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एटीएम सूखे, आस टूटे
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Tue, 08 May 2018 10:52 PM IST
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डकीनगंज में बंद एटीएम बूथ
सिद्धार्थनगर। जिले में कैश की किल्लत ने आम आदमी की परेशानी बढ़ा दी है। एटीएम से लेकर बैंक तक खाली हो चुके हैं। डिमांड के अनुरूप आरबीआई (रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया) जिले में कैश नहीं दे पा रहा है। जबकि एसबीआई नौगढ़, बांसी और डुमरियागंज की शाखा से कई बार रकम के लिए मेल भी भेजा जा चुका है। लोगों को शादी, विवाह के मौसम में रुपये के लिए परेशान होना पड़ रहा है।
नोटबंदी के बाद से जिले को रकम के लिए परेशान होना पड़ा है। नोटबंदी के दौरान एटीएम और बैंकों में लोगों की लंबी-लंबी लाइनें लगती थीं, वही हाल मौजूदा समय में भी हो गया है। जिले के जिन एटीएम पर रुपये होने की जानकारी मिल रही है, लोगों की भीड़ जमा हो जा रही है। इस कारण कई बार विवाद भी हो जाता है। लग्न के कारण परेशानी और भी बढ़ गई है। लोगों को अपने रुपये निकालने के लिए परेशान होना पड़ रहा है। उस पर नेटवर्क की समस्या उपभोक्ताओं को और भी परेशान कर रही है।
नेपाली नागरिकों ने बढ़ाई समस्या
एक तो लोगों को एटीएम से किसी तरह रुपये मिल रहे हैं। उस पर नेपाली नागरिकों ने समस्या और भी बढ़ा दी है। बॉर्डर से सटे होने के कारण मुख्यालय सहित बर्डपुर, लोटन, मोहना आदि क्षेत्रों में नेपाली नागरिक रुपये निकालने आते हैं। पीएनबी सहित एसबीआई में नेपाल के एभरेस्ट, हिमालयन आदि बैंकों के एटीएम से रकम निकालते हैं। एक बार में एक दिन 10000 हजार की निकासी करते हैं। इस दौरान महज 120 रुपये ही चार्ज लगता है। जबकि इसमें 200 रुपये की शुद्ध बचत हो जाती है। बताया जाता है कि कोई भी नेपाली नागरिक एक एटीएम लेकर नहीं आता है, उनके पास कम से कम पांच एटीएम रहता है। इस कारण एक बार में 50 हजार का रकम निकालकर चले जाते हैं। नोटबंदी के बाद से भारतीय रुपये की डिमांड नेपाल में और भी बढ़ गई है। शहर के रहने वाली सन्नी तिवारी ने कहा कि कैश की कमी ने रुला दिया है। नेपाली नागरिकों द्वारा एक बार में पांच-पांच एटीएम से रुपये की निकासी की जाती है। मुख्यालय के लगभग सभी एटीएम पर नेपाली कार्ड से निकासी की जा रही है।
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इस कारण परेशानी और भी बढ़ गई है। बांसी की रहने वाली संध्या श्रीवास्तव ने बताया कि शादी के सीजन में रकम के लिए परेशान होना पड़ रहा है। गिने-चुने एटीएम से रुपये की निकासी हो रही है। इसके कारण परेशानी और भी बढ़ गई है। शिवपत नगर के रहने वाले पकंज चौधरी ने बताया कि 22 किलोमीटर दूर से रुपये निकालने पिछले दो दिनों से आ रहा हूं। लेकिन एटीएम में नो कैश का बोर्ड देखकर निराशा हाथ लग रही है। बॉर्डर से सटे बजहा कस्बे के रहने वाले मो. इब्राहीम ने बताया कि कैश की परेशानी ने रुला दिया है। मौजूदा समय में हालात नोटबंदी जैसे हो गए हैं। रुपये के लिए इतनी परेशानी कभी नहीं हुई।
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नोटबंदी के बाद से जिले को रकम के लिए परेशान होना पड़ा है। नोटबंदी के दौरान एटीएम और बैंकों में लोगों की लंबी-लंबी लाइनें लगती थीं, वही हाल मौजूदा समय में भी हो गया है। जिले के जिन एटीएम पर रुपये होने की जानकारी मिल रही है, लोगों की भीड़ जमा हो जा रही है। इस कारण कई बार विवाद भी हो जाता है। लग्न के कारण परेशानी और भी बढ़ गई है। लोगों को अपने रुपये निकालने के लिए परेशान होना पड़ रहा है। उस पर नेटवर्क की समस्या उपभोक्ताओं को और भी परेशान कर रही है।
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नेपाली नागरिकों ने बढ़ाई समस्या
एक तो लोगों को एटीएम से किसी तरह रुपये मिल रहे हैं। उस पर नेपाली नागरिकों ने समस्या और भी बढ़ा दी है। बॉर्डर से सटे होने के कारण मुख्यालय सहित बर्डपुर, लोटन, मोहना आदि क्षेत्रों में नेपाली नागरिक रुपये निकालने आते हैं। पीएनबी सहित एसबीआई में नेपाल के एभरेस्ट, हिमालयन आदि बैंकों के एटीएम से रकम निकालते हैं। एक बार में एक दिन 10000 हजार की निकासी करते हैं। इस दौरान महज 120 रुपये ही चार्ज लगता है। जबकि इसमें 200 रुपये की शुद्ध बचत हो जाती है। बताया जाता है कि कोई भी नेपाली नागरिक एक एटीएम लेकर नहीं आता है, उनके पास कम से कम पांच एटीएम रहता है। इस कारण एक बार में 50 हजार का रकम निकालकर चले जाते हैं। नोटबंदी के बाद से भारतीय रुपये की डिमांड नेपाल में और भी बढ़ गई है। शहर के रहने वाली सन्नी तिवारी ने कहा कि कैश की कमी ने रुला दिया है। नेपाली नागरिकों द्वारा एक बार में पांच-पांच एटीएम से रुपये की निकासी की जाती है। मुख्यालय के लगभग सभी एटीएम पर नेपाली कार्ड से निकासी की जा रही है।
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इस कारण परेशानी और भी बढ़ गई है। बांसी की रहने वाली संध्या श्रीवास्तव ने बताया कि शादी के सीजन में रकम के लिए परेशान होना पड़ रहा है। गिने-चुने एटीएम से रुपये की निकासी हो रही है। इसके कारण परेशानी और भी बढ़ गई है। शिवपत नगर के रहने वाले पकंज चौधरी ने बताया कि 22 किलोमीटर दूर से रुपये निकालने पिछले दो दिनों से आ रहा हूं। लेकिन एटीएम में नो कैश का बोर्ड देखकर निराशा हाथ लग रही है। बॉर्डर से सटे बजहा कस्बे के रहने वाले मो. इब्राहीम ने बताया कि कैश की परेशानी ने रुला दिया है। मौजूदा समय में हालात नोटबंदी जैसे हो गए हैं। रुपये के लिए इतनी परेशानी कभी नहीं हुई।