गई, लेकिन मिल नहीं पाई।
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गांव से बाहर करना पड़ा दफन
बाढ़ के कारण आमिरा के पिता के सामने बेटी के शव को दफनाने की समस्या खड़ी हो गई। चारों तरफ पानी भरा होने से खाली जमीन नहीं मिली तो मोटर बोट से शव को राप्ती नदी पार करके बलरामपुर जिले के बौंड़िहार होते हुए भवानीगंज थाना क्षेत्र के बयारा स्थित कब्रिस्तान में शव को दफनाया गया।
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नाव कम थी इसलिए दो-तीन गांवों में एक नाव की व्यवस्था की गई थी। जैसे ही नाव उपलब्ध हुई तो वीरपुर कोहन गांव में भेजी गई। बुधवार को और नाव एवं मोटर बोट उपलब्ध कराई गई है। प्रशासन जरूरतमंदों की हर संभव मदद कर रहा है।
- अरुण कुमार वर्मा, तहसीलदार डुमरियागंज
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भनवापुर (सिद्धार्थनगर)। जिले में बाढ़ जानलेवा हो गई है। बुधवार को एक किशोरी की नाव नहीं मिलने से इलाज नहीं मिल पाया और उसकी मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि यदि समय से नाव मिल जाती तो बेटी को बचाया जा सकता था। इसी तरह एक दिन पहले बिजौरा गांव में नाव के अभाव में बीमार बुजुर्ग रामअवतार की जान चली गई थी।
त्रिलोकपुर थाना क्षेत्र का वीरपुर कोहल गांव चारों तरफ से बाढ़ से घिरा है। गांव के अदील अहमद ने बताया कि मंगलवार को उनकी सोलह वर्षीय बेटी आमिरा खातून की तबीयत खराब हो गई। गांव में समुचित इलाज नहीं मिल पाने के कारण एसडीएम डुमरियागंज को रात में करीब नौ बजे फोन करके बेटी के इलाज के लिए नाव की व्यवस्था कराने के लिए कहा, लेकिन नाव नहीं मिल पाई। बुधवार सुबह करीब सात बजे एसडीएम को फिर फोन किया लेकिन बात नहीं हो सकी। सुबह करीब नौ बजे बेटी की मौत हो गई। तहसील प्रशासन ने सुबह 11 बजे मोटर बोट उपलब्ध कराया। अदील ने कहा कि यदि रात में नाव मिल जाती तो बेटी का समय से इलाज मिल जाता और वह बच सकती थी।
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गांव वीरपुर कोहन में इस समय हर तरफ पानी ही पानी नजर आ रहा है। आने जाने के सभी रास्ते बंद हैं। गांव के अदील अहमद की पुत्री आमिरा खातून (16) पिछले चार दिनों से बीमार थी। उसे बुखार के साथ खांसी आ रही थी। बाढ़ की वजह से रास्ता बंद होने के कारण परिजन उसे इलाज के लिए बाहर नहीं ले सके। गांव के चौराहे के निजी चिकित्सक से इलाज करा रहे थे। मंगलवार को उसकी तबीयत अधिक खराब हो गई तो प्रशासन से नाव की मांग की गई, लेकिन मिल नहीं पाई।
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गांव से बाहर करना पड़ा दफन
बाढ़ के कारण आमिरा के पिता के सामने बेटी के शव को दफनाने की समस्या खड़ी हो गई। चारों तरफ पानी भरा होने से खाली जमीन नहीं मिली तो मोटर बोट से शव को राप्ती नदी पार करके बलरामपुर जिले के बौंड़िहार होते हुए भवानीगंज थाना क्षेत्र के बयारा स्थित कब्रिस्तान में शव को दफनाया गया।
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नाव कम थी इसलिए दो-तीन गांवों में एक नाव की व्यवस्था की गई थी। जैसे ही नाव उपलब्ध हुई तो वीरपुर कोहन गांव में भेजी गई। बुधवार को और नाव एवं मोटर बोट उपलब्ध कराई गई है। प्रशासन जरूरतमंदों की हर संभव मदद कर रहा है।
- अरुण कुमार वर्मा, तहसीलदार डुमरियागंज